फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Important decisions of UP cabinet: Transfer policy approved, up to 30 officers and employees will be transferred

यूपी कैबिनेट के महत्वपूर्ण फैसले : अब जमीन दान देने वालों के नाम से अस्पतालों का हो सकेगा नामकरण

Wed, 15 Jun 2022 07:27 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Wed, 15 Jun 2022 07:27 PM IST
सार

कैबिनेट ने पीलीभीत बाघ संरक्षण फाउंडेशन का गठन किए जाने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। परिवार के सदस्यों के बीच अचल संपत्ति का बंटवारा अब आसान होगा। प्रदेश सरकार के विभिन्न विभागों में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले 30 जून तक किए जाएंगे। तबादला नीति के तहत एक ही जिले में 3 वर्ष और मंडल में 7 वर्ष पूरे करने वाले समूह क और ख के अधिकारियों के तबादले किए जाएंगे।

विज्ञापन
Important decisions of UP cabinet: Transfer policy approved, up to 30 officers and employees will be transferred
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। - फोटो : amar ujala

विस्तार

प्रदेश सरकार के विभिन्न विभागों में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले 30 जून तक किए जाएंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में स्थानांतरण सत्र-2022-23 के लिए तबादला नीति को मंजूरी दी गई। समूह ख और ग के कार्मिकों का तबादला यथासंभव मेरिट बेस्ड ऑनलाइन ट्रांसफर सिस्टम के आधार पर किया जाएगा।

विज्ञापन


प्रदेश सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि तबादला नीति के तहत एक ही जिले में 3 वर्ष और मंडल में 7 वर्ष पूरे करने वाले समूह क और ख के अधिकारियों के तबादले किए जाएंगे। समूह क और ख के तबादले संवर्गवार कार्यरत अधिकारियों व कर्मचारियों की संख्या के सापेक्ष अधिकतम 20 प्रतिशत और समूह ग व घ के संवर्गवार कार्मिकों के तबादले अधिकतम 10 प्रतिशत की सीमा तक किए जा सकेंगे। उन्होंने बताया कि समूह ग के कार्मिकों के पटल परिवर्तन और क्षेत्र परिवर्तन को लेकर 13 मई, 2022 को जारी आदेश का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।
विज्ञापन


रिक्त पदों को भरा जाएगा
बुंदेलखंड के सभी जिलों में रिक्त पदों पर तैनाती की जाएगी। इसी प्रकार तबादला नीति के जरिए भारत सरकार की ओर से घोषित आकांक्षी जिले सोनभद्र, बहराइच, श्रावस्ती, फतेहपुर, चित्रकूट, चंदौली और सिद्धार्थनगर में भी रिक्त पदों को भरा जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

 

अब जमीन दान देने वालों के नाम से अस्पतालों का हो सकेगा नामकरण

स्वास्थ्य विभाग अब आबादी क्षेत्र में जमीन खरीद कर नया अस्पताल बना सकेगा। यदि कोई व्यक्ति अपनी जमीन अस्पताल के लिए दान करता है तो संबंधित अस्पताल का नामकरण उसके या उसके परिजन के नाम पर किया जा सकेगा। इस संबंध में नई नियमावली बनाई गई है। इस नियमावली को मंगलवार को कैबिनेट बैठक में मंजूरी दे दी गई है।

प्रदेश में अब तक सरकारी अस्पतालों का निर्माण ग्राम समाज अथवा अन्य सरकारी जमीन पर किया जाता है। यह जमीन आबादी क्षेत्र से काफी दूर होती है। ऐसे में यहां चिकित्सक व चिकित्साकर्मी रहने से कतराते हैं। सुनसान इलाके में अस्पताल होने से उनकी सुरक्षा भी प्रभावित होती है। स्वास्थ्य विभाग के सर्वे में यह बात सामने आई कि यदि आबादी क्षेत्र में अस्पताल रहे तो उसके रखरखाव व सुरक्षा की बेहतर व्यवस्था हो सकेगी और स्टॉफ भी रुकने से परहेज नहीं करेगा। इसके मद्देनजर स्वस्थ्य विभाग ने अस्पताल निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण एवं क्रय किए जाने के संबंध में नई नियमावली तैयार की है। इस नियमावली के तहत आबादी क्षेत्र में अब स्वास्थ्य विभाग जमीन खरीद कर अस्पताल बनवा सकेगा।

