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मोबाइल बंद न होता तो दो दिन पहले ही पकड़ा जाता दयाशंकर

Sat, 30 Jul 2016 02:36 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 30 Jul 2016 02:36 AM IST
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How dayashankar was caught by police.
दयाशंकर सिंह - फोटो : amar ujala

दयाशंकर सिंह दो दिन पहले ही लखनऊ पुलिस के हत्थे चढ़ जाता, लेकिन ऐन वक्त पर उसने अपना मोबाइल फोन स्विच ऑफ कर लिया। इसके बाद लखनऊ पुलिस और दयाशंकर के बीच चूहा-बिल्ली का खेल चलता रहा। दयाशंकर आगे-आगे चल रहा था और लखनऊ पुलिस पीछे-पीछे।

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बृहस्पतिवार रात जब उसकी लोकेशन बक्सर में थी, लखनऊ पुलिस वाराणसी क्रॉस कर रही थी। दयाशंकर कहीं फिर बचकर निकल न जाए, इसलिए एसएसपी मंजिल सैनी ने एसटीएफ के एसएसपी अमित पाठक से संपर्क किया। एसटीएफ की वाराणसी यूनिट के सब इंस्पेक्टर पुनीत परिहार को ऑपरेशन की जिम्मेदारी दी गई।
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सूत्रों ने बताया कि दयाशंकर सिंह मूल रूप से बक्सर का ही रहने वाला है। पुलिस से बचने के लिए वह बीती 22 जुलाई को गोरखपुर से ही अंडरग्राउंड हो गया था। पुलिस ने उसके परिचित और करीबियों के मोबाइल नंबर सर्विलांस पर ले रखे थे।
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26 जुलाई को दयाशंकर की लोकेशन मध्य प्रदेश के सतना में मिली। गोमतीनगर एसओ धीरेंद्र शुक्ला, सर्विलांस प्रभारी आलोक और सब इंस्पेक्टर हरिशंकर के नेतृत्व में पुलिस की तीन टीमें सतना पहुंचीं तो वह पांच-छह साथियों के साथ कार से रीवा चला गया।

इस तरह आया पुलिस की पकड़ में

How dayashankar was caught by police.
पुल‌िस ह‌िरासत में दयाशंकर - फोटो : amar ujala

रीवा से मिर्जापुर, चंदौली और वाराणसी होते हुए दयाशंकर बक्सर पहुंचा। उसे शायद पुलिस के पीछा करने का आभास था, इसलिए वह बीच-बीच में कुछ घंटों के लिए मोबाइल फोन स्विच ऑफ कर देता था। वाराणसी में बृहस्पतिवार दोपहर उसने मोबाइल फोन बंद कर लिया।

लखनऊ पुलिस, एसटीएफ और सर्विलांस की टीमें उसका मोबाइल फोन चालू होने का इंतजार करती रहीं और वह बक्सर पहुंच गया। बक्सर में शाम को उसका मोबाइल फोन ऑन हुआ, लेकिन तब तक दोनों के बीच फासला काफी बढ़ चुका था।

पुलिस को लगा कि दयाशंकर बक्सर से बलिया जाएगा। उसे बक्सर से निकलने से पहले ही दबोचने की रणनीति बनाई गई और तत्काल एसटीएफ के अधिकारियों से संपर्क किया गया। एसटीएफ की वाराणसी यूनिट ने बक्सर जाकर दयाशंकर की घेराबंदी कर ली। रात करीब साढ़े ग्यारह बजे लखनऊ पुलिस की टीमें भी वहां पहुंच गईं। हालांकि, दयाशंकर का ठिकाना पता नहीं लग सका। शुक्रवार सुबह बक्सर पुलिस की मदद ली गई और दोपहर करीब डेढ़ बजे उसे दबोच लिया गया।

गिरफ्तारी के पीछे पुलिस ने दी यह दलील
बचाव पक्ष के वकील का कहना था कि दयाशंकर के खिलाफ दर्ज एफआईआर में कोई भी धारा ऐसी नहीं है जिसमें सात साल तक की सजा हो। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार गिरफ्तारी नहीं की जा सकती। बचाव पक्ष की इस दलील पर लखनऊ पुलिस ने तर्क दिया कि दयाशंकर पर गंभीर धाराओं के छह मुकदमे दर्ज हैं। वह तफ्तीश में भी सहयोग नहीं कर रहा। जिस मामले को लेकर उसकी तलाश की जा रही है, वह राजनीतिक है। इससे कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है, इसलिए गिरफ्तारी जरूरी है। लखनऊ पुलिस की इस दलील के बाद उसकी गिरफ्तारी को हरी झंडी दी गई।

हिम्मत हो तो सरकार बसपा नेताओं को गिरफ्तार करे

How dayashankar was caught by police.

