साइकिल छोड़ने के बाद हाथी की सवारी करेंगे बुखारी!
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जामा मस्जिद दिल्ली के शाही इमाम मौलाना सैयद अहमद बुखारी के निर्देश पर एक तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल सोमवार को बसपा के राष्ट्रीय महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी से उनके आवास पर मिला।
इसमें मुस्लिमों की सुरक्षा व आरक्षण सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। सपा से रिश्तों में आई तल्खी के मद्देनजर इमाम के इस कदम को सपा के लिए एक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
प्रतिनिधिमंडल में तारिक बुखारी, अनील जामई और बिलाल नूरानी शामिल थे।
तारिक ने बताया कि इमाम ने सभी प्रमुख राजनीतिक दलों से मुस्लिमों की समस्याओं और उनके हितों से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श के लिए प्रतिनिधिमंडल का गठन किया गया है। बसपा महासचिव से विस्तार से मुस्लिमों की समस्याओं पर चर्चा हुई है।
आगे भी जारी रहेगा मुलाकात का सिलसिला
तारिक ने आश्वस्त किया है कि वह इस संबंध में राष्ट्रीय नेतृत्व से विचार-विमर्श कर पार्टी के रुख की जानकारी देंगे।
तारिक ने बताया कि इसके पहले बसपा के जिम्मेदार लोग इमाम से मुलाकात कर चुके हैं। विचार-विमर्श का यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।
इस मुलाकात के साथ ही यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या इस बार इमाम लोकसभा चुनाव में बसपा के पक्ष में अपील करेंगे?
सपा से बातचीत का औचित्य नहीं
प्रतिनिधिमंडल में शामिल तारिक बुखारी ने बताया कि दिल्ली सम्मेलन में तय हुआ था कि मुस्लिमों की समस्याओं पर भाजपा और सपा को छोड़कर सभी से बात की जाएगी।
भाजपा का मुस्लिम विरोध जगजाहिर है जबकि सपा प्रदेश की हुकूमत में होने के बावजूद मुस्लिमों के हितों की रक्षा में फेल रही है।
मुस्लिमों ने सपा को जिस उम्मीद से वोट दिया था, उस पर वह खरी नहीं उतरी। उल्टा मुस्लिमों को बदहाली के रास्ते पर धकेल दिया गया।
मुजफ्फरनगर दंगे में 60 से ऊपर लोगों की मौत इसका प्रमाण है। ऐसे में सपा से बातचीत का कोई औचित्य नहीं रह जाता।
'मुस्लिमों के हक की कर रहे बात'
शाही इमाम मौलाना सैयद अहमद बुखारी का कहना है कि लोकसभा चुनाव में मुसलमानों की क्या भूमिका हो इसे तय करने की रणनीति पर कार्य हो रहा है।
22 फरवरी को दिल्ली में एक सम्मेलन का आयोजन किया गया था। इसमें करीब 500 से ज्यादा प्रतिनिधि शामिल हुए थे। इसमें मुस्लिमों की समस्याओं पर चर्चा हुई थी।
तय हुआ था कि एक 11 सदस्यीय कमेटी का गठन किया जाए जो देश के विभिन्न राज्यों में जाकर वहां मुसलमानों की समस्याओं की जानकारी ले और भाजपा व सपा को छोड़कर अन्य राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों का उस पर रुख जाने।
इसी सम्मेलन के क्रम में अलग-अलग प्रतिनिधिमंडल विभिन्न राज्यों में जाकर वहां मुस्लिमों की समस्याओं व राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से उस पर चर्चा कर रहे हैं।