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Lucknow News: बेटी के ब्याह के लिए खोली थी एफडी, पाई भी नहीं छोड़ी
Thu, 15 Jan 2026 02:32 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Thu, 15 Jan 2026 02:32 AM IST
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बैंक ऑफ बड़ाैदा के बाहर प्रदर्शन के दाैरान रोती खाताधारक सरोजनी।
लखनऊ। कुछ समय पहले बेटी के ब्याह के लिए बैंक में एफडी खुलवाई थी। क्या पता था कि रकम ऐसे गायब हो जाएगी। साहब, पत्नी के नाम फर्जी एफडी तक खुल गई। जब पता चला तो तत्काल इसकी शिकायत भी की, लेकिन किसी ने कोई सुनवाई नहीं की। यह कहना है कुल्हड़ कट्टा निवासी अवधेश का।
उन्होंने बताया कि चार लाख और तीन लाख रुपये की दो एफडी कराई थी, लेकिन यहां खाते में जमा 70 हजार रुपये भी निकाल लिए गए। उनकी पत्नी सरोजनी और बेटी जानकी के नाम पर 10-10 लाख रुपये की फर्जी एफडी तक बना दी गई और खाते से कुल 13 लाख रुपये निकाल लिए गए।
बुधवार को अवधेश की तरह और भी ठगी के शिकार ग्राहक बैंक ऑफ बड़ौदा की शकुंतला मिश्रा विश्वविद्यालय परिसर स्थित शाखा पहुंचे और यहां प्रबंधन के खिलाफ जमकर हंगामा किया। आक्रोशित लोगों ने बाहर से बैंक का चैनल गेट बंद कर धरना शुरू कर दिया। कुछ ही समय में हालात ऐसे हुए कि बैंक प्रबंधन को शाखा बंद करनी पड़ी। स्थिति संभालने के लिए पुलिस बुलानी पड़ी। अपनी जमा पूंजी वापस दिलाने की मांग करते हुए पीड़ित खाताधारकों ने बैंक अफसरों पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की।
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करीब तीन घंटे तक चले इस विरोध प्रदर्शन के दौरान शकुंतला मिश्रा विश्वविद्यालय में ही सहायक अध्यापक डॉ. आशुतोष पाठक ने बताया कि उनकी तनख्वाह इसी बैंक खाते में आती है। वह पांच लाख रुपये का चेक लगाकर नकद लेने यहां आए लेकिन उन्हें सिर्फ चार लाख रुपये दिए गए। उनकी बाकी रकम चार दिन बाद अलग-अलग तरीके से निकाल ली गई। बाद में 75 हजार रुपये निकाले जाने का मैसेज आया। फोन पर इस मैसेज ने उन्हें भौंचक्का कर दिया और आनन फानन में उन्होंने मदद के लिए 26 दिसंबर को पारा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई।
शिकायत के अभाव में लटकी कार्रवाई
धरने पर बैठे खाताधारकों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए आरोपी बैंक मित्र शिवा राव को छोड़ने की बात कही। इस आरोप पर इंस्पेक्टर सुरेश सिंह ने कहा कि बैंक मित्र को शिकायत के आधार पर हिरासत में लिया गया लेकिन बिना किसी लिखित शिकायत किसी को थाना परिसर में बैठाकर नहीं रखा जा सकता। हालांकि बैंक मित्र के पास से दो लाख 40 हजार रुपये नकद बरामद हुए हैं और करीब तीन लाख रुपये दो अलग-अलग बैंक खातों में जमा रकम को होल्ड करा दिया है। शिकायत मिलने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उधर बैंक शाखा प्रबंधक हिमांशु कुकरेती का कहना है कि उन्होंने खाताधारकों से मिली शिकायतों के आधार पर पूरी रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेज दी है। अधिकारियों के निर्देश मिलते ही आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। इसके अलावा बैंक स्तर पर भी जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। बहरहाल, पीड़ितों ने दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी और पूरी रकम वापस दिलाने की मांग कर रहे हैं।
हवा की तरह उड़ते चले गए पैसे
बैंक के बाहर धरना दे रहे पीड़ित ग्राहकों में से एक सालिकराम तेज आवाज में चिल्ला रहे हैं। अपनी नम आंखें पोंछते हुए बोले- साहब, मेरे खाते से हवा की तरह पैसे उड़ते चले गए। उनके खाते में 17 लाख 30 हजार रुपये थे। जब स्टेटमेंट निकलवाने वह बैंक पहुंचे तो उन्हें पता चला कि 22 दिसंबर को दो लाख, 27 दिसंबर को तीन लाख, 23 जनवरी को पांच लाख, तीन मार्च को दो लाख, 11 अप्रैल को डेढ़ लाख और 2 सितंबर को तीन लाख 80 हजार रुपये किसी नाजिया बानो के खाते में ट्रांसफर कर दिए गए और इसकी कोई भी जानकारी उन्हें नहीं मिली। लगभग इसी तरह की कहानी वहां मौजूद हर ग्राहक के पास मिली। भीड़ में खड़ीं मुन्नी शर्मा बताती हैं कि उनके खाते से चार लाख, राम सिंह ने 10 लाख, रुचि गौतम ने छह लाख, हितेश ने 64 हजार, अंशी ने तीन लाख, अंजली ने 85 हजार, सोनी यादव ने नौ हजार और विक्रम सेन ने अपने खाते से 11 हजार रुपये निकाले जाने की आपबीती सुनाई। इनका कहना है कि बैंक की यह ठगी किसी एक या दो नहीं बल्कि 50 से भी ज्यादा ग्राहकों के साथ हुई है।
