लखनऊ रेप कांड: CBI का अहम दस्तावेज गायब
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मोहनलालगंज गैंगरेप कांड की सीबीआई जांच से संबंधित फॉर्मेट ही गुम हो गया है। घटना के करीब 20 दिन बाद ही मुख्यमंत्री से सीबीआई जांच के लिए हामी मिलने के बाद राज्य सरकार की ओर से केंद्रीय गृह मंत्रालय को यह फॉर्मेट भेजा गया था।
इसे भेजने के दो माह बाद भी सीबीआई की तरफ से जब कोई रिस्पांस नहीं मिला तो छानबीन कराई गई, जिसमें फॉर्मेट के खो जाने का खुलासा हुआ।
राज्य सरकार ने बीती नौ सितंबर को केंद्र सरकार को दोबारा यह दस्तावेज भेजा है। हालांकि, अफसर फॉर्मेट में दी गई जानकारियों में गड़बड़ी का बहाना बना रहे हैं। गृह सचिव राजीव अग्रवाल ने फॉर्मेट में गड़बड़ी होने की जानकारी देते हुए अनुरोध पर इसे दोबारा भेजने की बात कही है।
जांच टीम बार-बार हो रही शर्मसार
बीती 17 जुलाई की सुबह मोहनलालगंज के बलसिंहखेड़ा प्राथमिक विद्यालय में युवती का निर्वस्त्र शव मिला था। इसके बाद सोशल मीडिया पर उसके फोटो आने से लेकर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया में पुलिस ने घोर लापरवाही बरती थी।
वहीं, मामले को लेकर अफसरों की बयानबाजी और खुलासे पर भी सवाल उठे थे। सरकार और जनता के आक्रोश के दबाव में पुलिस ने केस सॉल्व करने की जो थ्योरी दी, वह भी गलत साबित हुई। पीड़ित और अपराधी दोनों ही परिवारों के लोगों ने सीबीआई जांच की मांग की और यूपी पुलिस को एक बार फिर शर्मसार होना पड़ा। नतीजा ये निकला कि आखिरकार जांच सीबीआई के हाथ में दे दी गई।
दो महीने बाद ये ये जांच सही से शुरू भी नहीं हो सकी थी कि अब सीबीआई जांच संबंधी फॉर्मेट गायब होने से राज्य सरकार एक बार फिर कठघरे में खड़ी हो गई है। इस पूरे मामले में बार-बार सवाल उठता रहा है कि आखिर इतनी दिक्कत हो क्यों रही है।
पुलिस ने क्यों बोला था झूठ?
मोहनलालगंज गैंगरेप मामले में पुलिस की कहानी पूरी तरह झूठी साबित हुई थी। फॉरेंसिक जांच में दरिंदगी की शिकार महिला की हत्या गैंगरेप के
बाद ही की गई थी।
महिला के निजी अंगों और नाखूनों के सैंपल की
फॉरेंसिक जांच ने इस मामले में केवल सिक्योरिटी गार्ड राम सेवक के शामिल
होने की पुलिस की थ्योरी को झूठ साबित कर दिया। यह एडीजी सुतापा सान्याल के लिए भी एक बड़ा झटका था।
डीआईजी नवनीत
सिकेरा ने वारदात में एक से अधिक व्यक्ति के शामिल होने की बात को स्वीकार
करते हुए कहा कि नाखूनों के सैंपल में रामसेवक यादव की प्रोफाइल तो स्पष्ट
हो गई लेकिन दूसरों का पता नहीं चल पा रहा है। रामसेवक के साथ और कौन लोग थे, इसकी पड़ताल कराई जाने की बात उन्होंने कबूल की, लेकिन तब तक मामला हाथ से निकल चुका था।
देखना ये है कि बुरी तरह उलझ चुके इस मामले में किसी को सजा होती भी है या नहीं।