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कोरोना के शुरुआती दौर से बंद जेपी म्यूजियम में अब बजट की कमी का ताला
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लखनऊ। कोरोना के शुरुआती दौर से बंद जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (जेपीएनआईसी) का जेपी म्यूजियम अब भी नहीं खुला है। इसे बंद रखने का कारण कोविड प्रोटोकॉल बताया जा रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि इसके रखरखाव व संचालन के लिए एलडीए के पास बजट ही नहीं है। इसलिए अब इसे तभी शुरू किया जाएगा जब बजट का इंतजाम हो जाएगा।
समाजवादी चिंतक जयप्रकाश नारायण की स्मृतियों व आपातकाल के खिलाफ लड़ाई में उनके योगदान को समर्पित जेपी म्यूजियम जेपीएनआईसी परिसर में बना है। अंबेडकर पार्क के सामने की तरफ से इसका मुख्य प्रवेश द्वार है। वर्ष 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इसका उद्घाटन किया था। आधुनिक तकनीक का उपयोग कर बने इस भव्य म्यूजियम की बदहाली भी जेपीएनआईसी के साथ ही शुरू हो गई। प्रदर्शकों में टूट-फूट और बारिश के समय पानी के रिसाव ने इसकी दशा बिगाड़ दी। ऑडियो गाइड के खराब होेने से शुरू बदहाली अब यहां कई प्रदर्शकों के बंद होने तक पहुंच गई है। म्यूजियम की झील में झाड़ियां उग आई हैं। यहां शाम को होने वाला लेजर ऑडियो-वीडियो शो भी करीब डेढ़ साल से बंद है।
अब तो ताले भी नहीं खुलते
जेपी म्यूजियम के गेट पर मौजूद एक कर्मचारी ने बताया कि महीनों से कोई यहां नहीं आया है। अधिकारियों ने मुख्य गेट ही अब बंद करा दिया है। म्यूजियम भी पूरी तरह बंद है। कई दिनों तक तो म्यूजियम के ताले तक नहीं खुलते हैं। दर्शकों के आने पर यही बताने के लिए कहा गया है कि कोरोना की वजह से बंद रखा गया है।
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1.33 करोड़ रुपये सालाना चाहिए
जेपीएनआईसी के प्रभारी अभियंता आनंद मिश्र का कहना है कि जेपी म्यूजियम का संचालन पिछले साल तक किया गया। इसके संचालन और सामान्य रखरखाव पर करीब 1.33 करोड़ रुपये का खर्च आता है। शासन से यह बजट नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में म्यूजियम का संचालन कैसे हो? यह तय नहीं हो पा रहा है। जो एजेंसी म्यूजियम का संचालन कर रही थी, वह भी काम छोड़ गई है। अब नई एजेंसी का चुनाव भी एलडीए को करना होगा।
1.69 करोड़ रुपये का सिग्नेचर ट्री अब लावारिस
जेपीएनआईसी को खास लुक देने के लिए आर्किटेक्ट सलाहकार आर्कओम ने एक सिग्नेचर ट्री लगाने का प्रस्ताव दिया। इसके बाद आयात कर 1.69 करोड़ रुपये का सिग्नेचर ट्री खरीदा गया। यह सिग्नेचर ट्री उपयोग में कभी नहीं आ सका। अब जेपीएनआईसी की मुख्य बिल्डिंग के सामने बन चुके जंगल के अंदर यह लावारिस खड़ा है। सिग्नेचर ट्री की खासियत यह है कि इसे फाइबर मैटेरियल से तैयार किया गया है। वहीं इसकी चौड़ी व बड़ी पत्तियां असल में सोलर पैनल हैं जोकि बिजली की जरूरत पूरी करती हैं। शाम के बाद यह सिग्नेचर ट्री अपनी ही रोशनी से रौशन होता है। पूर्व आवास राज्यमंत्री सुरेश पासी ने अपनी जांच में इस सिग्नेचर ट्री पर भी सवाल उठाया था। इसे उन्होंने बजट की बर्बादी में रखते हुए मुख्यमंत्री को अपनी रिपोर्ट भी दी थी।
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समाजवादी चिंतक जयप्रकाश नारायण की स्मृतियों व आपातकाल के खिलाफ लड़ाई में उनके योगदान को समर्पित जेपी म्यूजियम जेपीएनआईसी परिसर में बना है। अंबेडकर पार्क के सामने की तरफ से इसका मुख्य प्रवेश द्वार है। वर्ष 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इसका उद्घाटन किया था। आधुनिक तकनीक का उपयोग कर बने इस भव्य म्यूजियम की बदहाली भी जेपीएनआईसी के साथ ही शुरू हो गई। प्रदर्शकों में टूट-फूट और बारिश के समय पानी के रिसाव ने इसकी दशा बिगाड़ दी। ऑडियो गाइड के खराब होेने से शुरू बदहाली अब यहां कई प्रदर्शकों के बंद होने तक पहुंच गई है। म्यूजियम की झील में झाड़ियां उग आई हैं। यहां शाम को होने वाला लेजर ऑडियो-वीडियो शो भी करीब डेढ़ साल से बंद है।
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अब तो ताले भी नहीं खुलते
जेपी म्यूजियम के गेट पर मौजूद एक कर्मचारी ने बताया कि महीनों से कोई यहां नहीं आया है। अधिकारियों ने मुख्य गेट ही अब बंद करा दिया है। म्यूजियम भी पूरी तरह बंद है। कई दिनों तक तो म्यूजियम के ताले तक नहीं खुलते हैं। दर्शकों के आने पर यही बताने के लिए कहा गया है कि कोरोना की वजह से बंद रखा गया है।
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1.33 करोड़ रुपये सालाना चाहिए
जेपीएनआईसी के प्रभारी अभियंता आनंद मिश्र का कहना है कि जेपी म्यूजियम का संचालन पिछले साल तक किया गया। इसके संचालन और सामान्य रखरखाव पर करीब 1.33 करोड़ रुपये का खर्च आता है। शासन से यह बजट नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में म्यूजियम का संचालन कैसे हो? यह तय नहीं हो पा रहा है। जो एजेंसी म्यूजियम का संचालन कर रही थी, वह भी काम छोड़ गई है। अब नई एजेंसी का चुनाव भी एलडीए को करना होगा।
1.69 करोड़ रुपये का सिग्नेचर ट्री अब लावारिस
जेपीएनआईसी को खास लुक देने के लिए आर्किटेक्ट सलाहकार आर्कओम ने एक सिग्नेचर ट्री लगाने का प्रस्ताव दिया। इसके बाद आयात कर 1.69 करोड़ रुपये का सिग्नेचर ट्री खरीदा गया। यह सिग्नेचर ट्री उपयोग में कभी नहीं आ सका। अब जेपीएनआईसी की मुख्य बिल्डिंग के सामने बन चुके जंगल के अंदर यह लावारिस खड़ा है। सिग्नेचर ट्री की खासियत यह है कि इसे फाइबर मैटेरियल से तैयार किया गया है। वहीं इसकी चौड़ी व बड़ी पत्तियां असल में सोलर पैनल हैं जोकि बिजली की जरूरत पूरी करती हैं। शाम के बाद यह सिग्नेचर ट्री अपनी ही रोशनी से रौशन होता है। पूर्व आवास राज्यमंत्री सुरेश पासी ने अपनी जांच में इस सिग्नेचर ट्री पर भी सवाल उठाया था। इसे उन्होंने बजट की बर्बादी में रखते हुए मुख्यमंत्री को अपनी रिपोर्ट भी दी थी।