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जाट वोटों के मामले में आर-पार के लिए मैदान में उतरी सपा
अखिलेश वाजपेई/लखनऊ
Updated Thu, 07 Nov 2013 01:05 AM IST
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समाजवादी पार्टी ने शायद मान लिया है कि सूबे की आबादी में 4 से 5 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले जाटों का वोट उसे नहीं मिलने वाला।
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इसीलिए अब वह इस मुद्दे पर आर-पार के लिए मैदान में उतर आई है।
प्रदेश सरकार में स्वतंत्र प्रभार के राज्यमंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति ने बुधवार को यहां पत्रकारों को बुलाकर जाटों के आरक्षण पर जिस तरह विरोध बुलंद किया, उससे कुछ ऐसे ही संकेत मिलते हैं।
प्रजापति को आगे करके सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने जाटों के बेरुखी से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए अति पिछड़ों को लामबंद करने की कोशिश शुरू कर दी है।
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राजनीतिक समीक्षकों का मानना है कि मुजफ्फरनगर कांड के अब तक जो निष्कर्ष सामने आए हैं और प्रदेश सरकार की भूमिका पर जिस तरह अंगुलियां उठी हैं।
उससे मुलायम पूरी तरह समझ चुके हैं कि वह कितनी भी कोशिश कर लें, पश्चिम का जाट उनके साथ नहीं रहने वाला।
इसीलिए उन्होंने रणनीतिक दांव चलते हुए प्रजापति के जरिए सूबे में पिछड़ों व अति पिछड़ों को सपा के साथ लामबंद करने की कोशिश शुरू कर दी है।
निकट भविष्य में मुलायम पिछड़ों व अति पिछड़ों के बीच यह भाव भरने की कोशिश करेंगे कि जाटों के कारण पिछड़ों के आरक्षण का हक मारा जा रहा है।
यह है वजह
दरअसल, भाजपा शासन में जब जाटों को आरक्षण देने की पहल शुरू हुई तब यादवों व कई अन्य जातियों की तरफ से इस पर आपत्ति उठाई गई थी।
लोगों ने तर्क दिया था कि जाट आम तौर पर संपन्न तबका माना जाता है। इन्हें आरक्षण देने से दूसरी जातियों का कोटा घटेगा जिनमें तमाम पिछड़ी व अति पिछड़ी जातियां शामिल हैं।
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जो वास्तव में काफी गरीब हैं। आज यह साफ हो गया कि लोकसभा चुनाव की दहलीज पर खड़े उत्तर प्रदेश में मुलायम अपनी सरकार के मंत्री के जरिए फिर उसी चिंगारी को हवा देने के लिए आगे आए हैं।
न सिर्फ कुश्ती बल्कि सियासी अखाड़े के भी पहलवान माने जाने वाले मुलायम सिंह जानते हैं कि यह पुराना मुद्दा फिर गरमा जाए तो जाटों के सपा से छिटकने से होने वाले नुकसान की भरपाई की जा सकती है।
इस नुकसान की भी भरपाई की कोशिश
मुलायम को यह भी पता है कि कुछ कारणों से उनके साथ पिछड़ों का वैसा समर्थन नहीं रह गया है जैसा विधानसभा चुनाव के वक्त था।
वह जानते हैं कि पिछड़ों में अच्छी संख्या में भागीदारी रखने वाली प्रजापति, कश्यप, कुम्हार, मौर्य, काछी जैसी जातियों को वह अपने साथ जोड़ ले गए तो बाकी काम आसान हो जाएगा।
इसीलिए प्रजापति के जरिए उन्होंने भाजपा व केंद्र सरकार पर एक साथ हमला कराया। प्रजापति ने कहा कि जाटों को आरक्षण देने के मामले में कांग्रेस व भाजपा एक हैं।
जाट संपन्न हैं, उन्हें पिछड़ों के आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए। साफ है कि मुलायम ने भविष्य की अपनी भूमिका तय कर ली है।
वह चाहते हैं कि जाट आरक्षण के विरोध को इतनी हवा दे दी जाए कि गैर जाट पिछड़ी आबादी प्रदेश सरकार की गलतियां भूल कर लोकसभा चुनाव में सपा के पक्ष में जुट जाए।
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