इंडियन आर्मी में नेपालियों की भर्ती में आईएसआई का हाथ होने की आशंका, मिले सबूत
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सेना में फर्जी दस्तावेजों के सहारे नेपालियों की भर्ती के पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ हो सकता है। इस आशंका ने भारतीय खुफिया एजेंसियों में खलबली मचा दी है।
इंटेलीजेंस ब्यूरो और मिलेट्री इंटेलीजेंस सहित अन्य खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों ने एसटीएफ के हत्थे चढ़े एमबी क्लब के नौकर संदीप थापा और मिलन थापा से बृहस्पतिवार को लंबी पूछताछ की।
दोनों से गैंग के मास्टरमाइंड प्रकाश थापा के बारे में पूछताछ की गई। उसके आईएसआई के कई बड़े अधिकारियों से अच्छे संबंध रहे हैं। खुफिया सूत्रों ने बताया कि मास्टर माइंड प्रकाश थापा नेपाल में है और अक्सर लखनऊ, देहरादून व अन्य प्रदेशों में आता-जाता रहता है। प्रकाश नेपाल की मिलेट्री इंटेलीजेंस में था और चीन व बांग्लादेश बॉर्डर में तैनात रहा है। सूत्रों ने बताया कि भारतीय सेना की गोरखा रेजीमेंट में नेपाली मूल के युवकों की भर्ती होती थी।
यह भर्ती नेपाल से ही होती थी लेकिन वर्ष 2013 में नेपाल बॉर्डर से आईएसआई ने भारत विरोधी गतिविधियां तेज कर दीं, जिसके बाद से भर्ती पर रोक लगा दी गई। तभी से प्रकाश थापा ने फर्जीवाड़ा करके नेपालियों की भारतीय सेना में भर्ती करानी शुरू कीं।
मिलिट्री इंटेलीजेंस सक्रिय, ताबड़तोड़ छापेमारी की तैयारी
सेना में भर्ती कराने वाले जालसाजों पर लगाम लगाने के लिए मिलिट्री इंटेलीजेंस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि इंटेलीजेंस सक्रिय हो चुकी है और ताबड़तोड़ छापेमारी की जाएगी, जिसमें एसटीएफ सहित स्थानीय पुलिस की भी मदद ली जाएगी।
बुधवार को स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने छावनी में छापा मारकर एमबी क्लब में काम करने वाले संदीप थापा सहित निलमथा निवासी मिलन थापा, नेपाल मिलिट्री इंटेलीजेंस के बर्खास्त कर्मचारी प्रकाश थापा और माया कंप्यूटर कोचिंग सेंटर के संचालक अनिल श्रीवास्तव को गिरफ्तार किया था, जो सात से दस लाख रुपये लेकर नेपाली नागरिकों को हिन्दुस्तानी सेना में भर्ती करवाते थे।
एसटीएफ ने उनके पास से फर्जी मार्क्सशीट, सेना की डिस्चार्ज बुक, मुहरें वगैरह भी बरामद की थीं। इतना ही नहीं इनमें एक शातिर 50 हजार रुपये लेकर पूर्व सैनिकों की डिस्चार्ज बुक के कोड बताता था। मामले की गंभीरता को देखते हुए गुरुवार को सेना इंटेलीजेंस भी सक्रिय हो गई है।
एसटीएफ के साथ मिलकर करेंगे बड़ी कार्रवाई
इतना ही नहीं शहर में सेना भर्ती के लिए चलाई जा रही कोचिंग भी शक के दायरे में हैं और उनकी जांच-पड़ताल की संभावनाएं भी जताई जा रही हैं। सूत्र बताते हैं कि सेना में सैनिक जनरल ड्यूटी की भर्ती की लिखित परीक्षा देशभर में एक साथ कराई जाती है। प्रश्न पत्र भी एक होता है, गर इसे मुख्यालय स्तर पर कराने व ऑनलाइन की योजना बने तो घोटालों पर अंकुश लगाया जा सकता है।
लखनऊ के सिंडिकेट निशाने पर
पिछले वर्ष 26 जुलाई को हुई सेना भर्ती की लिखित परीक्षा का प्रश्न पत्र लखनऊ के सिंडिकेट ने लीक कराया था, जिसकी पकड़ राजस्थान, मध्य प्रदेश व आसपास के राज्यों तक में फैली हुई है।
