HCBL बैंक: हंगामे पर CEO ने दिया इंटरव्यू
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ग्राहकों में बंदी की अफवाह और आरबीआई के प्रतिबंध के बावजूद एचबीसीएल कोऑपरेटिव बैंक ने ग्राहकों के साथ खड़े होने का दावा किया है। बैंक के सीईओ पवन कपूर ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि अगर ग्राहक चाहते हैं तो हम उनका पूरा पैसा लौटाएंगे। बैंक अपने ग्राहकों के साथ खड़ा है।
- ग्राहकों में अफवाह है कि बैंक अपना बिजनेस समेट रहा है। सच क्या है?
पवन कपूर- यह अफवाह कैसे फैल रही है। मुझे खुद समझ नहीं आ रहा। हम पहले की तरह ही अपना काम कर रहे हैं। शुक्रवार को हंगामे के बाद भी शनिवार को हमारी ब्रांच खुलीं। हमने करोड़ों रुपये ग्राहकों को लौटाए। नए लोन पर रोक लगा दी गई है। ईएमआई जरूर जमा की जाएंगी। किसी भी तरह के बैंक खातों से भुगतान लिया जा सकता है।
प्री-मैच्योर फिक्स्ड डिपॉजिट, रिकरिंग डिपॉजिट से भी हम भुगतान कर रहे हैं। यह हमारी मजबूरी है कि आरबीआई के आदेश के मुताबिक छह महीने के अंतराल में 1 लाख रुपये से ज्यादा का भुगतान हम नहीं कर सकते। लॉकर पूरी तरह सुरक्षित हैं। ग्राहक अपने लॉकर्स चेक भी कर सकते हैं।
आरबीआई ने रिपोर्ट में माना मजबूत है बैंक
- हाईकोर्ट में बैंक ने आज याचिका दायर की है। आरबीआई के आदेश के खिलाफ क्या राहत मांग रहे हैं?
- हाईकोर्ट में शनिवार को बैंक ने याचिका दायर की है। हमने अपील की है कि खुद आरबीआई ने खुद अपनी रिपोर्ट में एचसीबीएल को 31 मार्च 2013 को आर्थिक रूप से मजबूत माना है।
वित्तीय वर्ष 2014-15 में बैंक ने 2.75 करोड़ रुपये का लाभ कमाया। 185 करोड़ के डिपॉजिट हमारे पास हैं। 50 करोड़ रुपये का लोन हमने बांटा है। हमारा एनपीए शून्य है। केवाईसी हमारा 100 प्रतिशत है।
आरबीआई के खुद का पूंजी पर्याप्तता अनुपात का मानक 13 प्रतिशत है जबकि एचसीबीएल का यह अनुपात 80 प्रतिशत है।
देश के किसी भी बैंक का इतना पूंजी पर्याप्तता अनुपात नहीं है। इसके बाद भी बैंक पर प्रतिबंध लगाना उचित नहीं। हमने हाईकोर्ट को इन तथ्यों के साथ एफीडेविट दिया है। हाईकोर्ट में इस याचिका पर सुनवाई मंगलवार को होगी।
जब फैक्ट सामने रखे तो प्रतिबंध क्यों?
- यह फैक्ट क्या बैंक ने आरबीआई के सामने नहीं रखे? फिर प्रतिबंध क्यों?
पवन कपूर- आरबीआई की टीम जब हमें बैंक के लेनदेन पर प्रतिबंध का आदेश देने आई। ऐसे में कोई जानकारी हमसे साझा नहीं की गई। हमने पूछा कि ऐसा क्यों? इसके जबाव में भी हमें कुछ नहीं बताया गया। हमारी कोई सुनवाई नहीं हुई। सही तरीका यह था कि बैंक की जांच आरबीआई की विशेष टास्क फोर्स ऑन कोऑपरेटिव अर्बन बैंक (टैफकब) करती।
टैफकब की रिपोर्ट पर एक नोटिस बैंक को दिया जाता। ऐसा कुछ नहीं हुआ। हमने आरबीआई को भी एक पत्र भेजा है। इसमें आरबीआई से अनुरोध किया गया है कि 1 लाख रुपये के लेनदेन का अगर प्रतिबंध हटे तो हम ग्राहकों को ज्यादा फायदा पहुंचा सकेंगे। इसके अलावा आरबीआई से गवर्नमेंट सिक्योरिटीज को बेचने की अनुमति मांगी गई है। इससे ग्राहकों का भुगतान किया जा सकेगा।
- क्या सहारा समूह से बैंक का कोई संबंध है?
पवन कपूर- हम पहले भी इस पर स्थिति साफ कर चुके हैं। सहारा समूह हमारा केवल ग्राहक है। हमारे यहां उनके स्टाफ के बैंक एकाउंट उसी तरह हैं जैसे उनके दूसरी बैंकों में हैं।
फैक्ट फाइल
- 26,000 बैंक खाते
- 185 करोड़ रुपए डिपॉजिट
- 50 करोड़ रुपये के लोन बांटे
- 5 ब्रांच लखनऊ में संचालित
- 5 जिलों में बैंकिंग
- 2.75 करोड़ रुपये का लाभ 2014-15 में