बड़ी खबर: 74 जानें लेकर हड़ताल खत्म
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यूपी में पिछले करीब छह दिनों से चल रही जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल आखिरकार वापस हो गई है। इसकी आधिकारिक घोषण अब से कुछ देर पहले ही कानपुर में की गई है।
हालांकि, डॉक्टर्स ने कहा है कि जब तक उनकी मांगें पूरी तरह से नहीं मान ली जातीं, वे काम करते हुए भूख हड़ताल पर रहेंगे।
दिलचस्प बात यह है कि यूपी सरकार ने बुधवार देर रात दो बजे दावा किया था कि हड़ताल खत्म हो गई, लेकिन गुरुवार सुबह भी हड़ताल जारी थी।
विभिन्न स्रोत से मिली जानकारी के मुताबिक, जूनियर डॉक्टरों की इस हड़ताल से यूपी में कम से कम 74 लोगों की मौत हो गई।
कोर्ट ने दिया अपने में अनोखा आदेश
हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते एक बेहद अनूठा आदेश दिया है।
इस मामले पर सुनवाई के दौरान गुरुवार को हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि पुलिसकर्मियों के वेतन से ही चोटिल छात्रों को मुआवजा दिया जाए।
साथ ही बेंच ने डीजीपी से सभी मामलों पर खुद नजर रखने को कहा है। बेंच ने यह भी कहा है इस मामले में पुलिस कार्रवाई की भी निष्पक्ष जांच हो।
बुधवार को भी बेंच ने हड़ताली जूनियर डॉक्टरों से अपील की थी कि वे हड़ताल वापस ले लें, लेकिन उसका असर आज देखने को मिला है।
मुलायम ने दिया बेतुका बयान
सपा सुप्रीमो ने यूपी में चल रही जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल पर बेतुका बयान दे डाला है। उन्होंने एक पत्रकार के सवाल के जवाब में उल्टा पूछ डाला कि तुम्हारे परिवार से कौन मरा है?
मुलायम ने पहले तो कहा कि कौन मर रहा है? फिर बोले, डॉक्टरों की हड़ताल को क्यों इतना महत्व दिया जा रहा है। फिर उन्होंने यहां तक कह डाला कि अगर आप लोग सही छापें, तो मौतें कम हो जाएंगी।
उधर, कानपुर में जूनियर डॉक्टरों ने काम पर लौटने का एलान कर दिया है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वे काम पर जरूर लौट रहे हैं लेकिन भूख हड़ताल पर रहेंगे।
मुलायम ने किया था वादा, मांग होगी पूरी
बुधवार रात दो बजे खबर आई कि 69 मरीजों की मौत के बाद आखिरकार जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल खत्म कर दी।
लखनऊ से वार्ता कर देर रात कानपुर पहुंचे आईएमए एक्शन कमेटी के चेयरमैन डॉ. देवेंद्र लाल चंदानी ने मेडिकल कालेज एलटी-थ्री में आयोजित जनरल बाडी की मीटिंग में बताया कि सपा सुप्रीमों मुलायम सिंह ने मुलाकात में मांगें मानने की बात कही।
यह भी कहा कि वे छात्रों के भविष्य के बारे में चिंतित हैं। इससे पहले सरकार ने हड़ताली डाक्टरों पर एस्मा लगा दिया था और हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने भी सख्ती दिखाते हुए डॉक्टरों को काम पर लौटने का निर्देश दिया है।
डॉक्टरों का कहना था कि वे सपा विधायक इरफान सोलंकी के खिलाफ कार्रवाई और एसएसपी कानपुर यशस्वी यादव के निलंबन होने पर ही हड़ताल वापस लेंगे। हालांकि, कानपुर और लखनऊ में अब भी हड़ताल खत्म नहीं हुई।
कानपुर के एसएसपी को मिली सजा
पुलिस की कार्रवाई से क्षुब्ध डॉक्टरों की हड़ताल के मद्देनजर हाईकोर्ट के कानपुर के एसएसपी यशस्वी यादव को सजा मिल गई है।
सपा सरकार के मुताबिक, यशस्वी यादव को अब डीजीपी ऑफिस से अटैच कर दिया गया है। इसके अलावा, मामले से संबंधित अन्य अफसरों के हटाए जाने के आदेश के अनुपालन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
राज्य सरकार के प्रवक्ता के मुताबिक नए अधिकारी का नाम चुनाव आयोग की सहमति मिलने के बाद गुरुवार को तय हो जाएगा।
हालांकि, इतना सब होने के बावजूद सपा सरकार ने अपने विधायक पर कोई भी कार्रवाई अब तक नहीं की है।
छह महीने तक हड़ताल होगी अवैध
बुधवार को प्रदेश के सभी चिकित्सा संस्थानों और मेडिकल कॉलेजों एस्मा (अत्यावश्यक सेवाओं का अनुरक्षण अधिनियम) लागू कर दिया गया था।
इसी के साथ छह माह तक हड़ताल को अवैध घोषित कर दिया गया। उधर साथियों पर कानपुर में हुए हमले के मामले में न्याय मांग रहे जूनियर डॉक्टरों ने काम पर वापस आने की हाईकोर्ट की अपील भी ठुकरा दी थी।
इस बीच हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने हड़ताल पर स्वत: संज्ञान लेते हुए जूनियर डॉक्टरों से तत्काल हड़ताल खत्म कर काम पर लौटने कहा था।
पढ़िए, क्यों शुरू हुई थी हड़ताल
कानपुर में शुक्रवार 28 फरवरी को सपा विधायक इरफान सोलंकी व जूनियर डॉक्टरों के बीच मारपीट की घटना हुई थी।
इस घटना के बाद पुलिस ने जूनियर डॉक्टरों की जमकर पिटाई की थी। 24 जूनियर डॉक्टरों के खिलाफ केस दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था।
पुलिस की इस कार्रवाई से गुस्साए प्रदेश के कई मेडिकल कॉलेजों के जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर चले गए हैं।