बीएड की 80 हजार सीटों की काउंसलिंग में हुआ 'खेल'
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बीएड की करीब 80 हजार खाली पड़ी सीटों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने माना कि सीटों से इतनी अधिक संख्या में आवेदन के बाद यह नहीं कहा जा सकता कि जिन स्टूडेंट्स ने बीएड के लिए आवेदन कर फीस जमा की, वे इसमें प्रवेश नहीं लेना चाहते।
यूनिवर्सिटी के अनुसार बीएड की काउंसलिंग 7 जून से 2 जुलाई तक चली और 25 दिन के शेड्यूल को पूरा किया। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश के अनुसार इसे पूरा नहीं किया गया।
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के अनुसार काउंसलिंग लगातार 25 दिन चलनी चाहिए, लेकिन इस साल बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी ने असली काउंसलिंग 16 जून से 2 जुलाई तक कराई जो कि केवल 17 दिन होते हैं।
71,900 सीटें खाली
जो कैलेंडर यूनिवर्सिटी ने कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया उसके अनुसार 7 जून से 15 जून तक ऑफलाइन काउंसलिंग हुई, जिसमें अभ्यर्थी केवल फीस, एजुकेशनल सर्टिफिकेट्स और कॉलेज से संबंधित जानकारी ले सकते थे।
कोर्ट के अनुसार इसे काउंसलिंग में शामिल नहीं किया जा सकता क्योंकि इसमें न तो अभ्यर्थी को काउंसलिंग का मौका मिला ना ही कोई अलॉटमेंट हुआ।
बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी के अनुसार प्रदेश में बीएड की 1,38,320 सीटों के लिए 2,34,674 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया। इनमें से केवल 50 हजार के करीब सीटों पर ही प्रवेश हुए जबकि लगभग 71,900 सीटें रिक्त रह गईं।
सुप्रीम कोर्ट जाएगी प्रदेश सरकार
सुनवाई के दौरान प्रमुख सचिव नीरज गुप्ता ने हलफनाम दाखिल करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार इतनी बड़ी संख्या में रिक्त सीटों से काफी चिंतित है। वह खुद इतनी बड़ी संख्या में सीटों का नुकसान नहीं सहन कर सकती।
सरकार ने बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी को निर्देश भी दिए थे कि इस संबंध में आवश्यक कदम उठाए क्योंकि रिक्त सीटों पर प्रवेश के लिए अभ्यर्थी हैं।
लेकिन यूनिवर्सिटी द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अर्जी पर आए आदेश के चलते आगे काउंसलिंग नहीं हो पाई। प्रमुख सचिव ने कहा कि प्रदेश सरकार इस मामले में सुप्रीम कोर्ट जाएगी।
31 दिसंबर से पहले तैयार होगी नियमावली
प्रमुख सचिव ने कोर्ट में कहा कि बीएड के संबंध में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व में जारी निर्देशानुसार नियमावली 31 दिसंबर, 2014 से तक तैयार कर ली जाएगी। भविष्य में बीएड से संबंधित प्रवेश प्रक्रिया उसी के अनुसार पूरी होगी।
इस नियमावली में परीक्षा से लेकर काउंसलिंग कर सीटें भरने तक की सभी प्रक्रिया तय होगी।
पिछले साल तक होती थी पूल काउंसलिंग
सत्र 2013-14 तक बीएड के लिए लगातार होने वाली काउंसलिंग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद कॉलेजों की मांग पर पूल काउंसलिंग कराई जाती थी। यह व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट ने निर्धारित की थी।
इसमें 5 हजार या आवश्यकतानुसार अधिक अभ्यर्थियों की वेटिंग लिस्ट तैयार होती थी। इसके बाद जो अभ्यर्थी इस काउंसलिंग के लिए सहमती देते उनको प्रदेश भर केकॉलेजों में से मेरिट के आधार पर सीट अलॉट होती। पेटिशन फाइल करने वाले कॉलेजों की ओर से इस बात को भी कोर्ट के समक्ष रखा गया।