तय समय में शिकायतें दूर न करना बिजली कंपनियों को पड़ेगा भारी, देना होगा मुआवजा
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यूपी में उपभोक्ताओं की शिकायतों का निस्तारण तय समय में नहीं करना बिजली कंपनियों को भारी पड़ेगा। उप्र विद्युत नियामक आयोग ने सोमवार को इस बाबत नया स्टैंडर्ड ऑफ परफॉर्मेंस रेगुलेशन-2019 जारी कर दिया। साथ ही, इसे गजट नोटिफिकेशन के लिए ऊर्जा विभाग को भी भेज दिया।
गजट नोटिफिकेशन होने के साथ ही प्रदेश में मुआवजा क्लॉज प्रभावी हो जाएगा। यानी तय समयसीमा में समस्याओं का निस्तारण नहीं होने पर उपभोक्ता बिजली कंपनियों से मुआवजा पाने के हकदार हो जाएंगे।
विद्युत वितरण संहिता-2005 कानून में ब्रेक डाउन, केबल फॉल्ट, ट्रांसफार्मर बदलने, नया कनेक्शन लेने, मीटर रीडिंग, लोड घटाने-बढ़ाने समेत अन्य तमाम तरह की शिकायतों के निस्तारण के लिए समयसीमा निर्धारित की गई है। साथ ही, इस समयसीमा का उल्लंघन किए जाने पर मुआवजा का भी प्रावधान किया गया है।
इसके बावजूद बिजली कंपनियां उपभोक्ताओं की शिकायतों का निस्तारण समय से नहीं करती हैं। इससे उपभोक्ताओं को परेशानी के साथ ही आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है। इसी को लेकर राज्य विद्युत नियामक आयोग के समक्ष कई जनहित याचिकाएं दाखिल की गई थीं।
आयोग के चेयरमैन आरपी सिंह और सदस्य केके शर्मा ने सोमवार को तमाम पीआईएल पर फैसला सुनाया। कहा, उपभोक्ताओं की समस्याओं का निस्तारण तय समयसीमा के भीतर करने के संबंध में नया स्टैंडर्ड ऑफ परफॉर्मेंस रेगुलेशन-2019 जारी किया है। उधर, इस मुद्दे की लड़ाई लड़ने वाले उप्र विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने नियामक आयोग के इस फैसले का स्वागत किया है।
अधिकतम 60 दिन में मुआवजा देना अनिवार्य
स्टैंडर्ड ऑफ परफॉर्मेंस रेगुलेशन-2019 के लागू होने पर उपभोक्ताओं को अधिकतम 60 दिन में मुआवजा देना अनिवार्य होगा। उपभोक्ता को एक वित्तीय वर्ष में उसके फिक्स चार्ज/डिमांड चार्ज के 30 प्रतिशत से अधिक का मुआवजा नहीं दिया जाएगा।
मसलन, अगर एक किलोवाट भार क्षमता का कनेक्शन लेने वाला उपभोक्ता अगर महीने में 100 रुपये प्रति किलोवाट फिक्स चार्ज देता है तो उसका पूरे साल का फिक्स चार्ज 1200 रुपये हुआ। ऐसे में उस उपभोक्ता को एक वर्ष में अधिकतम 360 रुपये ही मुआवजा मिल पाएगा।
उपभोक्ता समस्या -- देरी पर मुआवजे की दर (प्रतिदिन)
अंडरग्राउंड केबल ब्रेकडाउन -- 100 रुपये
सब स्टेशन का निर्माण बाधित होने की स्थिति में वोल्टेज विचलन -- 250 रुपये
नया कनेक्शन वितरण मेंस उपलब्धता पर -- 50 रुपये
मीटर रीडिंग के मामले -- 200 रुपये
डिफेक्टिव मीटर व सामान्य फ्यूज ऑफ -- 50 रुपये
बिलिंग शिकायत और भार में कमी व आधिक्य -- 50 रुपये
इस प्रकार होगी मुआवजे की दर
उपभोक्ता समस्या -- देरी पर मुआवजे की दर (प्रतिदिन)
श्रेणी परिवर्तन -- 50 रुपये
ट्रांसफार्मर फेल (ग्रामीण) -- 150 रुपये
अस्थायी कनेक्शन का निर्गमन -- 100 रुपये
बिजली आपूर्ति बढ़ाने के लिए सबस्टेशन की स्थापना -- 500 रुपये
कॉल सेंटर से रिस्पांस न दिया जाना -- 50 रुपये
फर्जी अवशेषों को आगे ले जाना -- 100 रुपये प्रति चक्र
नया कनेक्शन व नेटवर्क विस्तार पर अतिरिक्त भार -- 250 रुपये
ओवरहेड लाइन व केबल ब्रेकडाउन -- 100 रुपये