72,825 शिक्षक भर्तीः फिर अधूरा रहा अखिलेश का वादा
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वादे दिए जाते रहे, टूटते रहे और नौकरी का इंतजार कर रहे युवा साल दर साल अपनी उम्र बढ़ते देखते रहे। किसी की शादी रुकी, किसी की टूट गई। कभी सरकारी कामकाज की पेचीदगी तो कभी कोर्ट के चक्कर में ये भर्ती अटकी रही।
कई बार शिक्षक अपने हक की लड़ाई के लिए सड़कों पर उतर आए। उन्हें आश्वासन तो बाद में दिया गया, पहले उन पर बेहिसाब लाठियां भाजीं गईं। इसका खामियाजा राजधानी ने भुगता जब शिक्षकों के गुस्से का शिकार शहर की बसें, लोग और राजकीय संपत्ति बनी।
बार-बार फॉर्म भरने में न जाने कितने करोड़ रुपये सरकार के खाते में पहुंचे, लेकिन इस दौरान शायद ही कभी उन युवाओं की सुध ली गई जिनकी जिंदगी का मकसद ही ये नौकरी बन चुकी थी।
अब उनकी उम्मीद चार साल की जद्दोजहद के बाद साल 2015 में दाखिल हो गई है। इस खास खबर में आगे पढ़िए, कब-क्या-कैसे हुआ और आखिर कब निकलेगा इस भर्ती प्रक्रिया का नतीजा।
युवाओं ने छोड़ दी है उम्मीद
सुप्रीम कोर्ट ने प्राइमरी स्कूलों में चल रही 72,825 प्रशिक्षु शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया छह सप्ताह के अंदर पूरी करने का आदेश राज्य सरकार को दिया है।
अगर इस आदेश का पालन हो जाता है तो प्रशिक्षु शिक्षकों की नियुक्ति हर हाल में 31 जनवरी तक कर ली जाएगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर राज्य सरकार नियुक्ति पत्र देने की प्रक्रिया जल्द शुरू करने जा रही है।
नियुक्ति पत्र मिलने के एक हफ्ते के अंदर ज्वाइन करना होगा। इसके लिए संबंधित जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में मूल प्रमाणपत्रों को जमा करना होगा।
लंबे समय से नियुक्ति का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों को अभी भी भरोसा नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का समय रहते पालन हो पाएगा। हाथ में ज्वाइनिंग लेटर उनके लिए सपना बनकर रह गया है।
अभ्यर्थियों ने तनाव झेला, प्रदर्शन किया, लाठियां खाईं, गुरुवार को लखनऊ में नौकरी न मिलने के तनाव से एक टीईटी पास युवती ने खुदकुशी तक कर ली। यहां हैं इस उलझाऊ भर्ती प्रक्रिया के रास्ते में आई रुकावटों की एक झलक...
14 अगस्त 2014 तक पूरी होनी थी प्रक्रिया
नवंबर 2011 में टीईटी परीक्षा आयोजित होने के बाद से ही प्रक्रिया में कई दिक्कतें आईं। पहले तो सरकार बदली, फिर प्रशासकीय स्तर पर लापरवाही के कारण भर्ती प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट द्वारा 14 अगस्त तक दी गई समय सीमा में पूरी न हो सकी।
परिषदीय विद्यालयों में खाली 72,825 अध्यापकों के पदों को भरने के लिए सरकार ने 2011 में विज्ञापन जारी किया था।
इन पदों को भरने के लिए टीईटी की मेरिट के आधार पर भर्ती की घोषणा की गई थी। टीईटी की मेरिट से भर्ती करने के विरोध एवं शैक्षिक मेरिट से भर्ती की मांग को लेकर लंबी जंग छिड़ी रही।
इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला आया कि टीईटी मेरिट के आधार पर ही भर्ती होगी, लेकिन राज्य सरकार इस मामले को सुप्रीम कोर्ट लेकर चली गई है।
सरकार शैक्षिक मेरिट पर भर्ती करना चाहती थी। इस बीच टीईटी मेरिट के आधार पर चयन चाह रहे अभ्यर्थी भी कैबिनेट में अपनी सुनवाई की बात रखी। काफी जद्दोजहद के बाद टीईटी मेरिट के आधार पर काउंसिलिंग जुलाई 2014 में शुरू की गई।
पहले चरण में रही पसोपेश
पहले चरण की काउंसलिंग प्रक्रिया 31 अगस्त को पूरी हुई। मेरिट में आने वालों की काउंसलिंग के बाद उनके मूल प्रमाणपत्र जमा करा लिए गए। फिर दूसरी काउंसलिंग में उनका नाम हटा दिया गया।
ऐसे अभ्यर्थी डायटों पर पता करने गए कि उनका चयन हो गया है या नहीं। डायटों पर सूची न देखकर अभ्यर्थियों को भारी दिक्कतें आईं।
वहीं मेरिट को लेकर भी हायतौबा मच रही। अभ्यर्थियों ने ने राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) पर जमकर हंगामा किया।
उनका आरोप था कि मेरिट जारी कर समय से प्रत्यावेदनों पर विचार नहीं किया। यही नहीं, शिक्षा मित्रों को 83 अंक होने पर भी काउंसलिंग के लिए बुला लिया गया।
टीईटी में सामान्य वर्ग को 90 और आरक्षित वर्ग को 83 अंक पर पास माना गया था जबकि दूसरे कटऑफ में शिक्षा मित्रों की मेरिट 83 गई थी। इन सब पेंचों में भी प्रक्रिया उलझी रही।
दिसंबर 2014 में फिर आया नया आदेश
दिसंबर 2014 में टीईटी में 70 फीसदी पाने वाले सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों और 65 फीसदी पाने वाले आरक्षित वर्ग को सुप्रीम कोर्ट ने पात्र मानते हुए भर्ती करने का आदेश राज्य सरकार को दिया गया।
टीईटी 150 अंक की है। इस हिसाब से देखा जाए तो सामान्य वर्ग का 105 अंक और आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी 97.5 अंक पर प्रशिक्षक शिक्षक बनने के लिए पात्र होंगे।
जबकि तीसरे चरण में महिला कला सामान्य वर्ग की सबसे कम मेरिट 103, महिला कला एससी की 83 , पुरुष कला सामान्य की 113 व पुरुष कला एससी की 100 अंक गई थी।
आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को एक बार फिर फटकार लगाई और शिक्षकों की नियुक्ति हर हाल में 31 जनवरी तक हर हाल में नियुक्ति करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि काउंसिलिंग, भर्ती और नियुक्ति को लेकर अभ्यर्थियों के मन में अभी भी कई सवाल हैं।