जेल जाने के दौरान दयाशंकर सिंह ने कहा कि लखनऊ के चौराहे पर मेरी 80 वर्षीय मां और 12 वर्षीय पुत्री और पत्नी पर जो टिप्पणी की गई है, वह क्षमा योग्य नहीं है। कहा कि अखिलेश सरकार में दम हो तो वह नसीमुद्दीन सिद्दीकी सहित अन्य बसपा नेताओं को गिरफ्तार कर पास्को लगाए।

कहा कि कानूनी लड़ाई से बाहर आने पर पहले मैं अपने परिवार को देखूंगा, उसके बाद राजनीति होगी। उन्होंने कहा कि बसपा कार्यकर्ताओं की देन है कि आज मेरी पुत्री दहशत में, पत्नी अस्पताल में तथा बूढ़ी मां सदमे में है। कहा कि मैं पहले भी बसपा सुप्रीमो मायावती का सम्मान करता था, आज भी करता हूं। ऐसी कोई टिप्पणी नहीं की, फिर भी माफी मांग ली।

कहा कि मेरी पत्नी परिवार के सम्मान के लिए लड़ रही है, उसे राजनीति से कोई सरोकार नहीं है। जो लोग मेरी पत्नी को चुनाव लड़ाने की बात कर रहे हैं, वो मेरी पत्नी का साथ दें, ताकि मेरे परिवार के सम्मान की रक्षा हो सके। भाजपा से निष्कासन के सवाल पर उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की।

गिरफ्तारी के वक्त खिंचवा रहा था फोटो

How dayashankar was caught by police.
demo pic

दयाशंकर को जब पकड़ा गया, उस वक्त वह फोटो खिंचवा रहा था। उसने बताया कि कोर्ट में हलफनामा पेश करना है जिसके लिए फोटो खिंचवाने आया था। दयाशंकर बक्सर के श्वेतनगर में अपने रिश्तेदार अरुण सिंह के घर पर ठहरा था। पुलिस शुक्रवार सुबह उसका ठिकाना ढूंढ़ सकी। दयाशंकर घर में है या नहीं, इसका पता नहीं लग पा रहा था।

ऐसे में पुलिस ने मकान की घेराबंदी कर ली। आसपास सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी टहलते रहे। दोपहर करीब डेढ़ बजे दयाशंकर बुलेट मोटरसाइकिल से घर से निकला और चीनी मिल मोहल्ले के मोड़ पर स्थित स्टूडियो पहुंचा। करीब दस मिनट बाद फोटो खिंचाकर वह जैसे ही बाहर निकला, पुलिस ने उसे दबोच लिया।

बचाव पक्ष की दलील पर मऊ ट्रांसफर हुआ केस
दयाशंकर के वकील ने कोर्ट में लखनऊ पुलिस पर सवाल उठाया था। वकील का कहना था कि दयाशंकर ने मऊ में बयान दिया था, इसलिए एफआईआर और विवेचना वहीं से होनी चाहिए। बचाव पक्ष के वकील की इस दलील पर कोर्ट ने लखनऊ में दर्ज एफआईआर और विवेचना मऊ ट्रांसफर करने के निर्देश दिए।

हाईकोर्ट सख्ती न दिखाती तो अभी भी गिरफ्तार न होता

How dayashankar was caught by police.

बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा है कि यदि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने दयाशंकर सिंह की याचिका खारिज कर सख्ती न दिखाई होती तो उसकी गिरफ्तारी अभी भी न होती।

मायावती ने एक बयान जारी कर कहा कि  प्रदेश की पुलिस को पहले दिन से यह जानकारी थी कि दयाशंकर कहां-कहां घूम रहा है। इसकेबावजूद सपा व भाजपा की मिलीभगत की वजह से उसे गिरफ्तार नहीं किया गया।

उन्होंने कहा कि उसे तब गिरफ्तार किया गया जब हाईकोर्ट ने दयाशंकर की रिट खारिज कर दी। उसे उसके मूल निवास बक्सर बिहार से गिरफ्तार किया गया। बसपा अध्यक्ष ने कहा कि एक ओर भाजपा दिखावे के लिए दयाशंर को पार्टी से निष्कासित करती है दूसरी ओर अगले ही दिन से उसके पक्ष में उतर आती है।

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