{"_id":"60ca5ec28ebc3e6b7230d88e","slug":"kgmu-doctors-got-big-achievement-lko-city-news-lko5827855167","type":"story","status":"publish","title_hn":"केजीएमयू के चिकित्सकों को बड़ी कामयाबी, डायलिसिस पर रहते कराया महिला का सामान्य प्रसव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
केजीएमयू के चिकित्सकों को बड़ी कामयाबी, डायलिसिस पर रहते कराया महिला का सामान्य प्रसव
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के चिकित्सकों ने बुधवार को एक नई उपलब्धि हासिल की। एक महिला के गुर्दे फेल हो चुके थे और वह गर्भवती थी। चिकित्सकों ने इस महिला की डायलिसिस कराते हुए सामान्य प्रसव कराया। केजीएमयू प्रशासन का दावा है कि प्रदेश में ऐसा पहली बार हुआ है, जब किसी महिला की डायलिसिस पर रहते हुए सामान्य डिलीवरी हुई है।
केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. सुधीर सिंह ने बताया कि फर्रुखाबाद निवासी 23 वर्षीय निधि को 19 मार्च 2021 को 34 सप्ताह की गर्भावस्था के साथ भर्ती किया गया था। मरीज को किडनी और रेस्पेरेटरी फेल्योर की शिकायत थी। इन सबकी वजह से महिला के बच्चे की गर्भ में ही मौत हो गई थी। महिला की हालत ऑपरेशन करने की नहीं थी। उसकी जान बचाने के लिए भर्ती करने के तुरंत बाद उसे वेंटिलेटर और वैसोप्रेशर सपोर्ट पर रखा गया।
लो ब्लड प्रेशर के कारण वह नियमित डायलिसिस के लिए अनुपयुक्त थी। इसलिए निरंतर रीनल रिप्लेसमेंट थेरेपी (सीआरआरटी) शुरू की गई। उसने सीआरआरटी पर रहते हुए ही मृत भ्रूण को जन्म दिया। धीरे-धीरे उसकी स्थिति में सुधार हुआ और उसे नियमित डायलिसिस के लिए स्थानांतरित कर दिया गया। उसके गुर्दे ने काम करना शुरू किया तथा श्वसन मापदंड में भी सुधार हुआ। इसके बाद उसे वेंटिलेटर के साथ-साथ डायलिसिस से हटा दिया गया। एक महीने तक आईसीयू में रहने के बाद उसे छुट्टी दे दी गई। डॉ. सुधीर सिंह के अनुसार, प्रदेश में यह पहली बार है जब डायलिसिस पर रहते हुए किसी मरीज की सामान्य डिलीवरी हुई है, क्योंकि यह सुविधा और विशेषज्ञता सीमित केंद्रों पर ही उपलब्ध है। उनके अनुसार यह महिला कई अंगों की विफलता के बावजूद बच गई, लेकिन इस क्षेत्र में काम करने वाले डॉक्टरों और पैरामेडिक्स के लिए यह सलाह दी जाती है कि बीमारी के दौरान मरीजों को उच्च केंद्रों पर जल्दी भेज दिया जाए। एक बार जब कई अंग विफल हो जाते हैं, तो बचने की संभावना कम हो जाती है।
विज्ञापन
उपचार करने वाली टीम
स्त्री एवं प्रसूति रोग : प्रो. उमा सिंह, प्रो. रेखा सचान, डॉ. नम्रता।
मेडिसिन : प्रो. वीरेंद्र आतम, डॉ. मेघावी गौतम।
क्रिटिकल केयर : डॉ. अविनाश, डॉ. आर्मिन, डॉ. नबील, डॉ. सुलेखा, डॉ. सुहैल, डॉ. सौमित्र, डॉ. साई सरन।
विज्ञापन
केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. सुधीर सिंह ने बताया कि फर्रुखाबाद निवासी 23 वर्षीय निधि को 19 मार्च 2021 को 34 सप्ताह की गर्भावस्था के साथ भर्ती किया गया था। मरीज को किडनी और रेस्पेरेटरी फेल्योर की शिकायत थी। इन सबकी वजह से महिला के बच्चे की गर्भ में ही मौत हो गई थी। महिला की हालत ऑपरेशन करने की नहीं थी। उसकी जान बचाने के लिए भर्ती करने के तुरंत बाद उसे वेंटिलेटर और वैसोप्रेशर सपोर्ट पर रखा गया।
विज्ञापन
लो ब्लड प्रेशर के कारण वह नियमित डायलिसिस के लिए अनुपयुक्त थी। इसलिए निरंतर रीनल रिप्लेसमेंट थेरेपी (सीआरआरटी) शुरू की गई। उसने सीआरआरटी पर रहते हुए ही मृत भ्रूण को जन्म दिया। धीरे-धीरे उसकी स्थिति में सुधार हुआ और उसे नियमित डायलिसिस के लिए स्थानांतरित कर दिया गया। उसके गुर्दे ने काम करना शुरू किया तथा श्वसन मापदंड में भी सुधार हुआ। इसके बाद उसे वेंटिलेटर के साथ-साथ डायलिसिस से हटा दिया गया। एक महीने तक आईसीयू में रहने के बाद उसे छुट्टी दे दी गई। डॉ. सुधीर सिंह के अनुसार, प्रदेश में यह पहली बार है जब डायलिसिस पर रहते हुए किसी मरीज की सामान्य डिलीवरी हुई है, क्योंकि यह सुविधा और विशेषज्ञता सीमित केंद्रों पर ही उपलब्ध है। उनके अनुसार यह महिला कई अंगों की विफलता के बावजूद बच गई, लेकिन इस क्षेत्र में काम करने वाले डॉक्टरों और पैरामेडिक्स के लिए यह सलाह दी जाती है कि बीमारी के दौरान मरीजों को उच्च केंद्रों पर जल्दी भेज दिया जाए। एक बार जब कई अंग विफल हो जाते हैं, तो बचने की संभावना कम हो जाती है।
विज्ञापन
उपचार करने वाली टीम
स्त्री एवं प्रसूति रोग : प्रो. उमा सिंह, प्रो. रेखा सचान, डॉ. नम्रता।
मेडिसिन : प्रो. वीरेंद्र आतम, डॉ. मेघावी गौतम।
क्रिटिकल केयर : डॉ. अविनाश, डॉ. आर्मिन, डॉ. नबील, डॉ. सुलेखा, डॉ. सुहैल, डॉ. सौमित्र, डॉ. साई सरन।