{"_id":"6a00f000a8a033b457055e4d","slug":"kaifi-azmi-gave-a-new-identity-to-urdu-poetry-and-modern-cinema-surya-mohan-kulshrestha-lucknow-news-c-13-lko1096-1730654-2026-05-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"कैफी आजमी ने उर्दू कविता व आधुनिक सिनेमा को दी नई पहचान: सूर्य मोहन कुलश्रेष्ठ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कैफी आजमी ने उर्दू कविता व आधुनिक सिनेमा को दी नई पहचान: सूर्य मोहन कुलश्रेष्ठ
विज्ञापन
लखनऊ। अजीम शायर व साहित्यकार कैफी आजमी की 24वीं पुण्यतिथि पर रविवार को पेपरमिल काॅलोनी स्थित ऑल इंडिया कैफी आजमी अकादमी में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस माैके पर वक्ताओं ने कैफी आजमी की साहित्यिक विरासत पर और फिल्म ''''हीर रांझा'''' के संवादों के पर चर्चा की।
कार्यक्रम में प्रख्यात रंगकर्मी सूर्य मोहन कुलश्रेष्ठ ने कहा कि कैफी आजमी ने उर्दू कविता, लोक परंपरा और आधुनिक सिनेमा को नई पहचान दी। हीर रांझा फिल्म के संवाद यथार्थवादी अभिनय के लिए बेहद प्रभावशाली थे। वहीं प्रो. नलिन रंजन ने इसके संवादों में रोमांटिक पुट और लोकधर्मी नाटकीयता की झलक बताई। कानपुर से आए प्रो. खान अहमद फारूक ने कहा कि ''''हीर रांझा'''' उर्दू कविता और पंजाबी लोक संस्कृति का अनूठा संगम है।
कार्यक्रम में कैफी आजमी की पुस्तक ''''नई गुलिस्तां'''' पर भी चर्चा हुई। इसके बाद अशफाक उल्ला खां की दास्तान पर आधारित दास्तांगोई प्रस्तुति ने दर्शकों का मन मोह लिया। कार्यक्रम का संचालन प्रो. रेशमा परवीन ने किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
कार्यक्रम में प्रख्यात रंगकर्मी सूर्य मोहन कुलश्रेष्ठ ने कहा कि कैफी आजमी ने उर्दू कविता, लोक परंपरा और आधुनिक सिनेमा को नई पहचान दी। हीर रांझा फिल्म के संवाद यथार्थवादी अभिनय के लिए बेहद प्रभावशाली थे। वहीं प्रो. नलिन रंजन ने इसके संवादों में रोमांटिक पुट और लोकधर्मी नाटकीयता की झलक बताई। कानपुर से आए प्रो. खान अहमद फारूक ने कहा कि ''''हीर रांझा'''' उर्दू कविता और पंजाबी लोक संस्कृति का अनूठा संगम है।
विज्ञापन
कार्यक्रम में कैफी आजमी की पुस्तक ''''नई गुलिस्तां'''' पर भी चर्चा हुई। इसके बाद अशफाक उल्ला खां की दास्तान पर आधारित दास्तांगोई प्रस्तुति ने दर्शकों का मन मोह लिया। कार्यक्रम का संचालन प्रो. रेशमा परवीन ने किया।
विज्ञापन