UP: हड़ताल पर मुलायम का बेतुका बयान
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सपा सुप्रीमो ने यूपी में चल रही जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल पर बेतुका बयान दे डाला है। उन्होंने एक पत्रकार के सवाल के जवाब में उल्टा पूछ डाला कि तुम्हारे परिवार से कौन मरा है?
मुलायम ने पहले तो कहा कि कौन मर रहा है? फिर बोले, डॉक्टरों की हड़ताल को क्यों इतना महत्व दिया जा रहा है। फिर उन्होंने यहां तक कह डाला कि अगर आप लोग सही छापें, तो मौतें कम हो जाएंगी।
उधर, कानपुर में जूनियर डॉक्टरों ने काम पर लौटने का एलान कर दिया है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वे काम पर जरूर लौट रहे हैं लेकिन भूख हड़ताल पर रहेंगे।
मुलायम ने किया वादा, मांग होगी पूरी
बुधवार रात दो बजे खबर आई कि 69 मरीजों की मौत के बाद आखिरकार जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल खत्म कर दी।
लखनऊ से वार्ता कर देर रात कानपुर पहुंचे आईएमए एक्शन कमेटी के चेयरमैन डॉ. देवेंद्र लाल चंदानी ने मेडिकल कालेज एलटी-थ्री में आयोजित जनरल बाडी की मीटिंग में बताया कि सपा सुप्रीमों मुलायम सिंह ने मुलाकात में मांगें मानने की बात कही।
यह भी कहा कि वे छात्रों के भविष्य के बारे में चिंतित हैं। इससे पहले सरकार ने हड़ताली डाक्टरों पर एस्मा लगा दिया था और हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने भी सख्ती दिखाते हुए डॉक्टरों को काम पर लौटने का निर्देश दिया है।
डॉक्टरों का कहना था कि वे सपा विधायक इरफान सोलंकी के खिलाफ कार्रवाई और एसएसपी कानपुर यशस्वी यादव के निलंबन होने पर ही हड़ताल वापस लेंगे। हालांकि, कानपुर और लखनऊ में अब भी हड़ताल खत्म नहीं हुई है।
हाईकोर्ट ने भी दिया था अल्टीमेटम
कानपुर में जूनियर डॉक्टर्स और सपा विधायक इरफान सोलंकी के बीच मारपीट के बाद डॉक्टर्स की हड़ताल के मामले में हाईकोर्ट ने दखल दिया था।
पांच दिन से चल रही डॉक्टर्स की हड़ताल पर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने स्वत: संज्ञान लेते हुए डॉक्टर्स को तत्काल प्रभाव से काम पर लौटने की हिदायत दी।
इसके अलावा बेंच ने राज्य सरकार को इस पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने का निर्देश भी दिया।
गौरतलब है कि सीएम अखिलेश यादव ने भी कन्नौज में शिलान्यास समारोह में कहा था कि घटना की न्यायिक जांच कराई जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
सिर्फ अपील कर रही सरकार
हड़ताल रोकने के लिए सरकार पिछले पांच दिनों से कोई ठोस कदम नहीं उठा रही थी। सरकार सिर्फ अपील कर रही थी कि डॉक्टर हड़ताल वापस ले लें।
स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन ने मंगलवार को कहा कि जो लोग बगैर इलाज के मर रहे हैं उसके लिए दोषी कौन है? यह मेडिकल एथिक्स के खिलाफ है।
वहीं प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा बीएस भुल्लर ने कहा कि इस घटना में आम जनता का कसूर नहीं है फिर उन्हें क्यों पीड़ित किया जा रहा है।
सीएम अखिलेश यादव ने भी मंगलवार को डॉक्टर्स से काम पर लौटने की अपील की थी।
उन्होंने कहा था कि किसी की जिंदगी दोबारा नहीं आती है, इसलिए डॉक्टर्स को काम पर लौट आना चाहिए। हालांकि उनकी यह अपील बेअसर रही।
अब तक 55 मौतें
पांच दिनों से चल रही यह बेमियादी हड़ताल मरीजों की जान पर बन आई है। डॉक्टर्स क्रिटिकल मरीजों को भी भर्ती नहीं कर रहे हैं। यहां तक कि भर्ती हुए मरीजों को डिस्चार्ज कराने की बात कर रहे हैं।
पहले से डेट पा चुके मरीजों के ऑपरेशन तक अनिश्चितकाल के लिए टाल दिए गए हैं। ऐसे में मरीज प्राइवेट अस्पतालों की ओर रुख करने लगे हैं।
इलाज के अभाव में मंगलवार को लखनऊ में 4, कानपुर में 7, आगरा और मेरठ में दो-दो मरीजों की मौत हो गई। बीते पांच दिनों में हड़ताल की वजह से 55 लोग दम तोड़ चुके हैं।
कई जिलों में दिख रहा असर
डॉक्टर्स की इस हड़ताल का असर कानपुर और लखनऊ में ही नहीं बल्कि गोरखपुर, आगरा, इटावा, इलाहाबाद, मेरठ, वाराणसी, अलीगढ़, गाजियाबाद सहित कई और जिलों में भी पड़ रहा है।
जो मरीज आ रहे हैं, उनके साथ डॉक्टर्स बर्बरता से पेश आ रहे हैं। कई जगह तो मरीजों को धक्के मारकर बाहर निकाला जा रहा है।
28 फरवरी को सपा विधायक इरफान सोलंकी व जूनियर डॉक्टरों के बीच मारपीट के बाद पुलिसिया कार्रवाई से नाराज जूनियर डॉक्टरों ने चिकित्सा सेवाएं ठप कर रखी हैं।
इस मामले में 24 जूनियर डॉक्टरों को जेल भेजे जाने से गुस्साए प्रदेश के कई मेडिकल कॉलेजों के जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर चले गए।
डॉक्टरों की ये मांगें
उधर, हड़ताल कर रहे जूनियर डॉक्टरों की मांग है कि मारपीट करने वाले सपा विधायक इरफान सिंह सोलंकी पर कार्रवाई और कानपुर एसएसपी यशस्वी यादव को हटाया जाए।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोमवार को कहा था कि वीडियो फुटेज देखकर कार्रवाई हो। लेकिन, अभी तक किसी तरह का कोई एक्शन नहीं लिया गया है।
आगरा मेडिकल कॉलेज 200 जूनियर डॉक्टरों ने कानपुर की घटना के विरोध में इस्तीफा भी दिया।