इसी तरह यह भी विकल्प दिया गया है कि यदि कोई व्यक्ति आबादी क्षेत्र की जमीन दान में देता है तो संबंधित अस्पताल का नामकरण उसके या उसके परिजन के नाम से किया जा सकेगा। भू स्वामी अस्पताल के लिए आबादी क्षेत्र की जमीन दान करके उतनी ही सरकारी जमीन दूर दराज हासिल भी कर सकता है। नई नियमावली में यह भी व्यवस्था की गई है कि नए अस्पताल का निर्माण कराते वक्त यह देखा जाएगा कि संबंधित क्षेत्र के एक किलोमीटर के दायरे में पहले से कोई सरकारी अस्पताल न हो। इसी तरह सामुदायिक एवं जिला अस्पताल से भी दूरी के मानक तय किए गए हैं।

प्रयोगशाला सहायक (ग्राम्य) सेवा नियमावली में बदलाव

प्रदेश में प्रयोगशाला सहायक (ग्राम्य) सेवा नियमावली द्वितीय संशोधन को भी कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। इसके तहत अब अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से चयनित होने के बाद ही प्रशिक्षण दिया जाएगा। अब तक इंटरमीडिएट पास होने वालों को छह माह का प्रशिक्षण देकर पीएचसी पर प्रयोगशाला सहायक के रूप में तैनात कर दिया जाता था। लेकिन अब इस पद पर नई भर्ती नहीं हो रही है। लैब टेक्नीशियन के लिए दो साल का प्रशिक्षण दिया जाता है। ऐसे में अब लैब टेक्नीशियन का चयन आयोग से होने के बाद ही प्रशिक्षण दिया जाएगा।

पुराने भवन होंगे ध्वस्त
चंदौली में निर्माणधीन राजकीय मेडिकल कॉलेज से संबद्ध पंडित कमलापति त्रिपाठी जिला संयुक्त चिकित्साल परिसर के 13 भवनों में 12 ध्वस्त किए जाएंगे। इनके स्थान पर नए भवन बनाए जाएंगे। कैबिनेट ने इससे प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

पीलीभीत बाघ संरक्षण फाउंडेशन के गठन को हरी झंडी, भारत सरकार से पहले ही ली जा चुकी है अनुमति

कैबिनेट ने पीलीभीत बाघ संरक्षण फाउंडेशन का गठन किए जाने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। वहीं फाउंडेशन के संबंध में अन्य निर्णय लेने के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत कर दिया है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम-1972 (यथा संशोधित 2006) की धारा-38 (ग) में निहित प्रावधानों के अंतर्गत पीलीभीत टाइगर रिजर्व फाउंडेशन का संगम ज्ञापन और पीलीभीत बाघ संरक्षण फाउंडेशन, उप्र की नियमावली के अनुरूप यह निर्णय लिया गया है।

प्रदेश में जैव विविधता के संरक्षण व प्रबंधन के लिए बाघ संरक्षण फाउंडेशन स्थापित किया जाना जरूरी है। पीलीभीत बाघ संरक्षण फाउंडेशन का गठन भारत सरकार से प्राप्त पूर्वानुमति के आधार पर एक समिति के रूप में किया जा रहा है। इसका उद्देश्य स्वीकृत टाइगर कंजर्वेशन प्लान के अनुसार विभिन्न स्टेक होल्डर की सहभागिता से पीलीभीत टाइगर रिजर्व के प्रबंधन को बाघ एवं जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में सहयोग प्रदान करना होगा। समिति की गतिविधियां कार्यदायी संस्था संचालित करेगी। बाघ संरक्षण के लिए समिति के मुख्य उद्देश्य पीलीभीत टाइगर रिजर्व और निकटवर्ती भू-क्षेत्र में पारिस्थितिकीय, आर्थिक, सामाजिक व सांस्कृतिक विकास को प्रोत्साहित करना, पीलीभीत टाइगर रिजर्व व निकटवर्ती क्षेत्र के प्राकृतिक वातावरण को सुरक्षित रखने में सहयोग प्रदान करना है। ईको पर्यटन, ईको विकास, अनुसंधान, पर्यावरणीय शिक्षा, प्रशिक्षण, प्रबंधन और सलाह देने जैसे क्षेत्र में सहयोग करना होगा।

पीलीभीत बाघ संरक्षण फाउंडेशन प्रभारी मंत्री पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की अध्यक्षता में एक शासी निकाय करेगा। फाउंडेशन के रूटीन कार्य के प्रबंध को संचालित करने के लिए एक कार्यकारिणी समिति का गठन किया जाएगा। फाउंडेशन के कामकाज का संचालन पर्यटकों के प्रवेश व अन्य सेवाओं से प्राप्त शुल्क, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से प्रोजेक्ट विशेष को मिले धन से होगा।

