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एलडीए अधिकारियों और बाबू की मिलीभगत, करोड़ों की जमीन पर चल रहा अवैध स्कूल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Mon, 30 Jul 2018 12:45 PM IST
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कानपुर रोड सेक्टर डी में एलडीए की जमीन पर अवैध स्कूल
- फोटो : amarujala
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एलडीए अधिकारियों और बाबू की मिलीभगत से प्राधिकरण की करोड़ों की जमीन पर आठ साल से अवैध स्कूल चल रहा है। अभी तक दबाए रखी गई फाइल बाहर आ गई और वीसी प्रभु एन सिंह ने भूखंड वापस लेने या स्कूल संचालक से आठ साल का किराया और मौजूदा कीमत पर भूखंड खरीदने की कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया है।
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ऐसा नहीं होने पर एलडीए अपनी जमीन वापस लेगा। एलडीए का यह भूखंड कानपुर रोड योजना के सेक्टर डी में है। यहां मानसरोवर पब्लिक स्कूल के नाम से 1990 में 3232.80 वर्गमी. का भूखंड आवंटित किया गया। स्कूल के उपयोग के लिए यह आवंटन 60 प्रतिशत कीमत पर छूट देकर किया गया। 1997 में स्कूल के पक्ष में रजिस्ट्री एलडीए ने की।
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वहीं भूखंड की कीमत अदा करने के लिए भी अतिरिक्त समय देते हुए 2000 में किस्तें जमा करने के लिए दो साल की जगह पांच साल का समय दे दिया गया। इसके बाद भी किस्तें जमा नहीं की गईं। इस पर 2010 में तत्कालीन वीसी मृत्युंजय कुमार नरायन ने इस स्कूल का आवंटन निरस्त कर दिया। इसके बाद एलडीए के अधिकारियों ने भूखंड को वापस लेने के लिए री-एंट्री की कार्रवाई नहीं कराई। इससे भूखंड को दोबारा नीलामी के जरिए भी नहीं बेचा जा सका।
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अधिकारियों ने अपनी जेब भरने के लिए एक तरफ जहां ओटीएस में लाभ के लिए आवेदन कराया गया। वहीं आवंटन निरस्त करने के बाद 2012, 2013 में बकाया पैसा भी एलडीए में जमा करा दिया गया। वहीं स्कूल संचालक के खिलाफ पूर्व वीसी की कार्रवाई को एक पक्षीय मानते हुए ओटीएस के लाभ की संस्तुति भी अधिकारियों ने कर दी।
प्राधिकरण के खाते में जमा कराने होंगे रुपये
एलडीए सूत्रों के मुताबिक यह भूखंड एक बसपा नेता ने खरीदा था। भूखंड प्राइमरी स्कूल के लिए दिया गया। 2010 में आवंटन निरस्त के समय जब जांच कराई गई तो पता चला कि वहां किसी एसजी कॉलेज का बोर्ड लगा हुआ है। अब भी एक किड्स स्कूल और डांस एकेडमी भूखंड पर बनी बिल्डिंग में चल रही है। यह भूखंड किसी दूसरी संस्था को भी रीसेल किया जा चुका है। पूरा मामला करीब तीन करोड़ रुपये का है, जोकि सही मायने में एलडीए के खाते में जमा होना चाहिए।
एलडीए के डिप्टी कॉस्ट अकाउंटेंट ने बताया कि वीसी के आदेश पर इस केस का परीक्षण किया गया है। वीसी को संस्तुति की गई है कि स्कूल संचालक को मौजूदा कीमत पर भूखंड का आवंटन किया जा सकता है। इसके लिए उससे शैक्षिक संस्थाओं को दी जानी वाली छूट के साथ मौजूदा कीमत का 70 प्रतिशत भाग ले लिया जाए।
ऐसे में भूखंड की कुल कीमत करीब 6.44 करोड़ रुपये की जगह 4.50 करोड़ रुपये होती है। उसके जमा 66 लाख रुपये को कम करने के बाद भी करीब 3.88 करोड़ रुपये एलडीए को मिलेंगे। वहीं आठ साल तक भूखंड के उपयोग के चलते उसका किराया भी अलग से स्कूल संचालक से वसूल किया जाए।
एलडीए के अधिकारियों की सांठगांठ का आलम यह रहा कि अगर ओटीएस का लाभ देकर भूखंड दोबारा आवंटित कर दिया जाता तो एलडीए को स्कूल संचालक को पचास हजार रुपये देने पतड़े। जबकि करीब तीन करोड़ रुपये अधिक एलडीए में जमा होने चाहिए।
भूखंड आवंटन के मामले में एक अपील आवास विभाग में भी की गई है। वहां हमने पूर्व शासनादेश के आधार पर मौजूदा कीमत का 50 प्रतिशत या पुरानी दर पर बकाया ब्याज लेकर स्कूल संचालक को पुन: आवंटन का ऑफर दिया है। वीसी ने भी प्राधिकरण के कॉस्ट विभाग और वित्त विभाग से रिपोर्ट ली है। इसमें मौजूदा कीमत का 70 प्रतिशत प्रतिशत और आठ साल का किराया लेने की संस्तुति की गई है। अभी इस मामले में अंतिम फैसला होना बाकी है। - डीएम कटियार, संयुक्त सचिव व प्रभारी कॉमर्शियल, एलडीए
एलडीए के डिप्टी कॉस्ट अकाउंटेंट ने बताया कि वीसी के आदेश पर इस केस का परीक्षण किया गया है। वीसी को संस्तुति की गई है कि स्कूल संचालक को मौजूदा कीमत पर भूखंड का आवंटन किया जा सकता है। इसके लिए उससे शैक्षिक संस्थाओं को दी जानी वाली छूट के साथ मौजूदा कीमत का 70 प्रतिशत भाग ले लिया जाए।
ऐसे में भूखंड की कुल कीमत करीब 6.44 करोड़ रुपये की जगह 4.50 करोड़ रुपये होती है। उसके जमा 66 लाख रुपये को कम करने के बाद भी करीब 3.88 करोड़ रुपये एलडीए को मिलेंगे। वहीं आठ साल तक भूखंड के उपयोग के चलते उसका किराया भी अलग से स्कूल संचालक से वसूल किया जाए।
एलडीए के अधिकारियों की सांठगांठ का आलम यह रहा कि अगर ओटीएस का लाभ देकर भूखंड दोबारा आवंटित कर दिया जाता तो एलडीए को स्कूल संचालक को पचास हजार रुपये देने पतड़े। जबकि करीब तीन करोड़ रुपये अधिक एलडीए में जमा होने चाहिए।
भूखंड आवंटन के मामले में एक अपील आवास विभाग में भी की गई है। वहां हमने पूर्व शासनादेश के आधार पर मौजूदा कीमत का 50 प्रतिशत या पुरानी दर पर बकाया ब्याज लेकर स्कूल संचालक को पुन: आवंटन का ऑफर दिया है। वीसी ने भी प्राधिकरण के कॉस्ट विभाग और वित्त विभाग से रिपोर्ट ली है। इसमें मौजूदा कीमत का 70 प्रतिशत प्रतिशत और आठ साल का किराया लेने की संस्तुति की गई है। अभी इस मामले में अंतिम फैसला होना बाकी है। - डीएम कटियार, संयुक्त सचिव व प्रभारी कॉमर्शियल, एलडीए