इस मामले में जब छापेमारी की गई थी तो सिंडिकेट राजस्थान फरार हो चुका था, लेकिन सेना के हाथ हल किए हुए प्रश्न पत्रों के साथ तीन अभ्यर्थी फैजाबाद में लगे थे। इसलिए मिलिट्री इंटेलीजेंस के निशाने पर लखनऊ के सिंडिकेट भी बताए जा रहे हैं।
सर्जिकल स्ट्राइक के बाद सक्रिय हुए गैंग
ऐसा माना जा रहा है कि तो सेना भर्ती के नाम पर लोगों को ठगने वाले गिरोह सर्जिकल स्ट्राइक के बाद तेजी से सक्रिय हुए हैं। चूंकि, स्ट्राइक के बाद सेना में भर्ती होने की इच्छा रखने वालों का ग्राफ भी तेजी से बढ़ा है, जिसका फायदा उठाने के लिए जालसाज सक्रिय हुए हैं। इतना ही नहीं सेना भर्ती से जुड़ी कोचिंगों के संपर्क में ये जालसाज रहते हैं, इसलिए उन पर भी नजर है।
भर्ती मुख्यालय पहुंचे अभ्यर्थी, ली जानकारी
हाल ही में सेना में जीडी, तकनीशियन, नर्सिंग सहायक, ट्रेड्समैन के पदों पर कानपुर कैंट के केवेलरी ग्राउंड में रैली थी। इसमें लखनऊ, बाराबंकी, औरैया, बांदा, महोबा सहित 13 जिले शामिल थे। गुरुवार को अखबारों में जालसाजों से जुड़ी खबर छपने के बाद छावनी स्थित भर्ती मुख्यालयों पर दर्जनों की संख्या में अभ्यर्थी पहुंचे और जानकारी हासिल की।
भर्ती के लिए यहां करें सम्पर्क
सेना भर्ती से जुड़े आला अधिकारी बताते हैं कि अभ्यर्थियों को जालसाजों से बचाने के लिए लगातार अभियान चलाए जाते हैं। इतना ही नहीं थल सेना में भर्ती से संबंधित कोई भी जानकारी टेलीफोन नंबर 0522-2482279 पर प्राप्त की जा सकती है। भर्ती का दावा कराने वालों की जानकारी तत्काल नजदीकी पुलिस स्टेशन को दें।
पुराने प्रोफोर्मा पर बना रहे थे फर्जी प्रमाणपत्र
सेना भर्ती में फर्जी जाति व निवास प्रमाणपत्र दस साल पहले बंद हो चुके प्रोफार्मा पर बनाए जा रहे थे। प्रमाणपत्र बनाने वाले गिरोह के तार जिला प्रशासन की निगरानी में संचालित कुछ और लोकवाणी केंद्रों से भी जुड़े होने की आशंका जतायी जा रही है।
इसके चलते ही मामले की जांच कर रही टीम ने शहरी क्षेत्रों में संचालित 32 में से आधा दर्जन लोकवाणी केंद्रों को जांच के घेरे में लेकर संचालकों को जारी यूजर आईडी से हुए ट्रांजेक्शनों को खंगाला शुरू किया है।
इस संबंध में जिला प्रशासन के जिम्मेदारों का कहना है कि लोकवाणी अथवा जनसुविधा केंद्रों के संचालन की अनुमति प्रशासन जारी जरूर करता है लेकिन इनका संचालन सीएमएस कंपनी की निगरानी में आउटसोर्सिंग कर्मियों की मदद से होता है।
सेना भर्ती में फर्जी जाति, निवास व आय प्रमाणपत्र बनाने के मामले में जो लोग पकड़े गए हैं उसमें शामिल कलेक्ट्रेट लोकवाणी केंद्र का कर्मी आउटसोर्सिंग स्टाफ है। उसका कलेक्ट्रेट प्रशासन अथवा स्टाफ के काम काज से कोई लेना देना नहीं था।
संचालकों की यूजर आईडी की भी होगी जांच
दूसरी तरफ एडीएम वित्त व राजस्व निधि श्रीवास्तव ने इस पूरे मामले को गंभीर मानते हुए कहा कि प्रशासन अतिरिक्त सर्तकता बरतते हुए जिले में संचालित सभी 450 जन सुविधा केंद्रों के नामित संचालकों की यूजर आईडी की जांच पड़ताल भी अपने स्तर से कराएगा। इसमें जिन संचालकों के क्रियाकलाप में गड़बड़ी उजागर होगी उनका संचालन लाइसेंस निरस्त करने तक की कड़ी कार्रवाई होगी।