व्यावसायिक वाहनों के बकाया कर में जुर्माने पर छूट, एकमुश्त शास्ति समाधान योजना को हरी झंडी

योगी कैबिनेट ने विभिन्न श्रेणी के व्यावसायिक वाहनों पर पुराने बकाया कर पर लगाए गए जुर्माने में शत-प्रतिशत छूट को मंजूरी दे दी है। इसके लिए ‘एकमुश्त शास्ति(जुर्माना) समाधान योजना- 2022’ लागू करने को हरी झंडी दी गई है। दरअसल, प्रदेश में निजी वाहनों से तो एकमुश्त टैक्स जमा कराया जाता है जबकि विभिन्न श्रेणी के व्यावसायिक वाहनों के लिए कर जमा कराने की अलग-अलग व्यवस्था है। ऐसे में काफी वाहनों पर इस समय कर बकाया है और उस पर जुर्माना भी लगा है। अब इस जुर्माने को माफ कर दिया गया है।

शामली, जानसठ और अमरोहा की बिजली व्यवस्था होगी मजबूत

कैबिनेट ने मंगलवार को 765 केवी उपकेंद्र मेरठ से संबंधित 400 केवी एवं 220 केवी लाइनों की पुनरीक्षित लागत के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इससे शामली, जानसठ और अमरोहा की बिजली व्यवस्था मजबूत होगी। इसके तहत 765 केवी उपकेंद्र मेरठ से संबंधित 400 केवी डबल सर्किट (डीसी) मेरठ शामली लाइन का निर्माण टैरिफ बेस्ड कंपटिटिव बिडिंग (टीबीसीबी) पद्धति पर कराया जाएगा। इस पर 164.53 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

इसके अलावा 220 केवी डीसी मेरठ-जानसठ लाइन एवं संबंधित ‘हाइब्रिड बे’ तथा 220 केवी डीसी मेरठ-अमरोहा लाइन एवं सबंधित ‘हाइब्रिड बे’ का निर्माण इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन पद्धति से कराने का फैसला किया गया है। इसकी कुल लागत 141.37 करोड़ रुपये अनुमानित है। इसके लिए 70 प्रतिशत राशि वित्तीय संस्थाओं से ऋण के रूप में ली जाएगी जबकि 30 प्रतिशत राशि की व्यवस्था राज्य सरकार करेगी। कार्यदायी संस्था के चयन बाद 18 माह में कार्य पूरा किया जाना प्रस्तावित है। इन लाइनों का निर्माण होने के बाद शामली, जानसठ तथा अमरोहा क्षेत्र में बिजली की बेहतर आपूर्ति हो सकेगी।
 

परिवार में संपत्ति बंटवारे पर सिर्फ पांच हजार का स्टांप शुल्क

परिवार के सदस्यों के बीच अचल संपत्ति का बंटवारा अब आसान होगा। इसके लिए दान विलेख पर स्टांप शुल्क में छूट दे दी गई है। संपत्ति चाहे कितनी भी कीमती क्यों ने हो, पारिवारिक बंटवारे पर केवल पांच हजार रुपये स्टांप शुल्क फिक्स कर दिया गया है। स्टांप एवं पंजीयन मंत्री रविंद्र जायसवाल ने बताया कि परिवार के सदस्यों के बीच संपत्ति बंटवारे की प्रक्रिया को सरल व निर्विवाद बनाने के लिए कैबिनेट में यह प्रस्ताव लाया गया है। सरकार का मानना है कि परिवार का मुखिया अपने जीवनकाल में ही भाई, पुत्री, बहन, पिता, बहू, पुत्र, पौत्री या आर्थिक व शारीरिक रूप से कमजोर सदस्यों को पारिवारिक संपत्ति दान करना या उसका बंटवारा चाहता है, लेकिन स्टांप शुल्क अधिक होने की वजह से रजिस्ट्री से परहेज करता है। स्टांप शुल्क से बचने के लिए संपत्ति के मालिक की ओर से परिवार के सदस्यों के नाम अक्सर वसीयत लिखी जाती है। लेकिन मुखिया के निधन के बाद वसीयत के अधिकांश मामलों में विवाद होता है। मंत्री के अनुसार अब ऐसे मामलों में कमी आएगी। साथ ही राजस्व प्राप्ति में वृद्घि होगी।

 

