देवरिया कांड पर खुलासा: खुद पर पेट्रोल डाल लेती थी संचालिका, बवाल के डर से लौट जाते थे अफसर
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देवरिया में अवैध रूप से चल रहे मां विध्यवासिनी नारी संरक्षण गृह को लेकर रोज नए-नए खुलासे हो रहे हैं। सीएम के निर्देश पर लखनऊ से जांच के लिए गई दो महिला अधिकारियों ने पाया कि पुलिस व प्रशासन जब उक्त संरक्षण गृह के खिलाफ कोई कार्रवाई करने के लिए कदम उठाता तो संचालिका गिरिजा त्रिपाठी मिट्टी का तेल या पेट्रोल डाल कर खुद को आग लगाने की धमकी देती थी।
इतना ही नहीं, कई बार वह खुद पर मिट्टी का तेल या पेट्रोल डाल लेती थी। क्षेत्र में इस महिला का अच्छा-खासा रसूख था। इसलिए मौके पर पहुंचे अधिकारी बवाल के डर से लौट जाते थे। मुख्यमंत्री को सौंपी गई जांच रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जिलाधिकारी को इस संबंध में 15 पत्र लिखे गए थे।
डीपीओ को अंदर घुसने नहीं देती थी गिरिजा
रिपोर्ट के मुताबिक इस संरक्षण गृह पर कार्रवाई के लिए गए डीपीओ को गिरिजा संरक्षण गृह के अंदर भी नहीं जाने देती थी। वह कहती थी कि उसका लाइसेंस निरस्त हुआ है, जिसे जल्द ही वह बहाल करा लेगी। लाइसेंस बहाल होने के बाद साल भर से बकाया रकम भी उसे मिल जाएगी।
अगर संरक्षण गृह खाली हो गया तो उसे सरकार पैसे नहीं देगी। कुछ दिन पहले जब एसपी अपनी टीम के साथ पहुंचे थे, तो भी महिला ने खुद पर किरोसिन डाल लिया था और आग लगाने की धमकी दे रही थी। पुलिस ने वापस आकर एफआईआर दर्ज कर ली थी।
एसपी के मनाही के बाद भेजी जाती रही लड़कियां
सूत्रों के मुताबिक गिरिजा त्रिपाठी के संरक्षण गृह का लाइसेंस निरस्त होने के बाद पूर्व एसपी ने एक सर्कुलर जारी किया था, इसमें पुलिस की कस्टडी में आई लड़कियों को इस संरक्षण गृह में न रखने की बात कही गई थी।
मौजूदा एसपी रोहन पी कनय ने भी इस मामले में न सिर्फ वायरलेस मैसेज के जरिए सभी थानों को सूचना दी थी बल्कि लिखापढ़ी में सभी थानों को आदेश दिया था कि यहां लड़कियों व महिलाओं को न भेजा जाए।
मगर पुलिस के सामने मजबूरी यह थी कि मुकदमों से संबंधित लड़कियों को रखने के लिए देवरिया में कोई सरकारी संरक्षण गृह नहीं है। सबसे नजदीक गोरखपुर और फिर वाराणसी में है। यहां ले जाना भी पुलिस के लिए टेढ़ी खीर था। ऐसे में अधिकारियों के आदेशों को दरकिनार करते हुए इन लड़कियों को इसी संरक्षण गृह में रखा जाता रहा।
संरक्षण गृह में थी 48 लड़कियां, सात का अब तक सुराग नहीं
प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार बताते हैं कि संरक्षण गृह में कुल 48 लड़के व लड़कियां थीं। इनमें से 23 को पुलिस ने मुक्त कराया। इनमें 20 लड़की और तीन लड़के थे। जुलाई में पुलिस की ओर से विभिन्न मामलों में संरक्षण गृह भेजी गईं 15 लड़कियों को उनके परिवारीजनों के सुपुर्द कर दिया गया था। इन 15 लड़कियों में 14 की तस्दीक मौके पर जाकर पुलिस ने कर ली है। इन लड़कियों की वीडियोग्राफी भी कराई गई है। जबकि एक लड़की की तलाश की जा रही है।
तीन लड़कियां गोरखपुर में और एक लड़की देवरिया में मिली है। वहीं पुलिस की गिरफ्त में आई संरक्षण गृह संचालिका गिरिजा का दावा है कि उसने कुछ लड़कियों की शादी करा दी और वह अपने ससुराल में हैं। उसका कहना है कि संरक्षण गृह के रजिस्टर में उसके बारे में जानकारी मौजूद है। क्योंकि संरक्षण गृह को सील कर दिया गया है, इसलिए पुलिस रजिस्टर से उन महिला व लड़कियों का पता नहीं निकाल सकी है, जिससे गिरिजा के दावों की तस्दीक हो सके।
हर उम्र की थी लड़कियां
सूत्रों के मुताबिक संरक्षण गृह में जो लड़कियां थीं, उनमें शून्य से 10 साल के उम्र की 7 लड़कियां, 10 से 18 साल की उम्र की 20 लड़कियां और 18 साल से अधिक उम्र की 16 लड़कियां थीं। बाकी के उम्र का रिकॉर्ड नहीं मिल पाया है।