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पिकप
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पिकप भवन में साजिशन लगाई गई थी आग, एफआईआर दर्ज
पिकप भवन में तीन जुलाई को लगी आग साजिशन लगाई गई थी। यह खुलासा प्रदेश सरकार को शनिवार को सौंपी गई जांच रिपोर्ट में हुआ है। इस घटना में उद्यमियों को लोन से संबंधित सैकड़ों फाइलें राख हो गई थीं। इन फाइलों का अभी तक डिजिटलाइजेशन भी नहीं हुआ था। अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी के निर्देश पर डीजीएम रिचा भार्गव ने विभूतिखंड थाने में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है।
जानकारी के अनुसार इंटेलीजेंस एडीजी एसबी शिरोडकर की जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रथमदृष्टया आग लगाया जाना प्रतीत हो रहा है। शार्ट सर्किट के कोई सुबूत नहीं मिले हैं। यदि शार्ट सर्किट से आग लगी होती तो ‘पैनल डिस्टर्ब’ जरूर होता, लेकिन ऐसा नहीं था। बिल्डिंग के एयर कंडीशन या ऐसी में भी शार्ट सर्किट के सुबूत नहीं मिले हैं।
राख हुई फाइलों का नहीं हुआ था ऑडिट
रिपोर्ट के मुताबिक पिकप भवन के प्रथम तल पर स्थित प्रदेशीय इंडस्ट्रियल एवं इंवेस्टमेंट कार्पोरेशन उत्त प्रदेश लिमिटेड (पिकप) में आग तीन जुलाई को शाम सवा सात बजे लगी। विभाग ने पौने आठ बजे इसकी सूचना दी। यह किसी साजिश की ओर ही इशारा कर रहा है। पिकप की ओर से उद्यमियों को उद्योग की स्थापना के लिए ऋण दिया जाता है। पूर्व में दिए गए लोन की फाइलों का डिजिटलाइजेशन तक नहीं हुआ था। इन फाइलों का ऑडिट किया जाना प्रस्तावित था। अगर फाइलों का ऑडिट होता तो कई बड़े अधिकारी इसकी जद में आते और बड़े घोटाले से पर्दा उठ जाता। घोटालों पर पर्दा पड़ा रहे, इस लिए आग साजिशन लगाई गई।
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लोन से संबंधित एक भी फाइल नहीं बची
जांच रिपोर्ट के अनुसार आग का असर उन कमरों तक अधिक था, जहां पर उद्यमियों को लोन से संबंधित फाइलें रखी हुई थीं। सूत्रों का कहना है कि लोन से संबंधित एक भी फाइल नहीं बची है। फाइलें तीन कमरों में रखी हुई थीं।
विभाग ने आधे घंटे बाद दी गई सूचना
रिपोर्ट के मुताबिक आग शाम सवा सात बजे लगी। आग लगने की पहली सूचना वेव शॉपिंग माल के चौथे तल पर बने रेस्टोरेंट में बैठे मनीष श्रीवास्तव ने 100 नंबर पर दी थी। वहां से आग साफ दिखाई दे रही थी। वहीं, विभाग की ओर से इसकी सूचना देने में आधे घंटे की देरी की गई। रात करीब पौने आठ बजे इसकी सूचना दी गई। ऐसा लगता है कि जानबूझकर ऐसा किया गया।
कर्मचारियों के बयानों में विरोधाभास
जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में अलग-अलग कर्मियों के बयान भी दर्ज किए हैं, जिसमें काफी विरोधाभास है। जो अधिकारी समिति के सामने पेश नहीं हुए, उनका बयान फोन पर रिकार्ड किया गया और उसे रिपोर्ट के साथ संलग्न किया गया है। जांच टीम ने कई फोटो भी लगाई है जो स्पष्ट साजिश की ओर इशारा कर रहे हैं।
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पिकप भवन में तीन जुलाई को लगी आग साजिशन लगाई गई थी। यह खुलासा प्रदेश सरकार को शनिवार को सौंपी गई जांच रिपोर्ट में हुआ है। इस घटना में उद्यमियों को लोन से संबंधित सैकड़ों फाइलें राख हो गई थीं। इन फाइलों का अभी तक डिजिटलाइजेशन भी नहीं हुआ था। अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी के निर्देश पर डीजीएम रिचा भार्गव ने विभूतिखंड थाने में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है।
जानकारी के अनुसार इंटेलीजेंस एडीजी एसबी शिरोडकर की जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रथमदृष्टया आग लगाया जाना प्रतीत हो रहा है। शार्ट सर्किट के कोई सुबूत नहीं मिले हैं। यदि शार्ट सर्किट से आग लगी होती तो ‘पैनल डिस्टर्ब’ जरूर होता, लेकिन ऐसा नहीं था। बिल्डिंग के एयर कंडीशन या ऐसी में भी शार्ट सर्किट के सुबूत नहीं मिले हैं।
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राख हुई फाइलों का नहीं हुआ था ऑडिट
रिपोर्ट के मुताबिक पिकप भवन के प्रथम तल पर स्थित प्रदेशीय इंडस्ट्रियल एवं इंवेस्टमेंट कार्पोरेशन उत्त प्रदेश लिमिटेड (पिकप) में आग तीन जुलाई को शाम सवा सात बजे लगी। विभाग ने पौने आठ बजे इसकी सूचना दी। यह किसी साजिश की ओर ही इशारा कर रहा है। पिकप की ओर से उद्यमियों को उद्योग की स्थापना के लिए ऋण दिया जाता है। पूर्व में दिए गए लोन की फाइलों का डिजिटलाइजेशन तक नहीं हुआ था। इन फाइलों का ऑडिट किया जाना प्रस्तावित था। अगर फाइलों का ऑडिट होता तो कई बड़े अधिकारी इसकी जद में आते और बड़े घोटाले से पर्दा उठ जाता। घोटालों पर पर्दा पड़ा रहे, इस लिए आग साजिशन लगाई गई।
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लोन से संबंधित एक भी फाइल नहीं बची
जांच रिपोर्ट के अनुसार आग का असर उन कमरों तक अधिक था, जहां पर उद्यमियों को लोन से संबंधित फाइलें रखी हुई थीं। सूत्रों का कहना है कि लोन से संबंधित एक भी फाइल नहीं बची है। फाइलें तीन कमरों में रखी हुई थीं।
विभाग ने आधे घंटे बाद दी गई सूचना
रिपोर्ट के मुताबिक आग शाम सवा सात बजे लगी। आग लगने की पहली सूचना वेव शॉपिंग माल के चौथे तल पर बने रेस्टोरेंट में बैठे मनीष श्रीवास्तव ने 100 नंबर पर दी थी। वहां से आग साफ दिखाई दे रही थी। वहीं, विभाग की ओर से इसकी सूचना देने में आधे घंटे की देरी की गई। रात करीब पौने आठ बजे इसकी सूचना दी गई। ऐसा लगता है कि जानबूझकर ऐसा किया गया।
कर्मचारियों के बयानों में विरोधाभास
जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में अलग-अलग कर्मियों के बयान भी दर्ज किए हैं, जिसमें काफी विरोधाभास है। जो अधिकारी समिति के सामने पेश नहीं हुए, उनका बयान फोन पर रिकार्ड किया गया और उसे रिपोर्ट के साथ संलग्न किया गया है। जांच टीम ने कई फोटो भी लगाई है जो स्पष्ट साजिश की ओर इशारा कर रहे हैं।