...तो क्या अकेले पड़ गए हैं अखिलेश, हर मुद्दे पर अलग है मुलायम-शिवपाल की राय
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समाजवादी परिवार में संग्राम के मुद्दों पर अलग-अलग राय होने से उनके निपटारे में पेचीदगी पैदा हो गई है। कौमी एकता दल के विलय से लेकर अमर सिंह की भूमिका तक कई सवाल ऐसे हैं जिन पर सीएम अखिलेश यादव का रुख चाचा शिवपाल और पिता मुलायम सिंह से एकदम उलट है।
अखिलेश चाहते हैं कि बर्खास्त युवा नेताओं की पार्टी में वापसी हो और अमर सिंह बाहर किए जाएं, लेकिन पार्टी इसके लिए तैयार नहीं है।
सपा में विवाद की शुरुआत कौमी एकता दल के विलय से हुई। विलय को सपा मुखिया ने हरी झंडी दी, शिवपाल ने इसका एलान किया और उसकी भेंट चढ़े इसमें मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले काबीना मंत्री बलराम यादव। बलराम को मंत्री पद से बर्खास्त कर दिया।
इस मुद्दे पर शुरू हुआ विवाद दो मंत्रियों की बर्खास्तगी, अखिलेश यादव को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने, अखिलेश-शिवपाल समर्थकों के शक्ति प्रदर्शन, शिवपाल समेत चार मंत्रियों की कैबिनेट से छुट्टी और रामगोपाल की पार्टी से विदाई तक पहुंच गया।
दोनों तरफ से किए जा रहे हैं दूरियां बढ़ाने वाले फैसले
मुलायम विवाद खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें कर रहे हैं। बेनी प्रसाद वर्मा, रेवती रमण सिंह और माता प्रसाद पांडेय जैसे मुलायम सिंह के पुराने सहयोगियों ने भी परिवार में सुलह कराने की कोशिश की, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। दोनों तरफ से कुछ ऐसे फैसले किए जा रहे हैं, जिससे दूरियां कम होने के बजाय बढ़ रही हैं।
यूं कहें कि उन फैसलों को दूसरे पक्ष के लिए उकसावे की कार्रवाई माना जा रहा है। पहले एमएलसी आशु मलिक की पिटाई और फिर इसके आरोपी राज्यमंत्री पवन पांडेय को सपा से बर्खास्त करना इसके ताजा उदाहरण हैं। आशु को मुलायम सिंह तो पवन पांडेय को सीएम का नजदीकी माना जाता है।
इन फैसलों से एक के बाद एक बढ़ते गए विवाद...
कौएद का दोबारा हो गया सपा में विलय
अखिलेश कौमी एकता दल के सपा में विलय के इसलिए खिलाफ हैं कि पार्टी पर अपराधियों, माफिया को संरक्षण देने का आरोप न लगे। कौएद बाहुबली विधायक मुख्तार अंसार के परिवार की पार्टी है। इसके अध्यक्ष उनके भाई अफजाल अंसारी हैं। 25 जून को सपा के केंद्रीय संसदीय बोर्ड ने इस विलय को खारिज कर दिया था। पर मुलायम सिंह ने फिर इस विलय को हरी झंडे दे दी।
टिकट वितरण के अधिकार पर आमने-सामने
अखिलेश 2017 के विधानसभा चुनाव के लिए टिकट वितरण का अधिकार चाहते हैं, लेकिन इसके लिए मुलायम व शिवपाल तैयार नहीं हैं।
प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद टिकट तय करने में भूमिका सीमित हो जाने का अंदाजा लगने पर अखिलेश एक चैनल के कार्यक्रम में इस मांग को सार्वजनिक तौर पर उठा चुके हैं। हालांकि अखिलेश का कहना है कि टिकटों को तय करने में अन्य प्रमुख नेताओं की तरह उनकी भूमिका भी रहेगी।
अखिलेश के अध्यक्ष पद पर वापसी अहम मुद्दा
मतभेद का सबसे प्रमुख मुद्दा चुनाव से ठीक पहले अखिलेश को सपा के प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाया जाना है। चूंकि प्रदेश अध्यक्ष ही राज्य संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष होता है, इसलिए अखिलेश के समर्थक उनके लिए अध्यक्ष पद की मांग कर रहे हैं। वे इस पर समझौते के मूड में नहीं दिखते हैं।
अमर सिंह पर निशाना और बचाव
मुलायम सिंह के दिल से राज्यसभा और पार्टी महासचिव के पद तक पहुंचे अमर को अखिलेश पसंद नहीं करते। उन्हें लगता है कि अमर सिंह उनके परिवार में साजिश करते हैं।
यही नहीं अमर सिंह ने ही उन्हें प्रदेश अध्यक्ष पद से हटवाया है। अखिलेश उनके खिलाफ कार्रवाई चाहते हैं। पर, मुलायम और शिवपाल साफ कर चुके हैं कि वे अमर सिंह को नहीं छोड़ सकते।
युवा नेताओं की बहाली पर अटकी है बात
सपा दफ्तर और मुलायम सिंह के आवास पर प्रदर्शन के बाद तीन एमएलसी समेत युवा संगठनों के 7 नेताओं को सपा से निष्कासित कर दिया गया था। पार्टी से बाहर किए गए सभी लोग टीम अखिलेश के सक्रिय सदस्य हैं।
अखिलेश उनकी बहाली चाहते हैं, सार्वजनिक तौर पर वे इसकी अपील भी कर चुके हैं। पर शिवपाल यादव ने तीन युवा संगठनों में नई नियुक्तियां करके उनकी वापसी पर सवालिया निशान लगा दिया है।
रामगोपाल की बर्खास्तगी से और बिगड़ी बात
सपा में चल रहे विवाद के बीच नंबर-2 की हैसियत रखने वाले रामगोपाल यादव पार्टी से बाहर हो चुके हैं। यह समाजवादी परिवार के विवाद के चरम पर पहुंचने का संकेत है।
रामगोपाल जहां अखिलेश के मजबूत पैरोकार हैं, वहीं मुलायम सिंह पर लगातार हमला कर रहे हैं। मुलायम ने साफ कर दिया है कि सपा में अब रामगोपाल चैप्टर बंद हो चुका है जबकि अखिलेश पार्टी में उनकी ससम्मान वापसी चाहते हैं।