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शासन ने केजीएमयू कुलसचिव के खिलाफ शुरू कराई जांच, मंडलायुक्त लखनऊ 20 दिन में सौंपेंगे रिपोर्ट

Mon, 27 Dec 2021 02:27 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 27 Dec 2021 02:27 AM IST
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investigation starts against kgmu registrar
लखनऊ। किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के कुलसचिव आशुतोष कुमार द्विवेदी के खिलाफ शासन ने जांच बैठा दी है। उन पर मृतक आश्रित नियुक्ति में लापरवाही सहित अन्य आरोप हैं। मामले में सत्ता पक्ष के विधायकों एवं विपक्ष सहित 13 लोगों ने शासन से शिकायत की थी। विशेष सचिव चिकित्सा शिक्षा अशोक कुमार ने लखनऊ के मंडलायुक्त को जांच सौंपी है। उन्हें 20 दिन में जांच रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है।
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केजीएमयू कुलसचिव के खिलाफ विधायक लीना तिवारी, विधायक गोरखनाथ बाबा, विधायक रवि सोनकर, विधायक अभिजीत सिंह सांगा, एमएलसी रमा निरंजन सहित 13 लोगों ने शिकायत की थी। इसमें तीन शिकायतें कांग्रेस नेताओं ने की थी। इसी तरह राज्यपाल कार्यालय, मुख्यमंत्री कार्यालय में भी शिकायतें गई थीं। इन सभी में यह आरोप लगाया गया कि केजीएमयू में मृतक आश्रित सेवा नियमावली के तहत अनुकंपा के आधार पर तथ्यों को छिपाकर हुई नियुक्ति में चार कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया गया, लेकिन मां के नौकरी पर होने के बाद भी पिता के स्थान पर नौकरी करने वाले आनंद कुमार मिश्रा पर कार्रवाई नहीं की गई। यह भी आरोप है कि शासन के निर्देश के बाद भी कुलसचिव और अधिष्ठान प्रभारी आदर्श श्रीवास्तव ने प्रकरण को निस्तारित करने के बजाय लंबित रखा। इतना ही नहीं कोर्ट में पैरवी भी नहीं की जा रही है। कुलसचिव जिस कर्मचारी को बचा रहे हैं, उस पर कुलपति कार्यालय में फर्नीचर मरम्मत के नाम पर 80 हजार रुपये गबन का भी आरोप है। इसके बाद भी कुलसचिव ने आनंद को निलंबित नहीं किया। उन्हें सिर्फ स्थानांतरित किया गया। आरोप के बाद भी कुलपति कार्यालय में महत्वपूर्ण पटल पर तैनाती दी गई। यह भी आरोप है कि गैर शैक्षणिक अधिष्ठान प्रभारी आदर्श श्रीवास्तव एक मामले में जेल गए, उन्हें निलंबित किया गया। इसके बाद भी उन्हें पदोन्नति दे दी गई।
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विधानसभा में दी गलत सूचना
शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि विधायक अनिल कुमार दोहरे के अतारांकित प्रश्न संख्या 127 में कुलसचिव द्वारा दी गई सूचना में आनंद कुमार मिश्रा, जांच अधिकारी डॉ. समीर मिश्रा और अधिष्ठान से जुड़े अन्य कार्मिकों व अधिकारियों से संबंधित विषय की सूचना नहीं दी गई। इतना ही नहीं केजीएमयू के साइंटिफिक कंवेंशन सेंटर में लाखों रुपये गबन के दोषी गौरव गौतम व अभ्यर्थियों के रुपये लेकर पेपर लीक करने के मामले में कोई सूचना नहीं दी गई। आरोप है कि कुलसचिव ने जानबूझकर तथ्यों को छिपाया और विधानसभा को गलत सूचना दी।
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डॉ. बाखलू प्रकरण भी उठाया
शासन सचिव की ओर से मंडलायुक्त को भेजे पत्र में यह भी बताया गया है कि शिकायतकर्ता ने डॉ. आशीष वाखलू और कर्मचारी आनंद मिश्रा के प्रकरण को भी जोड़ा है। इसमें बताया गया कि डॉ. आशीष वाखलू का प्रकरण कोर्ट में है। उच्च न्यायालय द्वारा संबंधित याचिकाओं में अंतिम निर्णय आने तक अंतिम आदेश पारित करने पर रोक लगाई गई है। इसके बाद भी डॉ. आशीष वाखलू को बर्खास्त कर दिया गया, लेकिन आनंद के मामले में कार्रवाई नहीं की गई।

उपलब्ध कराएंगे पत्रावली
आईजीआरएस के तहत इसका जवाब दिया जा चुका है। कोई गंभीर बात नहीं है। जांच अधिकारी जो पत्रावली मांगेंगे, उपलब्ध कराया जाएगा। -आशुतोष द्विवेदी, कुलसचिव
जांच में करेंगे सहयोग
शासन स्तर से हो रही जांच में सहयोग किया जाएगा। जांच अधिकारी जो भी दस्तावेज मांगेंगे उसे यूनिवर्सिटी प्रशासन उपलब्ध कराएगा। - डा. सुधीर सिंह, प्रवक्ता केजीएमयू
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