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श्रीराम जन्मभूमि झूलनोत्सव: रजत हिंडोले पर आज चारों भाइयों सहित विराजेंगे रामलला, 20 फीट दूर से होंगे दर्शन

Fri, 09 Aug 2024 07:12 AM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला संवाद, अयोध्या
अमर उजाला संवाद, अयोध्या Published by: रोहित मिश्र Updated Fri, 09 Aug 2024 07:12 AM IST
सार

Jhoolnotsav in Shri Ram Janmabhoomi:अयोध्या की श्रीराम जन्मभूमि में झूलनोत्सव की शुरुआत आज से हो रही है। नाग पंचमी पर इसका विशेष आयोजन होगा। रामलला अपने भाइयों के साथ रजत हिंडोले में विराजित होंगे।
 

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Jhoolnotsav in Shri Ram Janmabhoomi: Today Ramlala along with his brothers will sit on the silver carousel, wi
अयोध्या राम मंदिर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 रामनगरी के सैकड़ों मंदिरों में झूलनोत्सव की छटा बिखरने लगी है, लेकिन रामलला के दरबार में झूलनोत्सव की परंपरा अन्य मंदिरो से अलग है। राम मंदिर में शुक्रवार यानी नाग पंचमी से झूलनोत्सव का आनंद छलकेगा। रामलला सहित चारों भाई रजत हिंडाेले पर विराजमान होकर एक पखवाड़े तक भक्तों को दर्शन देंगे। बृहस्पतिवार की शाम गर्भगृह के सम्मुख गुढ़ी मंडप में झूले को सजा दिया गया है। शुक्रवार की सुबह रामलला को झूले पर विराजमान करा दिया जाएगा। 20 फीट दूर से रामलला भक्तों को दर्शन देंगे।

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रामनगरी का ऐतिहासिक सावन झूला मेला शुरू हो चुका है। अयोध्या के मंदिरों में झूलनोत्सव की अलग-अलग परंपरा है। यहां अधिकांश मंदिरों में जहां सावन शुक्ल तृतीया से मंदिरों में झूलनोत्सव का श्रीगणेश हो चुका है तो कुछ मंदिरों में पंचमी तिथि व कुछ में एकादशी से झूलनोत्सव का शुभारंभ होगा। पंचमी तिथि से जिन प्रमुख मंदिरों में झूलनोत्सव की छटा बिखरेगी उनमें रामलला सहित आचारी मंदिर प्रमुख हैं। राम मंदिर के पुजारी प्रेम चंद्र त्रिपाठी ने बताया कि झूले पर रामलला की उत्सव मूर्ति को विराजित किया जाएगा। इसके अलावा भरत, लक्ष्मण, शत्रुहन व हनुमान जी की मूर्ति को भी झूले पर विराजित किया जाएगा। रक्षाबंधन तक रामलला भाईयों सहित भक्तों को झूले पर विराजमान होकर दर्शन होंगे। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद यह पहला झूलनोत्सव है इसलिए विभिन्न धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई है।
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ट्रस्ट ने 2021 में कराया था झूले का निर्माण
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्र ने बताया कि राम मंदिर में विराजमान रामलला के दरबार में शुक्रवार से सावनी संस्कृति की धूम शुरू हो जाएगी। 21 किलो के रजत हिंडोले में रामलला विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे। इस झूले का निर्माण 2021 में कराया गया था। इससे पहले रामलला लकड़ी के झूले पर झूला झूलते थे। बताया कि रोजाना शाम 6 से 7 बजे तक सांस्कृतिक संध्या भी सजेगी, विशेष भोग अर्पित किया जाएगा।
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आचारी मंदिर में आठ सौ वर्ष पुरानी परंपरा
दंतधावनकुंड पीठ आचारी मंदिर में भी पंचमी तिथि (शुक्रवार) से झूलनोत्सव का उल्लास छलकने लगेगा। मंदिर के महंत विवेक आचारी ने बताया कि यहां झूलनोत्सव की परंपरा करीब आठ सौ वर्ष पुरानी है। मंदिर के संस्थापक विष्णु प्रकाशाचार्य ने झूलनोत्सव की जो परंपरा शुरू की थी वह निरंतर समृद्ध होती गई। बताया कि पंचमी से राम, लक्ष्मण व माता जानकी के विग्रह को झूले पर विराजित कर उत्सव का शुभारंभ किया जाएगा। हर रोज कत्थक, कजरी गीतों की प्रस्तुति भव्यता बढ़ाएगी।


 

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