आरक्षण आपका हक, थप्पड़ मारकर छीन लो अपना अधिकार : कल्याण सिंह
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राजस्थान के गवर्नर और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने कहा कि अपने अधिकार कभी भी भीख मांगने से नहीं मिलते। इसके लिए ‘थप्पड़ मारो और छीनो’ जैसा संघर्ष करना पड़ता है। उन्होंने आरक्षित वर्गों से संगठित होने का आह्वान करते हुए कहा कि उच्च पदों पर आरक्षित वर्ग के अफसरों का न होना भी अन्याय है। हमें इसके खिलाफ भी आवाज उठानी होगी।
कल्याण सिंह लोकबंधु ‘वंचित वर्ग महासंघ’ की ओर से रविंद्रालय में पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह की स्मृति में आयोजित पिछड़ा वर्ग सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि जिस तरह से डॉ. भीमराव आंबेडकर ने एससी-एसटी को हक दिलाया, उसी तरह से वीपी सिंह ने पिछड़े वर्ग के लिए काम किया। दोनों वंचितों के लिए मसीहा से कम नहीं थे। राजस्थान के राज्यपाल ने कहा, संवैधानिक पद पर होने के कारण मैं कोई दलगत राजनीति की बात नहीं करूंगा, पर इसमें से आप राजनीतिक संकेत निकाल सकें तो निकाल लेना।
कोई मूर्ख ही आरक्षण खत्म करने की सोचेगा
उन्होंने कहा कि आज तमाम तरह की भ्रांतिया पैदा करने की कोशिश हो रही है कि आरक्षण खत्म कर दिया जाएगा। आरक्षित वर्ग की इस देश में इतनी ज्यादा ताकत है कि शायद ही कोई मूर्ख होगा जो इतनी बड़ी गलती करेगा। इसलिए एकदम बेफिक्र रहिए आरक्षण के प्रावधान को कोई छू भी नहीं पाएगा। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, फिर भी कभी ऐसा दुर्भाग्य का पल आए तो हो सकता है कि उस वक्त मैं जिंदा न होऊं। लेकिन, आप सब एक मुट्ठी बांधकर इसके खिलाफ खड़े हो जाना, क्योंकि यह आरक्षित वर्ग के जीवन-मरण का प्रश्न होगा।
पाप का प्रायश्चित है आरक्षण
उन्होंने कहा कि सदियों से दलितों और पिछड़ों को सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक रूप से वंचित रखा गया है, आरक्षण उसी पाप का प्रायश्चित है। गरीब सवर्णों को आरक्षण देने में कोई एतराज नहीं होना चाहिए, पर हमारा हिस्सा बिल्कुल भी नहीं कटना चाहिए।
कल्याण सिंह ने कहा, एक बात सदैव याद रखना कि जो समाज राजनीति में पिछड़ जाता है, उसकी दो कौड़ी की इज्जत रह जाती है। इसलिए हर स्तर के चुनाव में टिकट मांगो। अगर टिकट न मिले तो एकसाथ बैठकर फैसला लो कि एक तरफ ही जाएंगे। फिर देखना हर राजनीतिक दल के नेता आपकी चौखट पर माथा टेकने आएंगे।
आरक्षित वर्ग के अफसरों की कम तैनाती के खिलाफ उठाओ आवाज
कल्याण ने कहा कि आप लोगों के बीच पुन: चेतना जगाना चाहता हूं कि ‘कोऊ नृप होऊ, हमहि का हानी’ वाला भाव छोड़ दो। रामराज्य में यह बात ठीक हो सकती है, पर आज नहीं। शिक्षा, संगठन और संघर्ष से ही वंचितों की तकदीर बदल सकती है। अपने अंदर यह भाव पैदा करो कि जिससे खुश हो, उस पर सबकुछ लुटा दो। जिससे नाराज हो, उसका बंटाधार कर दो।
कल्याण सिंह ने कहा कि उच्च पदों पर एससी-एसटी और ओबीसी अधिकारियों की संख्या बेहद कम है। इस तरफ सरकारों को भी ध्यान देने की जरूरत है। पूछो कि हमारे वर्ग के डीएम और यहां तक कि दरोगा भी कितने हैं। इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने के लिए भी तैयार रहो।