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क्लीनिकल ट्रॉयल में अवैध प्रैक्टिस पर लगेगी रोक

Thu, 04 Dec 2014 03:07 PM IST
अतुल भारद्वाज/अमर उजाला, लखनऊ
अतुल भारद्वाज/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 04 Dec 2014 03:07 PM IST
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illegal practice in clinical trial is stopped.

क्लीनिकल ट्रायल में अवैध प्रैक्टिस अब नहीं चलेगी। 2015 के बाद क्लीनिकल ट्रायल सिर्फ मानक पूरे करने वाले चिकित्सा संस्थान ही कर पाएंगे। भारत सरकार की क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (क्यूसीआई) के नेशनल एक्रिडिएशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थ केयर प्रोवाइडर्स से मान्यता जरूरी होगी।  

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इसके साथ ही किसी भी मरीज पर क्लीनिकल ट्रायल करने से पहले वीडियो कैमरे के सामने पूरी जानकारी देकर लिखित सहमति लेनी होगी। बुधवार को सीडीआरआई में नेशनल कोआर्डिनेटर फॉर फार्माकोविजिलेंस प्रोग्राम प्रो. वाईके गुप्ता ने यह जानकारी दी।
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प्रो. गुप्ता का कहना था कि एनएबीएच ने मान्यता के मानकों पर अपनी ड्राफ्ट रिपोर्ट पेश कर दी है। इसमें क्लीनिकल ट्रायल के लिए ड्रग रिसर्च सेंटर, हॉस्पिटल या मेडिकल कॉलेज को मान्यता के साथ उसकी एथिक्स कमेटी को भी रजिस्टर्ड कराना जरूरी होगा। प्रो. गुप्ता ने बताया कि डॉ. चौधरी समिति ने 25 बिंदुओं पर अपनी सिफारिश दी थी।
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तभी मिल पाएगी मान्यता

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इसमें ट्रायल के लिए क्लीनिकल साइट और एथिक्स कमेटी को मान्यता और रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य बनाए जाने के लिए कहा गया था। इसका फायदा यह होगा कि अवैध रूप से क्लीनिकल ट्रायल की अवैध प्रैक्टिस पर रोक लग सकेगी। वहीं अब एथिक्स कमेटी को तयशुदा समय पर निगरानी और जांच कर अपनी रिपोर्ट भी देनी अनिवार्य होगा।

क्लीनिकल ट्रायल के लिए उन्हीं संस्थानों को मान्यता मिल सकेगी जो मरीज के लिए पूरी तरह सुरक्षित हों। जहां तबियत बिगड़ने पर मरीज को इलाज मिल सके। इसके साथ ही क्वालिटी मैनेजमेंट प्लान तैयार करना भी अनिवार्य होगा।

प्रो. गुप्ता ने बताया कि अब क्लीनिकल ट्रायल से पहले मरीज की लिखित सहमति लेनी होगी। इसका मतलब मरीज को पूरी सूचना देकर सहमति लेना है। क्लीनिकल ट्रायल कर रहे इंवेस्टीगेटर को यह सुनिश्चित करना होगा कि मरीज और उसके परिजन पूरी बात समझें। उन्हें इसके संभावित नुकसान भी बता दिए जाएं और नुकसान होने पर मुआवजा भी दिया जाए।

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