लेखपालों को दोहरा फायदा, यूपी कैबिनेट के इन फैसलों पर भी डालें नजर
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यूपी सरकार ने राजस्व महकमे के लेखपालों को दोहरी सौगात दी है। प्रदेश कैबिनेट ने शुक्रवार को लेखपालों को लैपटॉप-डेटाकार्ड तथा स्मार्टफोन देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इससे लेखपाल ई-गवर्नेंस से जुड़ जाएंगे।
इन्हें लैपटॉप व डेटाकार्ड इसी साल से मिलने शुरू हो जाएंगे, जबिक स्मार्टफोन अगले वित्त वर्ष में बजट की व्यवस्था के बाद मिल पाएगा।
सूबे में करीब 31 हजार लेखपाल हैं। इन सभी को लैपटॉप देने के लिए 2016-17 के बजट में 20 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। कैबिनेट ने कहा है कि 20 करोड़ की सीमा तक लैपटॉप व डेटा कार्ड खरीदने की कार्यवाही तत्काल कर ली जाए। बाकी लैपटॉप व डेटाकार्ड की खरीद बजट की व्यवस्था होने पर की जाएगी।
लैपटॉप खरीदने तथा जिलों में कार्यरत लेखपालों की संख्या के अनुपात में इनके आवंटन का काम राजस्व परिषद करेगी। जिलाधिकारी वरिष्ठता के आधार पर लेखपालों को लैपटॉप उपलब्ध कराएंगे।
कैबिनेट ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए सभी लेखपालों को स्मार्टफोन देने के प्रस्ताव को भी सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। स्मार्टफोन के लिए पैसे की व्यवस्था 2017-18 के बजट में की जाएगी। इसमें केंद्र व राज्य सरकार आधा-आधा खर्च उठाएंगी।
प्रमुख सचिव राजस्व अरविंद कुमार ने बताया कि लेखपालों को आईटी तकनीक से जोड़ने में स्मार्टफोन व लैपटॉप अहम भूमिका निभाएंगे। इससे उनके काम में गुणवत्ता बढ़ेगी। काम समय से होंगे और पारदर्शिता आएगी।
सूबे में छह नई तहसीलें, चार को कैबिनेट ने दी दोबारा मंजूरी
सरकार ने सूबे के पांच जिलों में छह नई तहसीलें बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इनमें चार तहसीलों के लिए कैबिनेट से दोबारा मंजूरी लेनी पड़ी है।
ये तहसीलें जिन नामों से गठित की गई हैं, वहीं उनका मुख्यालय भी होगा। कैबिनेट ने लेखपाल क्षेत्र की संख्या के लिए निर्धारित मानक में छूट देकर इन्हें नई तहसील बनाने को हरी झंडी दी है।
शासन ने पिछले दिनों पीलीभीत जिले में कलीनगर व अमरिया, कन्नौज में हसेरन व चंदौली में नौगढ़ नाम से नई तहसील सृजित करने का फैसला किया था। इसकी अधिसूचना जारी होने से पहले ही सूबे में नई राजस्व संहिता लागू हो गई।
ऐसे में न्याय विभाग ने नई संहिता के हिसाब से प्रक्रिया पूरी किए बिना अधिसूचना जारी न करने की सलाह दी। इसके बाद राजस्व महकमे ने नई राजस्व संहिता के हिसाब से नए सिरे से प्रक्रिया पूरी कर इन तहसीलों के सृजन का प्रस्ताव कैबिनेट को भेजा था, जिसे शुक्रवार को मंजूरी मिल गई।
25 रुपये बढ़ा गन्ना मूल्य, एकमुश्त मिलेगा भुगतान
प्रदेश सरकार ने पेराई सत्र 2016-17 के लिए गन्ना मूल्य में 25 रुपये की बढ़ोतरी की है। किसानों को गन्ना मूल्य का भुगतान एकमुश्त मिलेगा। पिछले चार सालों में यह पहला मौका है जब गन्ना मूल्य बढ़ाया गया है। गन्ना मूल्य निर्धारण के प्रस्ताव पर कैबिनेट की बैठक में मुहर लग गई।
पिछले साल अस्वीकृत, सामान्य और अगेती प्रजाति का गन्ना मूल्य क्रमश: 275, 280 और 290 रुपये क्विंटल था। चालू पेराई सत्र के लिए इसे क्रमश: 300, 305 और 315 रुपये किया गया है।
सपा सरकार ने सत्ता में आने के बाद गन्ना मूल्य में 40 रुपये की वृद्धि की थी और अब आखिरी साल में 25 रुपये रेट बढ़ाया गया है। बीच के तीन सालों में गन्ना मूल्य यथावत रखा गया।
