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मायावती दलित नहीं दौलत की बेटी!

Mon, 05 Jan 2015 08:23 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 05 Jan 2015 08:23 AM IST
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jugal kishore counter attacks mayawati.

बसपा में सभी तरह की जिम्मेदारियों से हटाए जाते ही राज्यसभा सांसद जुगुल किशोर ने पार्टी सुप्रीमो मायावती के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। कभी मायावती के बेहद भरोसेमंद लोगों में शुमार रहे जुगुल किशोर ने रविवार को कहा है कि दलित की नहीं, दौलत की बेटी हो गई हैं। पार्टी में कोई काम बिना पैसे के नहीं होता। चुनावों में टिकट भी जेब ढीली करने पर ही मिलता है। जैसा उम्मीदवार वैसी कीमत।

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विधानसभा चुनाव के लिए 50 लाख रुपये से दो करोड़ रुपये तक लिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि मैंने वसूली का विरोध किया तो मुझे पार्टी की जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया।
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मायावती के स्वजातीय जुगुल किशोर की अहमियत इसी से समझी जा सकती है कि वे बिहार व दिल्ली के प्रभारी थे। इससे पहले वे गोरखपुर, फैजाबाद, देवीपाटन और बस्ती मंडल के चीफ कोआर्डिनेटर भी थे। हालांकि लोकसभा चुनाव से ऐन पहले यह जिम्मेदारी छीन ली गई थी।
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बसपा में टिकट का रेट तय

पार्टी में साइडलाइन किए जाने से खफा जुगुल किशोर ने कहा कि बसपा जिस मिशन व विचारों से जुड़ी थी, मायावती आज उसे बेच रही हैं। पार्टी में हर काम पैसा लेकर किया जा रहा है। राजनीति से जुड़े हर काम का दाम तय हो गया है। एमएलए व पूर्व प्रत्याशियों ने मुझसे शिकायत की कि टिकट के लिए पैसा मांगा जा रहा है।

जुगुल किशोर का दावा

jugal kishore counter attacks mayawati.

जुगुल किशोर ने दावा किया विधानसभा टिकट के लिए दलित उम्मीदवार से 50 लाख रुपये लिए जाते हैं, जबकि पिछड़े या सामान्य वर्ग के उम्मीदवार से 1-2 करोड़ रुपये लिए जाते हैं।

फिर सवाल किया: आखिर दलित 50 लाख रुपये कहां से लाए? मैंने मायावती से मिलकर इसका विरोध किया तो मुझे हटा दिया। अब समर्थकों से बातचीत कर आगे की योजना बनाएंगे।

लोकसभा चुनाव हारने के बाद बसपा तय नहीं कर पा रही दिशा
फिर दलित बनाम ब्राह्मण का द्वंद्व
- 2007 के विधानसभा चुनाव में ब्राह्मणों के समर्थन से बसपा स्पष्ट बहुमत से सत्ता में आई थी।

- 2012 के चुनाव में ब्राह्मणों का उम्मीद के हिसाब से समर्थन नहीं मिला, लेकिन लोकसभा चुनाव में 20 से ज्यादा ब्राह्मणों को टिकट दिए। सभी हारे।

- 2014 में प्रदेश में राज्यसभा के चुनाव हुए तो पार्टी ने अपने बल पर जीतने वाली दोनों सीटों पर सिर्फ दलित प्रत्याशी उतारे।

- एमएलसी चुनाव में तीन प्रत्याशी उतारे। एक मुस्लिम, दो दलित। एक भी टिकट ब्राह्मण या पिछड़े को नहीं दिया।
- मदनमोहन मालवीय व अटलबिहारी वाजपेयी को भारतरत्न का विरोध कि सर्वोच्च सम्मान ब्राह्मण को ही क्यों?

नहीं संभल पा रहे पूर्व सांसद
लोकसभा चुनाव के बाद एक दर्जन नेताओं पर गिर चुकी है गाज। ये पूर्व सांसद भी हो चुके हैं बाहर:
- दारा सिंह चौहान, पूर्व सांसद लोकसभा
- अखिलेश दास, पूर्व सांसद राज्यसभा
- कादिर राणा, पूर्व सांसद, मुजफ्फरनगर
- शाहिद एखलाक, पूर्व सांसद व मेयर
- पूर्व सांसद रमाशंकर विद्यार्थी मऊ

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