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घर में पति की लाश रख दो दिन तक भटकती रही बीवी!

Thu, 07 May 2015 04:46 PM IST
ऋषि मिश्र/अमर उजाला, लखनऊ
ऋषि मिश्र/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 07 May 2015 04:46 PM IST
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insensitive behaviour of lda towards employee

पति की मृत्यु के बाद विलाप के आंसू सरकारीकरण की गर्मी से सूख गए। एलडीए में चपरासी के पद पर तैनात जीतेंद्र सिंह की मौत सोमवार की रात हुई।

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दो दिन तक लाश घर में पड़ी रही। बुधवार दोपहर तक उसकी पत्नी अमृता देवी लखनऊ विकास प्राधिकरण के कार्यालय में अंतिम संस्कार के लिए मिलने वाली धनराशि के लिए भटकती रही।
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कर्मचारी कल्याण कोष से 10 हजार रुपये का भुगतान मृतक कर्मचारी के अंतिम संस्कार के लिए प्राधिकरण करता है। परिवारीजनों की माने तो जीतेंद्र की मृत्यु इसलिए हुई क्योंकि, उसकी दवा करने के लिए घर में पैसे नहीं थे।
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ऐसे में अंतिम संस्कार में खर्च होने वाले रुपये कहां से आते। कर्मचारी कल्याण कोष से भुगतान करने वाला बाबू उस विधवा को एक पटल से दूसरे पटल तक घुमाता रहा।

अंत में जब हारकर कर्मचारी यूनियन की मदद से पीड़िता सचिव के ऑफिस पहुंची तब कहीं जाकर सुनवाई हुई और महिला को 10 हजार रुपये का भुगतान किया गया।

न घर में रुपये न किसी ने की मदद

insensitive behaviour of lda towards employee

एलडीए के लालबाग ऑफिस में जीतेंद्र सिंह अनुचर के पद पर कार्यरत था। वह चौक के छांछी कुआं इलाके में सपरिवार रहता था।

उसकी मृत्यु लंबी बीमारी के बाद सोमवार देर शाम हो गई थी। देर शाम मौत होने की वजह से मंगलवार को अंतिम संस्कार के लिए कोशिशें शुरू की गईं।

पीड़िता के सहयोगियों का आरोप है कि, कर्मचारी कल्याण कोष का काम देखने वाले बाबू राकेश कुमार को मंगलवार को जानकारी दी गई। मगर छुट्टी होने की वजह से उन्होंने कोई रिस्पांस नहीं दिया।

घर में रुपये के नाम पर कुछ भी नहीं था और न ही कहीं से कोई मदद मिल पा रही थी। इसके बाद पति की लाश को घर में छोड़ कर वह बुधवार सुबह नौ बजे एलडीए भागी।

...तो ऐसे हुआ रुपयों का इंतजाम

insensitive behaviour of lda towards employee

यहां वह कर्मचारी यूनियन के ऑफिस अपनी गुहार लेकर पहुंची। कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारियों ने अधिष्ठान के अनुभाग अधिकारी को इस संबंध में उसे अंतिम संस्कार मद में 10 हजार रुपये देने के लिए कहा।

मगर अधिष्ठान ने कोष में धन होने से साफ इन्कार कर दिया। इसके बाद में महिला को कर्मचारी कल्याण कोष का काम देख रहे बाबू राकेश कुमार के पास भेजा गया।

जहां महिला को लगातार इधर से उधर टरकाया जाता रहा। महिला दोबारा कर्मचारी यूनियन के ऑफिस पहुंची। जहां से नाराज यूनियन पदाधिकारी, सचिव एससी वर्मा के पास उसको लेकर गये।

एससी वर्मा ने जब संबंधित बाबू को फटकार लगाई तब जाकर महिला को जैसे-तैसे 10 हजार रुपये का भुगतान किया जा सका। महिला लगभग डेढ़ बजे एलडीए से अपने घर रवाना हुई जहां से पति के अंतिम संस्कार की व्यवस्था की जा सकी।

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