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राजेश साहनी केस: जांच रिपोर्ट पर बोले आईजी-मुझे परिस्थितियों की पूरी जानकारी, सीबीआई से हो जांच

Thu, 02 Aug 2018 11:42 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 02 Aug 2018 11:42 PM IST
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ig aseem arun raise question on inquiry report of rajesh shahni suicide case
आईजी एटीएस असीम अरुण

एटीएस में तैनात रहे की अपर पुलिस अधीक्षक राजेश साहनी की मौत की जांच रिपोर्ट को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। एटीएस के आईजी असीम अरुण ने एडीजी द्वारा की गई जांच की रिपोर्ट पर सवाल खड़े करते हुए पूरे मामले की जांच सीबीआई से ही कराए जाने की मांग डीजीपी से की है।

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असीम अरुण ने डीजीपी को पत्र लिखकर कहा है कि जांच में लीपापोती करने की कोशिश की गई है। एटीएस को कटघरे में खड़ा करने की मंशा से केवल एक कर्मी के बयान के आधार पर एटीएस की कार्यप्रणाली पर नाकारात्मक टिप्पणी की गई है।
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उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि राजेश साहनी की मौत के बाद से ही एटीएस के मनोबल को गिराने और मेरी छवि को चोट पहुंचाने का कुचक्र रचा जा रहा है, जिसे सब देख रहे हैं। जांच रिपोर्ट को लीक करना और एटीएस पर विपरीत टिप्पणी करना इसी कुचक्र का हिस्सा है।
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उन्होंने डीजीपी से कहा है कि इस पूरे मामले को लेकर थोड़ी सी भी संवेदनशीलता होती तो सबसे पहले परिवार के सदस्यों को जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाती। इस जांच को सार्वजनिक किए जाने के बारे में आपको निर्णय लेना चाहिए था।

जांच रिपोर्ट की कमियों को गिनाया

ig aseem arun raise question on inquiry report of rajesh shahni suicide case
IPS rajesh sahni - फोटो : amar ujala

असीम अरुण ने अपने पत्र में जांच की खामियों को इंगित करते हुए लिखा है कि जांच अधिकारी द्वारा अपर पुलिस अधीक्षक अजय मिश्रा को सदस्य के रूप में शामिल किया गया। अजय मिश्रा को साहनी के सबसे करीबी मित्र के साथ पीपीएस संघ के अध्यक्ष भी हैं।

ऐसे में उनको जांच टीम का हिस्सा बनाया जाना नैसर्गिक न्याय के सिद्घांतों के खिलाफ था। इस बारे में जांच अधिकारी को लिखित रूप से अवगत कराया गया, लेकिन उसमें कोई सुधार नहीं किया गया। अजय मिश्र ने तमाम गवाहों के बयान जांच अधिकारी की अनुपस्थिति में लिए। ऐसे में निष्पक्ष जांच की अपेक्षा नहीं की जा सकती।

उन्होंने यह भी लिखा है कि एटीएस की तमाम फाइलों का परीक्षण कई हफ्ते तक किया गया, जिसमें कोई कमी नहीं मिली और न ही आत्महत्या का कारण कार्यालय में मिला। साहनी के सभी सहयोगी स्टाफ के बयान हुए लेकिन कोई विपरीत बात नहीं मिली। फिर भी जांच अधिकारी ने मात्र एक कर्मी के बयान पर एटीएस की कार्यप्रणाली पर नाकारात्मक टिप्पणी की जो कि डीजीपी के द्वारा उन्हें दी गई जांच का संदर्भ भी नहीं था।

साहनी के मोबाइल का नहीं हुआ वैज्ञानिक परीक्षण

असीम अरुण ने अपने पत्र में यह भी कहा है कि साहनी ने अपने जीवन के अंतिम दो घंटे में जिन व्यक्तियों से बात की और मैसेज कर रहे थे, उनमें से कई के बयान नहीं लिए गए। उनके फोन का वैज्ञानिक परीक्षण नहीं हुआ, साहनी के फोन का डाटा एक्सट्रैक्शन तक नहीं किया गया।

महत्वपूर्ण गवाहों के बयान में विरोधाभास है, लेकिन लाई डिटेक्टर टेस्ट नहीं किया गया। उन्होंने पत्र में आगे लिखा है कि मैं यह जानता हूं कि सच अति संवेदनशील है, लेकिन जांच में सच सामने आना चाहिए था, उसे प्रकाशित करना है या नहीं यह निर्णय आपका होता।

उन्होंने लिखा है कि मेरी स्थिति इस पूरे प्रकरण में मुश्किल रही है। एक ओर मुझ पर तमाम आरोप लगते रहे हैं, दूसरी ओर साहनी के परिवार के कल्याण की जिम्मेदारी भी मेरे ऊपर है, जिसे मैने पूरी शक्ति और संयम से निभाने की कोशिश की और करता रहूंगा। साहनी मेरे सहकर्मी ही नहीं मित्र भी थे। अपनी व्यक्तिगत समस्याएं वह मुझे बताते थे और मैं उनकी मदद करता था।

मुझे परिस्थितियों की पूरी जानकारी

मुझे परिस्थितियों की पूरी जानकारी है लेकिन मैं सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कहूंगा, क्योंकि उन्होंने यह बातें मुझे विश्वास में बताई थी। जांच अधिकारी को इस संबंध में मैने पूरी जानकारी और साक्ष्य दिए लेकिन उन्हें नजरअंदाज किया गया या छुपा दिया गया। उन्होंने पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच पर जोर दिया है।

मालूम हो कि 29 मई को एटीएस में तैनात अपर पुलिस अधीक्षक राजेश साहनी ने अपने कार्यालय में ही खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। इस मामले की जांच मुख्यमंत्री के निर्देश पर एडीजी जोन लखनऊ को सौंपी गई थी। एडीजी ने अपनी रिपोर्ट में साहनी की मौत का कारण आत्म हत्या बताया था लेकिन आत्महत्या क्योंकि इसका खुलासा नहीं किया था। साथ ही एटीएस की कार्य प्रणाली में सुधार की गुंजाइश बताई थी। 
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