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धूल फांक रहे हैं सैकड़ों डिमॉलेशन ऑर्डर
ऋषि मिश्र/लखनऊ
Updated Wed, 20 Nov 2013 01:15 AM IST
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एक बाहुबली पूर्व विधायक का अवैध कॉम्प्लेक्स महानगर के छन्नी लाल चौराहे के पास है। इसे लैंडयूज के खिलाफ बनाया गया।
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कोर्ट के आदेश के बावजूद कॉम्लेक्स को नहीं तुड़वाया था। काफी दबाव पड़ा तो इसकी छत को कुछ जगह से तोड़ कर प्राधिकरण ने ध्वस्तीकरण के आदेश को पूरा किया।
एक इंटीग्रेटेड टाउनशिप में तालाब की भूमि को पाट कर निर्माण किया गया था। जिसको ढहाने का आदेश एलडीए और जिला प्रशासन को अदालत ने दिया।
मौके पर ध्वस्तीकरण के लिए टीम गई। जेसीबी कुछ देर के लिए चली। इसके बाद में ध्वस्तीकरण नहीं हुआ। फिर भी डिमॉलेशन की कंपलाइंस रिपोर्ट लगा दी। इसके बाद कोई कार्रवाई नहीं की गई।
होटल जेमिनी कॉन्टिनेंटल के भूमि विवाद में हाईकोर्ट ने ध्वस्तीकरण का आदेश दिया है। ऐसे सैकड़ों आदेश विभिन्न अदालतों और एलडीए की कोर्ट से किए जा चुके हैं, मगर अधिकांश मामलों में आज तक बस दिखावा ही किया गया है।
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प्राधिकरण की खुद की वेबसाइट पर 750 ऐसी बिल्डिंगों की सूची अपलोड है। ये सारे ध्वस्तीकरण के मामले हैं, मगर इसमें केवल सूची बना कर ही एलडीए ने इतिश्री कर ली है।
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इसी तरह से 21 अन्य बिल्डिंगों की सूची तो खुद एलडीए ने हाईकोर्ट में प्रेषित की थी, जिसमें डिमॉलेशन करने का हलफनामा दिया गया। इनमें से केवल दो बिल्डिंगों की छत भर तोड़ कर बाकी बिल्डिंग छोड़ दी गई।
कहीं कोई भी पूरा ध्वस्तीकरण नहीं किया जाता है। इस संबंध में प्राधिकरण का सीधा तर्क है कि, ध्वस्तीकरण करने के लिए जितने पुलिस बल की आवश्यकता होती है,नहीं मिलता है।
सूची बढ़ कर पहुंची दो हजार
प्राधिकरण के आधिकारिक सूत्रों की मानें तो जिस तरह से इंजीनियर अपनी रिपोर्ट दे रहे हैं और नोटिस जारी करते हैं।
यह सूची दो हजार से भी ऊपर पहुंच चुकी है। राजधानी में कम से कम दो हजार ऐसे अवैध निर्माण हैं, जिनको तत्काल ढहा दिए जाने की आवश्यकता है।
इसके बावजूद न तो प्राधिकरण इस सूची को अपडेट कर रहा है और न ही पुराने भवनों के खिलाफ कोई एक्शन लिया जा रहा है। कुल मिला कर प्राधिकरण में ऐसे अवैध निर्माणों को प्रश्रय देने का बड़ा खेल जारी है।
ध्वस्तीकरण रोकने का अर्थशास्त्र
ध्वस्तीकरण रोकने का एक बड़ा अर्थशास्त्र है। किसी भी अवैध बिल्डिंग के खिलाफ इससे बड़ी कार्रवाई नहीं की जा सकती है।
इसलिए ध्वस्तीकरण का आदेश जारी कर के और कुछ हिस्सा जिसको अवैध बताया जाता है,उसको ढहा कर ऑर्डर कंपलाइंस कर ली जाती है।
पूरी बिल्डिंग के बाकी अवैध निर्माण छोड़ दिए जाते हैं। कुछ दिनों में जब लोग भूल जाते हैं, तो बिल्डिंग फिर से बन जाती है। इसमें प्राधिकरण के अभियंताओं की जेब अच्छी खासी भरती है।
जेमिनी के मामले में ऑर्डर का इंतजार
एलडीए को जेमिनी कॉन्टिनेंटल होटल के मामले में कोर्ट ऑर्डर के प्राधिकरण तक पहुंचने का इंतजार है। इस बारे में अपर सचिव सीमा सिंह का कहना है कि उनको कोर्ट आदेश की विस्तृत जानकारी औपचारिक तौर पर नहीं मिली है।
जब आदेश मिलेगा तब इसमें गाइडलाइन तय की जाएगी। दूसरी ओर कोर्ट ऑर्डर के मुताबिक अगर होटल मालिक ने एक महीने के भीतर अवैध हिस्सा नहीं ढहाया तो प्राधिकरण खुद उसको ढहाएगा और इसका हर्जाना होटल मालिक से वसूलेगा।