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जयंत के ट्वीट पर सियासत: ‘खिचड़ी, पुलाव-बिरयानी...जो पसंद है खाओ’, चारु ने कहा- वह चवन्नी नहीं हैं जो पलट जाएं
Fri, 07 Jul 2023 09:49 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Fri, 07 Jul 2023 09:49 PM IST
सार
जयंत कई बार यह कह चुके हैं उनका गठबंधन सपा के साथ मजबूत है। यहां तक कि उतनी उनकी पत्नी चारु ने भी यह कहा कि वह चवन्नी नहीं हैं जो पलट जाएं। लेकिन बीती रात जयंत ने एक के बाद एक दो ट्वीट करके फिर एक नई बहस को जन्म दे दिया।
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जयंत चौधरी और पत्नी चारु चौधरी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सियासी गलियारों में रालोद प्रमुख जयंत चौधरी को लेकर एक बार फिर से चर्चाओं का बाजार गरम हो गया है। उन्होंने ट्वीट किया ‘खिचड़ी, पुलाव, बिरयानी..जो पसंद है खाओ!’ अपने दूसरे ट्वीट में जयंत ने लिखा, ‘वैसे चावल खाने ही हैं तो खीर खाओ!’ इससे एक बार फिर ये यह बहस शुरू हो गई है कि वह अपने सियासी पतीले में क्या पका रहे हैं...बिरयानी या खीर।
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लोकसभा चुनाव 2024 से पहले राजनीतिक दलों को लेकर तमाम तरह की चर्चाएं इस समय चरम पर हैं। सबसे ज्यादा चर्चा में इस समय राष्ट्रीय लोकदल है। इसके लेकर तमाम अफवाहें, अंदेशे चल रहे हैं। चर्चा है कि रालोद प्रमुख जयंत चौधरी लोकसभा चुनाव में भाजपा के पाले में खड़े हो सकते हैं। हालांकि जयंत कई बार यह कह चुके हैं कि उनका सपा के साथ गठबंधन है और पूरी तरह से मजबूत है। यहां तक कि उनकी पत्नी चारु ने भी यह कहा कि वह चवन्नी नहीं है जो पलट जाएं। बावजूद इसके चर्चाएं कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अब जयंत ने खुद ही इस तरह की चर्चाओं को और हवा दी है।
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जयंत ने एक के बाद एक दो ट्वीट करके फिर एक नई बहस छेड़ दी। उनके ‘खिचड़ी, पुलाव, बिरयानी या खीर को लोग अपने-अपने ढंग से परिभाषित कर रहे हैं। खीर को लोग सत्ता से जोड़ रहे हैं तो बिरयानी, खिचड़ी को विपक्ष से। सवाल फिर उठा कि क्या वह भाजपा के साथ जा रहे हैं या अपने गठबंधन को मजबूत करने का इशारा कर रहे हैं। कहीं वह भी तो खीर खाने के लिए लालायित होने का इशारा तो नहीं कर रहे हैं। हालांकि इस बारे में रालोद प्रदेश मीडिया संयोजक सुनील रोहटा कहते हैं कि यह कोरी अफवाह है। विपरीत परिस्थितियों में भी 2014, 2019 के लोकसभा चुनाव और 2017 एवं 2022 का विधानसभा चुनाव में समान विचारधाराओं के मानने वाले दलों के साथ मिलकर ही रालोद ने गठबंधन में चुनाव लड़ा। 17 जुलाई को बंगलुरू में होने जा रही विपक्ष की बैठक में भी जयंत शामिल होंगे। पिछली बैठक में वह देश के बाहर होने के कारण नहीं जा पाए थे।
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