सांसें बंद अगर हो जाएं तो रिश्ते सब बेमानी हैं...
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जाने-माने कवि और कई बड़े शायर। कविता और शायरी की जुगलबंदी से सराबोर ऐसी
‘हेल्प यू’ संस्था की ओर से आयोजित ‘अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलन और मुशायरे’ में कई रंग देखने को मिले। शायरों ने मुहब्बत की बात कही तो देश के ताजा हालात पर भी चोट करने से नहीं चूके। इस आयोजन में हास्य, व्यंग्य, गीत और नई कविता से भी रचनाकारों ने कई रंगों में पिरो दिया।
युवा
शायर निर्मल दर्शन ने दिल के जज्बातों को अपनी शायरी में बयां किया-‘ये
दिल कुछ गंवाना चाहता है, न जाने ये दिल क्या पाना चाहता है...’। वहीं शरफ
बहराइची ने सियासी हालात से लेकर समूची जिंदगी का फलसफा एक गजल के जरिए
कहा-‘फकत मन सबों की लड़ाई है, वरना सियासत में अच्छा-बुरा कुछ नहीं है..’।
एक दूसरी गजल के जरिए भी आज के हालात पर चोट करते हुए कहा-‘शरफ उनसे अब
मुलाकात कैसे हो, वो दरवाजा दिन में भी कम खोलते हैं’। कवयित्री सुमन दुबे
ने पढ़ा-‘इस दुनिया के रंगमंच पर जीवन एक कहानी है,
सांसें बंद अगर हो जाएं तो रिश्ते सब बेमानी हैं..’।
शायर हसन काज़मी ने
गांव की खूबसूरती को कुछ यूं बयां किया-‘गांव लौटे शहर से तो सादगी अच्छी
लगी, हमको मिट्टी के दीये की रोशनी अच्छी लगी..’। ओज और व्यंग्य के कवि
शशांक प्रभाकर ने सांप्रदायिक नफरत को नई कविता के जरिए बयां किया तो
नेताओं पर तीखे कटाक्ष किए- ‘सदियों बाद इंसान आज नंगा हो गया है, दोस्तो
मेरे शहर में आज दंगा हो गया है...’।
इसके बाद उन्होंने व्यंग्य
किया-‘अच्छा करेगा काम तो जन्नत में जाएगा, बुरा करेगा तो अदालत में जाएगा,
झूठ बोलने का सलीका जिसको आ गया वो सियासत में जाएगा...’। हास्य-व्यंग्य
के कवि सर्वेश अस्थाना ने चुनाव के दृश्य के जरिए नेताओं पर तीखे कटाक्ष
किए।
समीर शुक्ला ने अवधी में
हास्य-व्यंग्य के जरिए खूब हंसाया। राजीव राय ने जिंदगी की हकीकत को बयां
किया-‘सबको सब कुछ मिल जाए अगर, खुदा को कौन याद करे...’। मंच का संचालन कर
रहे अनवर जलालपुरी ने इंसानी फितरत को बखूबी पेश करते हुए कहा-‘कौन सी
बस्ती में या रब तूने पैदा कर दिया, दुश्मनी पर सब हैं आमादा खफा कोई
नहीं..’।
जाने-माने गीतकार डॉ. सुरेश अपने गीतों के जरिए श्रोताओं को दर्शन
की गहराइयों तक ले गए-‘दिल के हाथों में छलकता जाम, ईंगुरी सुबह, शरबती
शाम, लड़खड़ाए जो बढ़के उनको थाम लिया, एक मधुशाला है जीवन, सांस रस की
धार...’।
उसके बाद इस कवि सम्मेलन और मुशायरे को मशहूर शायर राहत इंदौरी,
वसीम बरेलवी और फिर गीतकार एवं पद्मविभूषण गोपाल दास नीरज ने ऊंचाइयों पर
पहुंचाया। राहत इंदौरी ने हालत को प्रकृति दर्शन के जरिए पेश किया। प्रो.
वसीम बरेलवी ने समाज के हालात पर चोट की।
गोपाल दास नीरज की अध्यक्षता में
चल रहे सम्मेलन में देर रात तक श्रोता कविता और शायरी में डूबे रहे।
इससे
पहले आयोजन की शुरुआत में ग्राम्य विकास राज्य मंत्री अरविंद सिंह गोप ने
सभी कवियों का स्वागत किया। आयोजक रूपक अग्रवाल ने कवियों का आभार जताया।
मुशायरे में डॉ. नीरज बोरा, जूही सिंह सहित कई नेता, शहर के कई साहित्यकार
और जानी-मानी हस्तियां मौजूद थीं।