एसटीएफ द्वारा बीते बुधवार को सेना में नेपाली नागरिकों की भर्ती को फर्जी आय जाति व निवास प्रमाणपत्र जारी कराने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश कर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित सदर तहसील से संबद्ध लोकवाणी केंद्र के आउटसोर्स कर्मी को गिरफ्तार किया था।
जनसुविधा केंद्रों के क्रियाकलाप पर निगरानी से जुड़े ई- डिस्ट्रिक के प्रबंधक तेज बहादुर सिंह ने बताया कि दस साल पहले जनसमुदाय को जाति, आय व निवास प्रमाणपत्र बनवाने में होने वाली परेशानी से छुटकारा दिलाने के लिए प्रशासनिक पहल पर शहरी क्षेत्रों में 30 लोकवाणी केंद्रों का संचालन शुरू हुआ था। तब यहां से मैनुअल आधार पर एसडीएम के हस्ताक्षर से तैयार प्रमाणपत्र ही जारी कर आवेदक को दिए जाते थे।
बाद में सभी प्रमाणपत्रों को ई गर्वनेंस सेवा के तहत ऑन लाइन स्तर पर डिजिटिल सिग्नेचर से जारी कराने की लागू व्यवस्था बाद लोकवाणी केंद्रों का नाम व प्रारूप बदल इसे जनसुविधा केंद्र के नाम से शहरी व ग्रामीण इलाकों में आवेदक को जारी यूजर आईडी के आधार पर संचालित कराने का कार्य शुरू हुआ।
डिजिटल सिग्नेचर के प्रमाणपत्र का फर्जीवाड़ा मुश्किल
वर्तमान में जनसुविधा अथवा लोकवाणी केंद्र स्तर से ऑन लाइन स्तर पर जारी होने वाले निवास आय व जाति प्रमाणपत्र का फर्जीवाड़ा संभव नहीं है क्योंकि यूपी एनआईसी वेबसाइट पर जेएसवाई अथवा लोकवाणी से जारी होने वाले किसी भी प्रमाणपत्र का नंबर वेबसाइट में दर्ज कर बस एक क्लिक पर प्रमाणपत्र की सत्यता का पता लगाया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि इस मामले की जांच पड़ताल से जुड़ी टीम ने फर्जीवाड़े से जुड़े लोगों के पास से जाति आय प्रमाणपत्र जारी करने वाले प्रशासनिक मुहर युक्त जो सादे प्रमाणपत्र बरामद किए हैं प्रमाणपत्र के उस प्रोफार्मा का प्रचलन को आठ साल पहले ही खत्म किया जा चुका है। इसी लिए धंधेबाजों ने बोगस व बेकार हो चुके प्रमाणपत्र के प्रोफार्मा पर ही लोगों के फर्जी नाम पते और पहचान पर जाति आय व निवास प्रमाणपत्र ही जारी कर सके।
पारा, रकाबगंज, खदरा सहित आधा दर्जन केंद्र घेरे में
मामले की जांच पड़ताल से जुड़ी जांच एजेंसी ने कलेक्ट्रेट परिसर में संचालित सदर तहसील से संबद्ध लोकवाणी केंद्र जो कि हरि नारायन के नाम पर आवंटित है के साथ ही पारा, रकाबगंज, खदरा, सआदतगंज व ठाकुरगंज में प्रमाणपत्र जारी करने के कार्य से जुड़े करीब आधा दर्जन अन्य लोकवाणी व जनसुविधा केंद्रों के क्रियाकलाप को भी जांच के घेरे में लेकर कलेक्ट्रेट स्थित ई-डिस्टिक गर्वेनेंस के कार्य से जुड़े अधिकारियों से इनके संचालन इत्यादि को लेकर गहन पूछतांछ भी की। आशंका जतायी जा रही है कि जल्दी इस मामले में कुछ और लोकवाणी अथवा जनसुविधा केंद्र संचालकों पर भी गाज गिर सकती है।
कलेक्ट्रेट के आठ लोग एसटीएफ के रडार पर, एक और गिरफ्तार
सेना में नेपालियों की भर्ती के लिए फर्जी प्रमाणपत्र बनाने में कलेक्ट्रेट के आठ लोग एसटीएफ के रडार पर हैं। एसटीएफ के एसएसपी अमित पाठक ने बताया कि प्रकाश थाना का खास आदमी समीर सिंह है जो फिलहाल फरार है।