पिछले दो सालों में दो किस्तों में गन्ना मूल्य भुगतान का प्रावधान कर दिया गया था। इस बार इसे खत्म कर दिया गया है। अब किसानों को पूर्व की भांति गन्ना मूल्य का एकमुश्त भुगतान मिलेगा।
प्रधानों का मानदेय के साथ अधिकार भी बढ़ा
विधानसभा चुनाव से पहले सूबे के 59 हजार से ज्यादा ग्राम प्रधानों को कई बड़े तोहफे मिले। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने प्रधानों के मानदेय तथा अधिकारों में बढ़ोतरी के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। राष्ट्रीय पंचायतीराज ग्राम प्रधान संगठन लंबे अर्से से अधिकार व मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहा था।
पंचायतीराज मंत्री राम गोविंद चौधरी ने पिछले दिनों संगठन के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश शर्मा के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल को कई मांगें माने जाने का आश्वासन दिया था। कैबिनेट ने ग्राम प्रधानों के मानदेय में 40 प्रतिशत वृद्धि करते हुए 2,500 से बढ़ाकर 3,500 रुपये कर दिया गया है।
मनरेगा की तरह केंद्रीय व राज्य वित्त आयोग के तहत लिए गए निर्णय के अनुसार दो लाख रुपये तक के कार्यों की प्रशासनिक, तकनीकी व वित्तीय स्वीकृति का अधिकार ग्रामसभा को सौंपा गया है। पहले यह सीमा 50 हजार रुपये थी। वार्षिक कार्ययोजना की स्वीकृति अब पूरी तरह से ग्रामसभा की खुली बैठक में दी जाएगी।
प्रधानों को यात्रा व अन्य आवश्यक खर्च के लिए अब तक पांच हजार रुपये मिलते थे। इसे अधिकतम 15 हजार कर दिया है। ग्राम प्रधान आकस्मिक खर्च के लिए अब पांच हजार रुपये अपने पास रख सकेंगे।
हालांकि कैबिनेट ने यह साफ कर दिया है कि विभिन्न मदों में वृद्धि इस शर्त के तहत मंजूर की गई है कि इन पर खर्च होने वाली रकम ग्राम पंचायतें अपनी ग्राम निधि में जमा राशि (इसमें राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों के आधार पर पंचायतों को दी जाने वाली राशि भी है) में से वहन करेंगी। इसके लिए उन्हें अलग से बजट आवंटित नहीं होगा।
36 जिलों में चलेंगी 170 मोबाइल मेडिकल यूनिट
सूबे के 36 जिलों में 170 नेशनल मोबाइल मेडिकल यूनिटों का पीपीपी मोड पर संचालन किया जाएगा। कैबिनेट ने इसके ‘कोरिजेंडम टू आरएफपी’ को अनुमोदित कर दिया है। साथ ही अन्य निर्णय व जरूरी कार्यवाही पर आगे निर्णय लेने के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत कर दिया गया है।
मोबाइल मेडिकल यूनिटों पर आने वाला खर्च राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मद से किया जाएगा। नेशनल मोबाइल मेडिकल यूनिट के तहत प्रत्येक यूनिट में दो वाहन होंगे। इसमें एक वाहन चिकित्सीय उपकरण कार्य के लिए तथा दूसरा वाहन स्टाफ के लिए होगा।
मोबाइल मेडिकल यूनिट में डॉक्टर, फार्मासिस्ट, नर्स, लैब टेक्नीशियन उपलब्ध रहेंगे। यह दूरदराज के इलाकों में जनता की मांग पर प्राथमिक उपचार करेंगी। इसमें बेसिक लैब टेस्ट, टीकाकरण तथा दवाइयां मुहैया कराई जाएंगी।
इस सेवा से प्रतिदिन 10 हजार से अधिक रोगियों का उपचार किया जाएगा। यानी साल में लगभग 30 लाख रोगियों को इसका लाभ मिल सकेगा। प्रति यूनिट सात स्टाफ की तैनाती की जाएगी। इस प्रकार लगभग 1200 लोगों को रोजगार मिलेगा।
भूमि अधिग्रहण पर भू-स्वामी को 90 दिन में ई-पेमेंट
सूबे में अधिगृहीत भूमि के बदले दी जाने वाली रकम का भुगतान भू-स्वामियों को 90 दिन में ई-पेमेंट के जरिए किया जाएगा।
