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कंधार हाईजैकिंग मामला: आतंकी अब्दुल लतीफ को फांसी नहीं
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 26 Feb 2014 01:30 AM IST
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1999 में हुए इंडियन एयरलाइंस विमान हाईजैकिंग मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सीबीआई के उस आग्रह को अस्वीकार कर दिया है, जिसके तहत सीबीआई ने मामले के दोषी अब्दुल लतीफ आदम मोमीन की उम्र कैद की सजा को फांसी में तब्दील करने का आग्रह किया था।
हाईकोर्ट की फुल बेंच ने मामले पर फैसला सुनाते हुए निचली अदालत के उन आदेशों को भी रद्द कर दिया, जिनके तहत अब्दुल लतीफ आदम मोमीन, दिलीप कुमार भुजवल और भूपल मान दामई उर्फ यूसुफ नेपाली को सेक्शन 302, 307, 363, 342, 467, 506, सेक्शन 120बी आईपीसी और एंटी हाईजैकिंग एक्ट, 1982 के तहत दोषी ठहराया गया था। मामले में अब्दुल लतीफ को भी कोई राहत नहीं मिल पाई है।
हाईकोर्ट ने लतीफ की उस अपील को भी रद कर दिया है, जिसके तहत उसने उम्र कैद की सजा में छूट देने का आग्रह किया था। वहीं, हाईकोर्ट ने आर्म्स एक्ट की सेक्शन 25 के तहत निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है।
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इस मामले में पटियाला की कोर्ट ने 5 फरवरी 2008 को तीनों का मामले का दोषी ठहराया था और उम्र कैद की सजा सुनाई थी। इस पर तीनों दोषियों ने निचली अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
वहीं, दूसरी तरफ से सीबीआई ने भी हाईकोर्ट में अपील दाखिल कर आग्रह किया कि अब्दुल लतीफ आदम मोमीन ने घोर अपराध किया है, लिहाजा उनकी उम्र कैद की सजा को फांसी में तब्दील कर दिया जाए।
सीबीआई ने अपनी अपील में कहा था कि यह मामला दुर्लभ से भी दुर्लभ है। इसके साथ ही सीबीआई ने 2001 में संसद भवन पर हमला करने वाले दोषी अफजल गुरू के मामले का भी हवाला दिया।
हाईकोर्ट ने इस मामले को दो संदर्भों में सुना। एक षड्यंत्र के तहत घटना को दिए गए अंजाम और दूसरा पहलु हाईजैकिंग की घटना की मोडस आपरेंडी, पैसेंजर रूपीन कात्याल की हत्या और अन्य यात्रियों को चोटें लगी थीं।
यह है घटनाक्रम
24 दिसंबर 1999 में आतंकियों ने काठमांडू से दिल्ली आ रही इंडियन एयरलाइंस की एक फ्लाइट को वाराणसी से हाईजैक कर लिया गया।
विमान में 179 यात्री सवार थे और एयरलाइंस के 11 क्रू सदस्य थे। विमान में इंधन कम होने के चलते पहले आतंकियों ने इसे अमृतसर में उतारा, उसके बाद वह इसे लाहौर ले गए।
लाहौर में विमान में इंधन डलवाया गया और इसके बाद आतंकी इसे अफगानिस्तान स्थित कंधार ले गए। यहां आतंकियों ने यात्रियों के एवज में भारत सरकार से आतंकी मौलाना मसूद अजहर, सईद ओमर शेख और मुस्ताक अहमद की रिहाई की मांग की।
साथ ही भारत सरकार से जुर्माने के रूप में 2 मिलियन अमेरिकी डॉलर चुकाने को भी कहा। इस घटना में दो महीने पहले विवाह बंधन में बंधे रूपीन कात्याल की हत्या कर दी गई।
आतंकियों ने यात्रियों के सामने ही उसके ऊपर चाकुओं से 27 हमले किए। इस मामले में 26 दिसंबर, 1999 में दिल्ली में जीरो एफआईआर दर्ज की गई। इसके बाद 29 दिसंबर, 1999 में अमृतसर में एफआईआर दर्ज की गई।
पंजाब पुलिस ने खुफिया विभाग की मदद से अब्दुल लतीफ आदम मोमीन और यूसुफ नेपाली को मुंबई से गिरफ्तार कर लिया। केंद्र सरकार ने 11 जनवरी 2000 को यह मामला सीबीआई के सुपुर्द कर दिया।
हाईजैकिंग के मुख्य आरोपी पकड़ से बाहर