बीहड़ व बंजर जमीन का उपचार कर बनाया जाएगा कृषि योग्य

प्रदेश में बीहड़, बंजर और जल भराव वाले क्षेत्रों के सुधार एवं उपचार के लिए पं. दीनदयाल उपाध्याय किसान समृद्धि योजना के क्रियान्वयन का निर्णय लिया गया है। कैबिनेट की बैठक में इससे संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए योजना में 2,19,250 लाख हेक्टेयर भूमि को उपचारित करने का निर्णय लिया गया है। इस योजना का संचालन गौतमबुद्धनगर जिले को छोड़कर सभी 74 जिलों में प्रस्तावित है। योजना में किसी प्रकार के परिवर्तन, संशोधन के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत किया गया है। अपर मुख्य सचिव कृषि देवेश चतुर्वेदी ने बताया कि परियोजना क्षेत्र के चयन में उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी जहां लघु-सीमांत और एससी-एसटी किसानों एवं भू-आवंटी की अधिकता होगी। यह कार्य मनरेगा से प्रस्तावित है। परियोजना क्षेत्र में आवश्यकतानुसार कृषि वानिकी, उद्यानीकरण के साथ उपचारित क्षेत्र में 50 प्रतिशत अनुदान पर फसलोत्पादन कार्यक्रम भी चलाया जाएगा। वर्ष 2022-23 से वर्ष 2026-27 तक  संचालित इस योजना में 602.68 करोड़ रुपये का व्यय प्रस्तावित है।

इसलिए पड़ी जरूरत : प्रतिवर्ष लगभग 40 से 50 हजार हेक्टेयर कृषि उत्पादक भूमि बढ़ते शहरीकरण, औद्योगीकरण तथा एक्सप्रेसवे और हाईवे निर्माण के कारण गैर कृषि उपयोग में परिवर्तित हो रही है। बढ़ती जनसंख्या को खाद्यान्न उपलब्ध कराने के लिए कृषि उत्पादन व उत्पादकता में वृद्धि जरूरी है। इसलिए इस योजना की जरूरत पड़ी।

पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन में 220 करोड़ से होगा स्काडा का आधुनिकीकरण

यूपी पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन के 400 से लेकर 132 केवी तक के उपकेंद्रों पर संचार एवं डाटा प्रणाली को मजबूत करने के लिए सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डाटा एक्वीजीशन (स्काडा) सिस्टम का आधुनिकीकरण कराया जाएगा। इस पर 220 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके लिए आधी राशि केंद्र सरकार देगी। शेष राशि की व्यवस्था राज्य सरकार करेगी। ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन में रिलायबल कम्युनिकेशन एवं डाटा एक्वीजीशन सिस्टम की स्थापना संबंधी प्रस्ताव को मंगलवार को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी।

प्रदेश में ट्रांसमिशन की 6,686 किलोमीटर लंबी लाइनें हैं। ये लाइनें 765, 400, 220 और 132 केवी उपकेंद्रों से जुड़ी हैं। मौजूदा स्काडा सिस्टम काफी पुराना है। अब केंद्र सरकार की मदद से आधुनिक तकनीक का सिस्टम स्थापित करने का फैसला किया गया है। प्रमुख सचिव ऊर्जा एम. देवराज का कहना है कि अत्याधुनिक प्रणाली के स्थापित होने के बाद पूरे प्रदेश में ट्रांसमिशन उपकेंद्रों की संचार प्रणाली काफी मजबूत हो जाएगी। आंकड़ों के आदान-प्रदान में भी काफी सहूलियत होगी।

 

सेवानिवृत्त एसडीएम की पेंशन से होगी कटौती

करहल (मैनपुरी) के उप जिलाधिकारी रहे राम चंद्र यादव की दो साल तक 5 प्रतिशत पेंशन कटौती के प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के इस संबंध में भिन्न मत होने से यह प्रस्ताव कैबिनेट में लाया गया था। अब सेवानिवृत्त हो चुके राम चंद्र यादव ने अपनी तैनाती के दौरान एक बर्खास्त लेखपाल को हाईकोर्ट के आदेश के बाद बहाल कर दिया था। बहाल करने के लिए सरकार की पूर्व अनुमति नहीं ली थी। जबकि, सरकार ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का फैसला किया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के बर्खास्तगी के फैसले को ठीक ठहराया था। इसी मामले में राम चंद्र यादव के खिलाफ अनुशासनिक कार्यवाही प्रस्तावित की गई थी, जिस पर कैबिनेट ने मुहर लगा दी।

