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Lucknow News: मरा समझकर छोड़ दी थी आस...बेटे को सामने देखकर खुशी में छलक पड़े आंसू
Mon, 16 Mar 2026 02:43 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Mon, 16 Mar 2026 02:43 AM IST
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शिवनाथ व उनसे मिलने के लिए घर पर जुटे ग्रामीण।
मलिहाबाद। 16 वर्ष पूर्व लापता मजदूर शिवनाथ (44) जब रविवार दोपहर घर पहुंचे तो मां कलावती व भाई खूब लिपट कर रोए। शिवनाथ ने बताया कि वह मजदूरी के लिए घर से निकले थे। मेरठ में एक व्यापारी ने भैंसों के तबेले में काम कराने के लिए उन्हें बंधक बना लिया था और रुपये भी नहीं देते थे। परिजनों ने शिवनाथ को मृत समझ लिया था। उस समय परिवार ने गुमशुदगी भी दर्ज नहीं कराई थी।
रहीमाबाद के रूसेना खेड़ा गांव निवासी शिवनाथ करीब 16 साल पहले हरदोई के परिचित के साथ मुजफ्फरनगर मजदूरी करने गए थे। वहां दो माह तक ठेकेदार के पास काम किया। दिहाड़ी नहीं मिली तो वहां से भागकर मेरठ के टोल के पास शिवाया गांव पहुंचे। वहां राजेंद्र चौधरी अपने साथ घर ले गया। आरोप है कि राजेंद्र चौधरी का बेटा राहुल चौधरी उन्हें बंधक बनाकर रखता था। मजदूरी के रुपये भी नहीं देता था। उनसे भैंसों के तबेले में दूध निकलवाने और गोबर उठवाने के साथ पूरे तबेले की सफाई करवाते थे।
साथी ने रोता देख तो दिये रुपये, दीवार कूदकर भागे
शिवनाथ ने बताया कि साथ में काम करने वाले हरदोई के रिंकू अक्सर उन्हें घर जाने के लिए रोता देखते थे। तरस खाकर उन्होंने 500 रुपये दिए तो वह दीवार कूदकर वहां से भागकर मेरठ रेलवे स्टेशन पहुंचे और ट्रेन में बैठकर आलमनगर रेलवे स्टेशन पर उतरे। वहां से पैदल रविवार की सुबह घर पहुंचे।
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भाई वीरेंद्र का कहना है कि हमारा भाई वापस आ गया है, सभी लोग खुश हैं। घर में त्योहार जैसा माहौल है। ईश्वर ने मां कलावती की फरियाद सुन ली और उनका बेटा लौटा दिया। पूरा गांव उन्हें देखने के लिए जमा हो गया।
बेटे के गम में पिता का हो गया था स्वर्गवास
वीरेंद्र कुमार ने बताया कि काफी समय तक जब भाई वापस नहीं लाैटे तो उनकी तलाश में पिता परमेश्वर मुजफ्फरनगर पहुंचे लेकिन वहां शिवनाथ नहीं मिले। वहां से लाैटने पर पिता ने रहीमाबाद चौकी पर शिकायत की, लेकिन कोई पता नहीं लगा, तो आस ही छोड़ दी थी। वीरेंद्र का कहना है कि गांव के प्रतिनिधियों के साथ सोमवार को थाने पर जाकर मामले की शिकायत दर्ज कराएंगे। इस संबंध में इंस्पेक्टर रहीमाबाद अरुण कुमार त्रिगुनायक का कहना है कि थाने पर इस तरह की कोई सूचना नहीं है।
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रहीमाबाद के रूसेना खेड़ा गांव निवासी शिवनाथ करीब 16 साल पहले हरदोई के परिचित के साथ मुजफ्फरनगर मजदूरी करने गए थे। वहां दो माह तक ठेकेदार के पास काम किया। दिहाड़ी नहीं मिली तो वहां से भागकर मेरठ के टोल के पास शिवाया गांव पहुंचे। वहां राजेंद्र चौधरी अपने साथ घर ले गया। आरोप है कि राजेंद्र चौधरी का बेटा राहुल चौधरी उन्हें बंधक बनाकर रखता था। मजदूरी के रुपये भी नहीं देता था। उनसे भैंसों के तबेले में दूध निकलवाने और गोबर उठवाने के साथ पूरे तबेले की सफाई करवाते थे।
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साथी ने रोता देख तो दिये रुपये, दीवार कूदकर भागे
शिवनाथ ने बताया कि साथ में काम करने वाले हरदोई के रिंकू अक्सर उन्हें घर जाने के लिए रोता देखते थे। तरस खाकर उन्होंने 500 रुपये दिए तो वह दीवार कूदकर वहां से भागकर मेरठ रेलवे स्टेशन पहुंचे और ट्रेन में बैठकर आलमनगर रेलवे स्टेशन पर उतरे। वहां से पैदल रविवार की सुबह घर पहुंचे।
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भाई वीरेंद्र का कहना है कि हमारा भाई वापस आ गया है, सभी लोग खुश हैं। घर में त्योहार जैसा माहौल है। ईश्वर ने मां कलावती की फरियाद सुन ली और उनका बेटा लौटा दिया। पूरा गांव उन्हें देखने के लिए जमा हो गया।
बेटे के गम में पिता का हो गया था स्वर्गवास
वीरेंद्र कुमार ने बताया कि काफी समय तक जब भाई वापस नहीं लाैटे तो उनकी तलाश में पिता परमेश्वर मुजफ्फरनगर पहुंचे लेकिन वहां शिवनाथ नहीं मिले। वहां से लाैटने पर पिता ने रहीमाबाद चौकी पर शिकायत की, लेकिन कोई पता नहीं लगा, तो आस ही छोड़ दी थी। वीरेंद्र का कहना है कि गांव के प्रतिनिधियों के साथ सोमवार को थाने पर जाकर मामले की शिकायत दर्ज कराएंगे। इस संबंध में इंस्पेक्टर रहीमाबाद अरुण कुमार त्रिगुनायक का कहना है कि थाने पर इस तरह की कोई सूचना नहीं है।

शिवनाथ व उनसे मिलने के लिए घर पर जुटे ग्रामीण।