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उन्होंने बताया कि चार लाख और तीन लाख रुपये की दो एफडी कराई थी, लेकिन यहां खाते में जमा 70 हजार रुपये भी निकाल लिए गए। उनकी पत्नी सरोजनी और बेटी जानकी के नाम पर 10-10 लाख रुपये की फर्जी एफडी तक बना दी गई और खाते से कुल 13 लाख रुपये निकाल लिए गए।
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बुधवार को अवधेश की तरह और भी ठगी के शिकार ग्राहक बैंक ऑफ बड़ौदा की शकुंतला मिश्रा विश्वविद्यालय परिसर स्थित शाखा पहुंचे और यहां प्रबंधन के खिलाफ जमकर हंगामा किया। आक्रोशित लोगों ने बाहर से बैंक का चैनल गेट बंद कर धरना शुरू कर दिया। कुछ ही समय में हालात ऐसे हुए कि बैंक प्रबंधन को शाखा बंद करनी पड़ी। स्थिति संभालने के लिए पुलिस बुलानी पड़ी। अपनी जमा पूंजी वापस दिलाने की मांग करते हुए पीड़ित खाताधारकों ने बैंक अफसरों पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की।
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करीब तीन घंटे तक चले इस विरोध प्रदर्शन के दौरान शकुंतला मिश्रा विश्वविद्यालय में ही सहायक अध्यापक डॉ. आशुतोष पाठक ने बताया कि उनकी तनख्वाह इसी बैंक खाते में आती है। वह पांच लाख रुपये का चेक लगाकर नकद लेने यहां आए लेकिन उन्हें सिर्फ चार लाख रुपये दिए गए। उनकी बाकी रकम चार दिन बाद अलग-अलग तरीके से निकाल ली गई। बाद में 75 हजार रुपये निकाले जाने का मैसेज आया। फोन पर इस मैसेज ने उन्हें भौंचक्का कर दिया और आनन फानन में उन्होंने मदद के लिए 26 दिसंबर को पारा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई।
शिकायत के अभाव में लटकी कार्रवाई
धरने पर बैठे खाताधारकों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए आरोपी बैंक मित्र शिवा राव को छोड़ने की बात कही। इस आरोप पर इंस्पेक्टर सुरेश सिंह ने कहा कि बैंक मित्र को शिकायत के आधार पर हिरासत में लिया गया लेकिन बिना किसी लिखित शिकायत किसी को थाना परिसर में बैठाकर नहीं रखा जा सकता। हालांकि बैंक मित्र के पास से दो लाख 40 हजार रुपये नकद बरामद हुए हैं और करीब तीन लाख रुपये दो अलग-अलग बैंक खातों में जमा रकम को होल्ड करा दिया है। शिकायत मिलने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उधर बैंक शाखा प्रबंधक हिमांशु कुकरेती का कहना है कि उन्होंने खाताधारकों से मिली शिकायतों के आधार पर पूरी रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेज दी है। अधिकारियों के निर्देश मिलते ही आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। इसके अलावा बैंक स्तर पर भी जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। बहरहाल, पीड़ितों ने दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी और पूरी रकम वापस दिलाने की मांग कर रहे हैं।
हवा की तरह उड़ते चले गए पैसे
बैंक के बाहर धरना दे रहे पीड़ित ग्राहकों में से एक सालिकराम तेज आवाज में चिल्ला रहे हैं। अपनी नम आंखें पोंछते हुए बोले- साहब, मेरे खाते से हवा की तरह पैसे उड़ते चले गए। उनके खाते में 17 लाख 30 हजार रुपये थे। जब स्टेटमेंट निकलवाने वह बैंक पहुंचे तो उन्हें पता चला कि 22 दिसंबर को दो लाख, 27 दिसंबर को तीन लाख, 23 जनवरी को पांच लाख, तीन मार्च को दो लाख, 11 अप्रैल को डेढ़ लाख और 2 सितंबर को तीन लाख 80 हजार रुपये किसी नाजिया बानो के खाते में ट्रांसफर कर दिए गए और इसकी कोई भी जानकारी उन्हें नहीं मिली। लगभग इसी तरह की कहानी वहां मौजूद हर ग्राहक के पास मिली। भीड़ में खड़ीं मुन्नी शर्मा बताती हैं कि उनके खाते से चार लाख, राम सिंह ने 10 लाख, रुचि गौतम ने छह लाख, हितेश ने 64 हजार, अंशी ने तीन लाख, अंजली ने 85 हजार, सोनी यादव ने नौ हजार और विक्रम सेन ने अपने खाते से 11 हजार रुपये निकाले जाने की आपबीती सुनाई। इनका कहना है कि बैंक की यह ठगी किसी एक या दो नहीं बल्कि 50 से भी ज्यादा ग्राहकों के साथ हुई है।