जर्जर स्कूल भवनों को ढहाने की मिली अनुमति

कैबिनेट ने प्रयागराज जिले के 113 परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों के जर्जर भवनों के ध्वस्तीकरण की अनुमति दे दी है। ये भवन 10-10 लाख रुपये से अधिक की लागत के थे। इसलिए इनके ध्वस्तीकरण की अनुमति कैबिनेट से ली गई है। इससे कम लागत वाले भवनों के ध्वस्तीकरण के लिए कैबिनेट की मंजूरी की जरूरत नहीं होती।

मंडी शुल्क हटाने की नियमावली को हरी झंडी

सरकार ने 45 फलों एवं सब्जियों को बेचने पर मंडी शुल्क हटा दिया है। मंडी के बाहर इन्हें बेचने पर फिलहाल कोई शुल्क नहीं है जबकि मंडी के भीतर बेचने पर मात्र एक प्रतिशत यूजर चार्ज लगाया गया है। इस बाबत बनी नियमावली को कैबिनेट ने हरी झंडी दे दी है। अपर मुख्य सचिव कृषि देवेश चतुर्वेदी ने बताया कि मंडी परिषद व समितियों द्वारा संचालित परिसरों, डी-नोटिफाइड कृषि उत्पाद पर राज्य कृषि उत्पादन मंडी अधिनियम की धारा 17 (3)(ग) के क्रम में यूजर चार्ज लगाने संबंधी उप्र कृषि उत्पादन मंडी (25 वां संशोधन) नियमावली कैबिनेट के समक्ष रखी गई। एक्ट में संशोधन पहले ही हो चुका था। सिर्फ नियमावली को अनुमोदित किया जाना था जिसे कैबिनेट ने हरी झंडी दे दी।
 

मेडिकल डिवाइस पार्क में निवेश करने वालों को मिलेगा ढेर सारी सुविधाएं

कैबिनेट ने मेडिकल डिवाइस पार्क में स्थापित होने वाली इकाइयों के लिए प्रोत्साहन संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। उत्तर प्रदेश फार्मास्युटिकल उद्योग नीति-2018 (यथा संशोधित) के तहत ये सुविधाएं मिलेंगी। यह पार्क केंद्र सरकार की योजना के अंतर्गत स्वीकृत हुआ है।
प्रस्ताव के अनुसार मेडिकल डिवाइस पार्क में स्थापित होने वाली इकाइयों को पूंजीगत ब्याज सब्सिडी, एसजीएसटी प्रतिपूर्ति, एयर कार्गो हैंडलिंग चार्ज और फ्रेट इंसेंटिव, ईपीएफ प्रतिपूर्ति, शून्य अपशिष्ट प्रोत्साहन, कौशल विकास, पेटेंट फाइलिंग शुल्क प्रतिपूर्ति, गुणवत्ता प्रमाणन प्रतिपूर्ति, लैंड लीज दर, उपयोगिता शुल्क में छूट, स्टांप ड्यूटी में छूट और विपणन सहायता आदि प्रोत्साहन शामिल रहेंगे। इस निर्णय से मेडिकल डिवाइस विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा और इस क्षेत्र में प्रदेश को आत्मनिर्भर बनने में सहायता मिलेगी। बड़ी संख्या में रोजगार सृजन होगा। प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। गौतमबुद्धनगर के यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र (यीडा) में 350 एकड़ क्षेत्रफल में मेडिकल डिवाइस पार्क परियोजना प्रस्तावित है। यह पार्क यीडा के सेक्टर-28 में स्थापित किया जाएगा। परियोजना की कुल लागत 439.40 करोड़ रुपये होगी। इसमें भूमि की लागत शामिल नहीं है। यह मेडिकल डिवाइस पार्क प्रदेश का पहला मेडिकल डिवाइस पार्क होगा।

सहकारी विकास बैंक को ऋण के लिए नाबार्ड को एक हजार करोड़ रुपये की गारंटी देगी सरकार

