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दरोगा जी की मनमानी पर अब लगेगा अंकुश, 60 दिन में लगानी पड़ेगी पाक्सो एक्ट में चार्जशीट

Fri, 01 Mar 2019 10:48 PM IST
राजेश सैनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: राजेश सैनी Updated Fri, 01 Mar 2019 10:48 PM IST
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Inspector arbitrariness will have to be charged in sixty days the chargesheet in Pocso Act
यूपी पुलिस - फोटो : अमर उजाला

दरोगा जी की मनमानी पर अब अंकुश लगेगा। पाक्सो एक्ट से लेकर अन्य गंभीर मामलों में यूपी काप ऐप के जरिए प्रकरण में होने वाली प्रगति से न सिर्फ आवेदकों को अवगत कराया जाता रहेगा बल्कि संबंधित पुलिस अधिकारियों को भी इसकी समय पर सूचना जाती रहेगी। डीजीपी ओपी सिंह ने इस नई सेवा को शुरू करे जाने के निर्देश दिए हैं।

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असल में सेवा सिटिजन सर्विसेज के तहत लांच किए गए यूपी काप ऐप में लोगों को मिलने वाली सुविधाओं पर आवेदन करने वालों को पुलिस ने एक और सुविधा देनी शुरू कर दी है। आवेदकों को पुलिस एसएमएस भेज कर उनके मामले में हो रही प्रगति की जानकारी देगी। ऐप अपने आप ही कंप्यूटराइज्ड तरीके से एसएमएस भेजता रहेगा। आला अफसरों का मानना है कि जब वादी को हर जानकारी मिलती रहेगी तो विवेचकों की मनमानी पर खासा अंकुश लग सकेगा।

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पाक्सो एक्ट के मामलों पर होगी खास नजर
इसमें पाक्सो एक्ट पर खास ध्यान रखा जा रहा है। सर्वोच्च अदालत ने इस अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में 60 दिन में आरोपपत्र दाखिल करे जाने के निर्देश दिए हुए हैं। यूपी काप 31, 40, 50 व 55वें दिन पर विवेचक, संबंधित थाना प्रभारी व क्षेत्राधिकारी को एसएमएस भेज कर अलर्ट करता रहेगा।

इसके बाद अगर 60 दिन तक मामले में आरोपपत्र दाखिल नहीं हुआ है तो विवेचक के अलावा, थाना प्रभारी, क्षेत्राधिकारी, अपर पुलिस अधीक्षक, जिले के पुलिस कप्तान, रेंज के डीआईजी व जोन के आईजी तक को एसएमएस से यह सूचना पहुंच जाएगी कि समय पूरा होने पर भी अभी तक आरोपपत्र दाखिल नहीं हो सका है। ऐसे ही अन्य गंभीर मामलों में भी होगा। हालांकि इसमें एसएमएस की सूचना जिले के कप्तान व निचले स्तर के अन्य पुलिस अफसरों तक ही पहुंचेगी।

वादी को मिलेगी सारी जानकारी
एडीजी तकनीकी सेवाएं आशुतोष पांडेय ने बताया कि इस ऐप के जरिए ई-एफआईआर दर्ज करते ही थानेदार से लेकर कप्तान तक को मुकदमा दर्ज होने की जानकारी मिल जाएगा। जबकि वादी को विवेचक का नाम व उसका फोन नंबर एसएमएस के जरिए फौरन मिल जाएगा। इतना ही नहीं अगर मामले में कोई विवेचक बदलता है अथवा जांच बदलती है, उसमें चार्जशीट या फाइनल रिपोर्ट लगाती है, मामले में किसी की गिरफ्तारी होती है, चोरी गया सामान बरामद होता है आदि मामलों में भी एसएमएस से जानकारी भेजी जाएगी। एडीजी ने बताया कि पुलिस के अलावा उसकी कोई अन्य जांच एजेंसी भी अगर किसी जांच के सिलसिले में चार्जशीट या फाइनल रिपोर्ट लगाती है तो इसकी भी जानकारी प्रकरण के वादी को मिल जाएगी।

फिलहाल इन मामलों में एसएमएस से भेजी जाएगी सूचना
- एफआईआर रजिस्ट्रेशन, ई एफआईआर रजिस्ट्रेशन, एफआईआर ट्रांसफर, एफआईआर पुन: आवंटन, अरेस्ट मेमो, सीजर मेमो, चार्जशीट, अंतिम रिपोर्ट, कंप्लेंट रजिस्ट्रेशन, किरायेदार सत्यापन, घरेलू सहायता, करेक्टर सर्टीफिकेट, एंप्लाई (कर्मचारी) वेरीफिकेशन आदि।

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