समीर के साथ मजहर, पिंटू और पांच आउटसोर्स कर्मचारियों के नाम सामने आए हैं। इनकी तलाश में एसटीएफ की टीमें लगी हैं। इस बीच बृहस्पतिवार को एसटीएफ ने लोकवाणी में कार्यरत अश्वनी मौर्या को भी गिरफ्तार कर लिया।
एसएसपी ने बताया कि समीर सिंह उन्नाव के हरौनी का है। समीर को अच्छी तरह से पता था कि उसके बनाए फर्जी दस्तावेजों से भारतीय सेना में बड़े पैमाने पर नेपालियों की भर्ती की जा रही है। यह राष्ट्रविरोधी गतिविधि हो सकती है, समीर को इसका भी अंदाजा था लेकिन प्रकाश थापा से मिलने वाली मोटी रकम के लालच में वह फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करता रहा। एक प्रमाणपत्र के लिए वह तीन से पांच हजार रुपये लेता था।
एसटीएफ का अंदाजा है कि समीर और उसके सात साथियों के अलावा भी कई लोग इस सिंडीकेट का हिस्सा हो सकते हैं। समीर के पकड़े जाने के बाद पता चलेगा कि कलेक्ट्रेट में प्रकाश थापा की जड़ें कितनी गहरी हैं?
ऐसे भर्तियां कराता था प्रकाश थापा
वर्ष 2013 में गोरखाओं की भर्ती बंद होने के बाद मास्टर माइंड प्रकाश थापा ने रास्ता तलाशा। एसटीएफ सूत्रों ने बताया कि थापा ने भारतीय सेना में तैनात और भारतीय नागरिक बन चुके गोरखाओं का भाई व रिश्तेदार बनाकर लोगों को भारत भेजा।
इन लोगों को भारतीय नागरिकता दिलाने के लिए नेपाल के किसी ग्राम प्रधान से गोरखाओं का रिश्तेदार होने का फर्जी प्रमाणपत्र बनवाया गया। इस प्रमाणपत्र को लेकर नेपाली लखनऊ आ गए।
प्रकाश ने कलेक्ट्रेट के अपने गैंग के सदस्यों की मदद से फर्जी डोमिसाइल व अन्य प्रमाणपत्र बनवाकर नेपालियों को सेना तथा अन्य सरकारी व गैर सरकारी संस्थानों में भर्ती कराना शुरू कर दिया। प्रकाश ने एक्स आर्मी मैन का कार्ड बनवाकर कई लोगों के भारतीय रिजर्व बैंक, टोल प्लाजा, सरकारी विभागों, निगमों में भर्ती कराया।
दो साल में 200 लोगों की भर्ती करा चुका है थापा
एक अनुमान के मुताबिक थापा ने बीते दो साल में 200 से अधिक नेपालियों को भारतीय सेना में भर्ती कराया जिसमें से अधिकतर संवेदनशील सैन्य क्षेत्रों और नेपाल, चीन व बांग्लादेश के बॉर्डर पर तैनात हैं।
आशंका है कि यह सभी नेपाली फौजी पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों के लिए काम कर रहे हैं और गोपनीय, संवेदनशील व राष्ट्र विरोधी सूचनाओं का आदान-प्रदान कर रहे हैं। भर्ती का फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद इन सभी नेपालियों का ब्यौरा जुटाया जा रहा है।
खुफिया सूत्रों का यह भी कहना है कि भारतीय सेना के अलावा प्रकाश थापा ने अन्य सरकारी व गैर सरकारी संस्थानों में भी हजारों नेपालियों की भर्ती कराई है। ऐसे लोगों के बारे में जानकारी के लिए स्थानीय खुफिया एजेंसियों को सक्रिय कर दिया गया है।
फिलहाल भारतीय खुफिया एजेंसियों की टीम नेपाल से संपर्क कर प्रकाश थापा और देश में उसके नेटवर्क का पता लगाने में जुटी हैं। उधर, एसटीएफ भी अपने स्तर पर पड़ताल कर रही है।
एसएसपी अमित पाठक ने कहा कि प्रकाश थापा के बारे में और जानकारियां जुटाई जा रही हैं। उसकी गिरफ्तारी के बाद ही पूरे रैकेट और सेना में उसकी जड़ों के बारे में पता लग सकेगा।