उप्र. सहकारी ग्राम विकास बैंक को नाबार्ड से ऋण लेने के लिए सरकार ने नाबार्ड के पक्ष में 1000 करोड़ रुपये की शासकीय गारंटी देने की मंजूरी दी है। मंगलवार को सीएम आवास पर हुई कैबिनेट बैठक में 1 जुलाई 2022 से 30 जून 2023 तक यह गारंटी कुछ शर्तों एवं प्रतिबंधों के अधीन दी गई है। सहकारिता मंत्री जेपीएस राठौर ने बताया कि सहकारी ग्राम विकास बैंक लि. लखनऊ के लिए ऋण और ब्याज के भुगतान के लिए नाबार्ड के पक्ष में दी जाने वाली गारंटी की अधिकतम सीमा एक हजार करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। साथ ही निबंधक सहकारी समितियां को पूर्व निर्धारित शर्तों पर 1 जुलाई 2022 से 30 जून 2023 तक के लिए 500 करोड़ रुपये की सीमा तक ऋण अथवा अन्य प्रकार से पुनर्वित्त आहरण की स्वीकृति देने का अधिकार दिया गया है। उन्होंने बताया कि सहकारी ग्राम विकास बैंक लि. से सभी विनियोजकों को भुगतान किया जा रहा है। बैंक पर कोई बकाया नहीं है। प्रस्तावित निर्णय से बैंक को नाबार्ड से पुनर्वित्त (रिफाइनेंस) प्राप्त होगा और बैंक द्वारा प्रदेश के कृषकों को दीर्घ अवधि का कृषि व अन्य कार्यों के लिए ऋण प्रदान किया जाएगा।

तीन इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों को मिलेगी वित्तीय रियायत

कैबिनेट ने प्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में निवेश करने वाली हायर एम्लाइंसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, सनवोडा इलेक्ट्रॉनिक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और हॉलिटेक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों को उप्र. इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग नीति-2017 के तहत आर्थिक रियायत देने की मंजूरी दे दी है। आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग नीति के तहत प्रदेश में 200 करोड़ रुपये से अधिक निवेश करने वाली इकाइयों को प्रोत्साहन और आर्थिक रियायत कैबिनेट की अनुमति से दी जाती है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में इन कंपनियों की ओर से कुल 2,154 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। ग्रेटर नोएडा में संचालित तीनों कंपनियां करीब 12,500 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार देंगी। इन कंपनियों में रेफ्रीजरेटर्स, एसी, वाशिंग मशीन, लीथियम ऑयल बैट्री का निर्माण, कैपेसिटिव टच स्क्रीन, फिंगरप्रिंट रिकगनीशन, कवर ग्लास का निर्माण किया जा रहा है।
 

औद्योगिक निवेश नीति-2012 के तहत 52 करोड़ की प्रतिपूर्ति

कैबिनेट ने अस्थापना एवं औद्योगिक निवेश नीति-2012 (मेगा परियोजना) के अंतर्गत तीन इकाइयों को प्रतिपूर्ति के रूप में 52.45 करोड़ रुपये की वित्तीय सुविधा देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। एसजीएसटी की प्रतिपूर्ति के रूप में यह सुविधा दी गई है। इसमें मेसर्स पसवारा पेपर्स लिमिटेड, मेरठ को 1.52 करोड़, मेसर्स श्री सीमेंट लिमिटेड बुलंदशहर को 39.55 करोड़, मेसर्स वरुण बेवरेजस लि. संडीला को 11.38 करोड़ रुपये की प्रतिपूर्ति की जाएगी। वहीं, कई अन्य इकाइयों के लिए लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी करने के लिए भी मंजूरी दे दी गई है।

औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2017 (मेगा परियोजना) के तहत हमीरपुर में हिंदुस्तान यूनीलीवर, प्रयागराज में जेकेसेम सेंट्रल लिमिटेड, मिर्जापुर में आरएलजे इंफ्रासीमेंट प्रा. लि. और अलीगढ़ में वंडर सीमेंट लि. को निवेश के लिए लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी करने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दे दी गई है। इन इकाइयों में क्रमश: 112.20 करोड़, 380.23 करोड़, 144.78 करोड़ और 528.84 करोड़ रुपये निवेश होगा। इस तरह से कुल 1166.05 करोड़ रुपये के निवेश से रोजगार के 726 अवसर पैदा होंगे। 18 मार्च 2020 को त्रिवेणी इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रीज, बुलंदशहर को जारी लेटर ऑफ कम्फर्ट निरस्त कर दिया गया है। आर्थिक रूप से पिछड़े क्षेत्रों के लिए त्वरित निवेश प्रोत्साहन नीति-2020 के तहत मेसर्स यूनीलीवर इंडिया लिमिटेड, हमीरपुर के प्रस्तावित 290 करोड़ रुपये के प्रस्ताव के बाबत पूर्व में जारी लेटर ऑफ कम्फर्ट में संशोधन के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी गई है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed