फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   If baby does not cry after birth its life is at risk 30 percent of newborns who fail to cry end up dying

Health News: प्रसव के बाद बच्चा न रोये तो उसकी जान को खतरा, न रोने वाले 30 फीसदी नवजात की हो जाती है मौत

Mon, 11 May 2026 09:12 AM IST
Bhupendra Singh अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Bhupendra Singh Updated Mon, 11 May 2026 09:12 AM IST
सार

प्रसव के बाद बच्चा न रोये तो समझिए उसकी जान को खतरा है। न रोने वाले 30 फीसदी नवजात की मौत हो जाती है। लखनऊ में छह हजार बाल रोग एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, नर्सिंग कर्मियों और पैरामेडिकल कर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया। आगे पढ़ें पूरी खबर...

विज्ञापन
If baby does not cry after birth its life is at risk 30 percent of newborns who fail to cry end up dying
एसएनसीयू में भर्ती नवजात। (फाइल) - फोटो : संवाद

विस्तार

प्रसव के बाद बच्चा न रोए तो उसकी जान को गंभीर खतरा होता है। ऐसे करीब 30 फीसदी नवजात की मौत हो जाती है। जो बच्चे बचते हैं, उनमें से 35 फीसदी का मस्तिष्क खराब हो सकता है। इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए अब एक नई रणनीति बनाई गई है। इसके तहत प्रदेश के सभी अस्पतालों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसकी शुरुआत रविवार से की गई है। इसमें 205 सरकारी और निजी अस्पतालों के छह हजार से ज्यादा विशेषज्ञ और नर्सिंगकर्मी शामिल हुए।

विज्ञापन


उत्तर प्रदेश में होने वाले हर 10 प्रसव में से एक बच्चे में न रोने की समस्या सामने आती है। यह नवजात शिशुओं की मौत के तीन प्रमुख कारणों में से एक है। नवजात की जान बचाने के लिए प्रबंधन पर विशेष कार्य किया जा रहा है। इसके लिए मास्टर ट्रेनर तैयार किए गए हैं। रविवार को बेसिक नवजात पुनर्जीवन कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान नवजात के जन्म लेने के तत्काल बाद बरती जाने वाली सावधानी से वाकिफ कराया गया। 
विज्ञापन


उत्तर प्रदेश नेशनल नियोनेटोलॉजी फोरम (यूपी एनएनएफ) की ओर से आयोजित प्रशिक्षण में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, यूनिसेफ, टीएसयू सहित अन्य संस्थाएं भी शामिल रहीं। लखनऊ में आयोजित प्रशिक्षण में प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य अपर निदेशक डॉ. अजय गुप्ता, डॉ. सलमान, डॉ. मिलिंद, डॉ. ज्योति मल्होत्रा, डा. मुकुल डा. रिचा, डा. कीर्ति आदि ने हिस्सा लिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

क्या होती है समस्या

उत्तर प्रदेश नेशनल नियोनेटोलॉजी फोरम के सचिव डॉ. आकाश पंडिता ने बताया कि बच्चे का न रोना साबित करता है कि वह बर्थ एस्फिक्सिया की चपेट में है। मतलब उसके दिमाग तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच रही है। ऐसे बच्चों को तत्काल आक्सीजन देने की जरूरत होती है। ऐसा नहीं होने पर उसकी मौत हो जाती है। यदि नवजात बच गया तो मस्तिष्क क्षति अथवा मानसिक-शारीरिक विकास प्रभावित होता है।

फेफड़ों में पानी या गंदगी से भी होती है समस्या

केजीएमयू की बाल रोग विभाग की प्रोफेसर शालिनी त्रिपाठी ने बताया कि जन्म के बाद बच्चा नहीं रो रहा है तो यह समझना होगा कि कोई न कोई समस्या है। आमतौर यह समस्या मां में किसी तरह की बीमारी होने, समय से पहले जन्म होने, बच्चेदानी में समस्या होने अथवा फेफड़ों में पानी या मेकोनियम (गंदगी) भर जाना की वजह से होती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed