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डफरिन अस्पताल में खून के अभाव में गर्भवती की मौत
मनीष कुमार सिंह/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sun, 04 May 2014 03:39 AM IST
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डफरिन अस्पताल में गंभीर हालत में आई गर्भवती ने खून के अभाव में दम तोड़ दिया। प्रसव पीड़ा के बाद परिवारीजन गर्भवती को लेकर सीएचसी पहुंचे तो डॉक्टरों ने हालत गंभीर बताकर डफरिन रेफर कर दिया।
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अस्पताल पहुंचने के बाद गर्भवती की हालत देख ऑपरेशन से पहले खून की व्यवस्था करने की बात कही, लेकिन देर तक खून की व्यवस्था न होने के चलते गर्भवती ने दम तोड़ दिया।
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गोसाईंगंज, प्रेम खेड़ा के रहने वाले रामफेर की पत्नी कमलेश (29) को प्रसव पीड़ा के बाद परिवारीजन शनिवार सुबह करीब तीन बजे गोर्साइंगंज सीएचसी लेकर पहुंचे।
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रामफेर ने बताया कि ऑपरेशन की कोई व्यवस्था न होने के चलते कमलेश को इलाज नहीं मिल सका। सीएचसी के डॉक्टर दर्द कम करने के लिए दवा देते रहे, लेकिन कुछ फर्क नहीं पड़ा।
डॉक्टरों ने गर्भवती को डफरिन अस्पताल रेफर कर दिया। सुबह सात बजे जब गर्भवती को लेकर डफरिन अस्पताल पहुंचे तो इमरजेंसी में मौजूद डॉक्टर ने खून की कमी बताकर जल्द से जल्द खून की व्यवस्था करने की बात कही।
आनन-फानन में परिवारीजन बलरामपुर अस्पताल के ब्लड बैंक पहुंचे तो कर्मचारियों ने बिना डोनर खून देने से मना कर दिया।
इसके बाद परिवारीजन वापस अस्पताल पहुंचे और पूरी परेशानी डॉक्टर को बताई।
इस दौरान कमलेश अस्पताल के लेबर रूम में खून के इंतजार में प्रसव पीड़ा से तड़पती रही और ग्यारह बजे उसकी सांसें थम गईं।
परिवारीजनों का आरोप था कि अगर अस्पताल के प्रशासनिक अधिकारियों ने समय रहते खून की व्यवस्था करवा देते और ऑपरेशन शुरू हो जाता तो कमलेश की जान बच सकती थी।
महिला अस्पतालों में आए दिन खून के अभाव में गर्भवती महिलाओं के ऑपरेशन टालने पड़ते हैं। सरकारी महिला अस्पतालों में ब्लड बैंक की व्यवस्था नहीं है।
हालत गंभीर होने पर परिवारीजन जब ब्लड बैंक जाते हैं तो इमरजेंसी के बाद भी उनसे डोनर की मांग की जाती है, जिसकी प्रक्रिया पूरी करने में घंटो लग जाते हैं और इस दौरान गर्भवती की जान सांसत में पड़ी रहती है।
महिला अस्पतालों में अगर मरीज इमरजेंसी में पहुंच जाए और उसे ऑपरेशन से पहले खून की जरूरत पड़ जाए तो ब्लड बैंक के चक्कर काटना उसकी मजबूरी है।
कभी खून का टोटा तो कभी डोनर के अभाव में खून नहीं मिलता है।
खून की व्यवस्था करने के लिए गर्भवती महिला के परिवारीजनों को सिविल, बलरामपुर, लोहिया और केजीएमयू के ब्लड बैंक का चक्कर लगाना पड़ता है, लेकिन समय पर खून नहीं मिल पाता है।
महिला अस्पतालों में गर्भवती महिला की जान जब सांसत में पड़ती है और उसे खून की जरूरत पड़ती है तो किसी अस्पताल में कोई विशेष व्यवस्था नहीं है।
सामान्य मरीजों की भीड़ में गर्भवती के परिवारीजन भी खड़े होते हैं या फिर डोनर की व्यवस्था करने में उनका समय निकल जाता है।
चिकित्सकों का कहना है कि गर्भवती महिलाओं को ब्लड बैंक से आसानी से खून मिल जाए इसके लिए कोई दूसरी व्यवस्था होनी चाहिए।
प्रसव के बाद भी डोनर बुलाकर रक्तदान कराया जा सकता है, लेकिन ऐसी व्यवस्था नहीं है।