प्रदेश कैबिनेट ने भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापना में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार यूपी नियमावली-2016 को मंजूरी दे दी है। इससे केंद्र सरकार के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत सूबे में भूमि अधिग्रहण और उससे जुड़े विवादों का निपटारा किया जा सकेगा।
केंद्र सरकार ने भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापना में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम लागू किया है। इसमें ग्रामीण क्षेत्र में चार गुना और शहरी क्षेत्र में दोगुना मुआवजा देने का प्रावधान है।
इस अधिनियम की धारा-109 में एक्ट को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए नियमावली बनाने की शक्ति राज्य सरकार को दी गई है।
प्रदेश सरकार ने इस नियमावली के लिए आम लोगों से आपत्तियां व सुझाव मांगे थे। इसके बाद इसे 11 अध्याय, 43 नियम और 31 प्रारूपों में तैयार किया गया था। कैबिनेट ने इस नियमावली को मंजूरी दे दी है।
सैफई में संगीत महाविद्यालय के लिए दी जाएगी निशुल्क भूमि
सैफई (इटावा) में संगीत महाविद्यालय की स्थापना के लिए संस्कृति विभाग को निशुल्क भूमि हस्तांतरित किए जाने के प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी।
सैफई में अमिताभ बच्चन इंटर कॉलेज के आवासों की भूमि संगीत महाविद्यालय के लिए संस्कृति विभाग को निशुल्क हस्तांतरित की जाएगी। उप जिलाधिकारी सैफई की रिपोर्ट के अनुसार इस जमीन पर विद्यालय के शिक्षकों एवं कर्मचारियों के आवास हैं।
ये शिक्षा विभाग के उपयोग में नहीं आ रहे हैं। राजस्व दस्तावेजों में 0.8100 हेक्टेयर भूमि पुलिस विभाग के नाम अंकित है। गृह विभाग की अनापत्ति के बाद इसमें से 5000 वर्गमीटर भूमि संस्कृति विभाग को हस्तांतरित करने का फैसला लिया गया है।
फोर लेन में बनेगा लायन सफारी तक जाने वाला सोनवरा बाईपास
राज्य सरकार ने कानपुर से इटावा के लायन सफारी तक पहुंचने के लिए जनता को फोर लेन की सुविधा देने का फैसला किया है। इससे संबंधित प्रस्ताव को कैबिनेट की हरी झंडी मिल गई है।
प्रस्ताव के मुताबिक फोर लेन में बनने वाली बाईपास सड़क का निर्माण सीमेंटेड होगा।
इस मार्ग को फोर लेन में तब्दील करने के लिए ‘पैसेंजर कार यूनिट’ (पीसीयू) के लिए निर्धारत मानक को शिथिल करने के प्रस्ताव को भी कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।
7.20 किमी. की लंबाई में बनने वाली इस सड़क के निर्माण पर करीब 102 करोड़ रुखर्च होने का अनुमान है। सरकार का मानना है कि इस मार्ग का चौड़ीकरण हो जाने से इटावा में पर्यटन विकास और औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
अलीगढ़-टप्पल-पलवल मार्ग को फोर लेन करने को मंजूरी
राज्य सरकार ने यूपी को हरियाणा से जोड़ने वाले अलीगढ़-टप्पल-पलवल मार्ग को फोर लेन करने और जट्टारी-खैर को जोड़ने वाले करीब 67.50 किमी. लंबी सड़क के निर्माण का फैसला किया है।
दोनों प्रस्तावों को कैबिनेट से मंजूरी मिल गई है। इस सड़क के निर्माण पर 200 करोड़ से अधिक धन खर्च होने का अनुमान है। जबकि अलीगढ़-टप्पल-पलवल मार्ग को फोर लेन में तब्दील करने पर 552 करोड़ 28 लाख रुपये खर्च होने का स्टीमेट तैयार किया गया है।
दरअसल यूपी के अलीगढ़ को पलवल केजरिए हरियाणा को जोड़ने वाली यह सड़क अभी दो लेन की है। इस मार्ग पर आवागमन का दबाव लागातार बढ़ता जा रहा है। इस वजह से अक्सर लोगों को जाम की समस्या का सामना करना पड़ता है। इसको देखते हुए सरकार ने इसे फोर लेन करने जा रही है।