विमान अपहरण मामले के मुख्य पांच आरोपी अभी तक पकड़े नहीं जा सके हैं। इनमें आतंकी संगठन हरकत उल मुजाहीद्दीन के आतंकी मौलाना मसूद अजहर का भाई इब्राहिम अथर अलवी, शहीद सईद अख्तर, सन्नी अहमद काजी, जहूर इब्राहिम मिस्त्री और फारूक अब्दुल अजीज सिद्दीकी भगौड़े घोषित किए जा चके हैं।
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हाईकोर्ट की फुल बेंच ने मामले पर फैसला सुनाते हुए निचली अदालत के उन आदेशों को भी रद्द कर दिया, जिनके तहत अब्दुल लतीफ आदम मोमीन, दिलीप कुमार भुजवल और भूपल मान दामई उर्फ यूसुफ नेपाली को सेक्शन 302, 307, 363, 342, 467, 506, सेक्शन 120बी आईपीसी और एंटी हाईजैकिंग एक्ट, 1982 के तहत दोषी ठहराया गया था। मामले में अब्दुल लतीफ को भी कोई राहत नहीं मिल पाई है।
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हाईकोर्ट ने लतीफ की उस अपील को भी रद कर दिया है, जिसके तहत उसने उम्र कैद की सजा में छूट देने का आग्रह किया था। वहीं, हाईकोर्ट ने आर्म्स एक्ट की सेक्शन 25 के तहत निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है।
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इस मामले में पटियाला की कोर्ट ने 5 फरवरी 2008 को तीनों का मामले का दोषी ठहराया था और उम्र कैद की सजा सुनाई थी। इस पर तीनों दोषियों ने निचली अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
वहीं, दूसरी तरफ से सीबीआई ने भी हाईकोर्ट में अपील दाखिल कर आग्रह किया कि अब्दुल लतीफ आदम मोमीन ने घोर अपराध किया है, लिहाजा उनकी उम्र कैद की सजा को फांसी में तब्दील कर दिया जाए।
सीबीआई ने अपनी अपील में कहा था कि यह मामला दुर्लभ से भी दुर्लभ है। इसके साथ ही सीबीआई ने 2001 में संसद भवन पर हमला करने वाले दोषी अफजल गुरू के मामले का भी हवाला दिया।
हाईकोर्ट ने इस मामले को दो संदर्भों में सुना। एक षड्यंत्र के तहत घटना को दिए गए अंजाम और दूसरा पहलु हाईजैकिंग की घटना की मोडस आपरेंडी, पैसेंजर रूपीन कात्याल की हत्या और अन्य यात्रियों को चोटें लगी थीं।
यह है घटनाक्रम
24 दिसंबर 1999 में आतंकियों ने काठमांडू से दिल्ली आ रही इंडियन एयरलाइंस की एक फ्लाइट को वाराणसी से हाईजैक कर लिया गया।
विमान में 179 यात्री सवार थे और एयरलाइंस के 11 क्रू सदस्य थे। विमान में इंधन कम होने के चलते पहले आतंकियों ने इसे अमृतसर में उतारा, उसके बाद वह इसे लाहौर ले गए।
लाहौर में विमान में इंधन डलवाया गया और इसके बाद आतंकी इसे अफगानिस्तान स्थित कंधार ले गए। यहां आतंकियों ने यात्रियों के एवज में भारत सरकार से आतंकी मौलाना मसूद अजहर, सईद ओमर शेख और मुस्ताक अहमद की रिहाई की मांग की।
साथ ही भारत सरकार से जुर्माने के रूप में 2 मिलियन अमेरिकी डॉलर चुकाने को भी कहा। इस घटना में दो महीने पहले विवाह बंधन में बंधे रूपीन कात्याल की हत्या कर दी गई।
आतंकियों ने यात्रियों के सामने ही उसके ऊपर चाकुओं से 27 हमले किए। इस मामले में 26 दिसंबर, 1999 में दिल्ली में जीरो एफआईआर दर्ज की गई। इसके बाद 29 दिसंबर, 1999 में अमृतसर में एफआईआर दर्ज की गई।
पंजाब पुलिस ने खुफिया विभाग की मदद से अब्दुल लतीफ आदम मोमीन और यूसुफ नेपाली को मुंबई से गिरफ्तार कर लिया। केंद्र सरकार ने 11 जनवरी 2000 को यह मामला सीबीआई के सुपुर्द कर दिया।
हाईजैकिंग के मुख्य आरोपी पकड़ से बाहर
विमान अपहरण मामले के मुख्य पांच आरोपी अभी तक पकड़े नहीं जा सके हैं। इनमें आतंकी संगठन हरकत उल मुजाहीद्दीन के आतंकी मौलाना मसूद अजहर का भाई इब्राहिम अथर अलवी, शहीद सईद अख्तर, सन्नी अहमद काजी, जहूर इब्राहिम मिस्त्री और फारूक अब्दुल अजीज सिद्दीकी भगौड़े घोषित किए जा चके हैं।