लखनऊ में नहीं बढ़ाया जाएगा हाउस टैक्स, पार्षदों का कोटा 95 लाख से बढ़कर 1.28 करोड़ रुपये हुआ
इस साल शहरवासियों पर गृहकर का बोझ नहीं बढ़ेगा। शनिवार को नगर निगम कार्यकारिणी ने हाउस टैक्स की दरें बढ़ाने का प्रस्ताव खारिज कर दिया। हालांकि, पहले से 350 करोड़ की देनदारी से जूझ रहे निगम के नए बजट में पार्षदों का कोटा 95 लाख से 1.28 करोड़ रुपये कर दिया। इनमें से 1.15 करोड़ विकास कार्यों और शेष 13 लाख रुपये जीएसटी पर खर्च होंगे।
वहीं, नए वित्तीय वर्ष में गृहकर जमा करने पर दी जाने वाली छूट और विशिष्ट पदक, सम्मान वाले प्रतिष्ठित व्यक्तियों, वीरता पदक धारक सैनिकों और उनके आश्रितों को हाउस टैक्स में छूट का प्रस्ताव भी पास कर दिया गया।
दो मार्च को पार्षद कोटा और गृहकर की दरें बढ़ाने के प्रस्ताव पर निगम प्रशासन, कार्यकारिणी सदस्यों और महापौर के बीच टकराव होने से बजट पास नहीं हो पाया था। इस कारण बैठक स्थगित कर दी गई थी। इसका सही कारण बताने की बजाए कार्यकारिणी उपाध्यक्ष और महापौर ने कहा था कि बजट के आंकड़ों में बाजीगरी की गई है। आय-व्यय के आंकड़े सही नहीं दिए गए हैं। निगम प्रशासन ने मनमानी की है, जबकि मामला पार्षद कोटा 95 लाख से 1.5 करोड़ करने का था।
शनिवार को जब प्रशासन ने पार्षद कोटा 95 लाख से 1.28 करोड़ रुपये (जीएसटी सहित) कर दिया तो बजट में की सारी गड़बड़ियां गायब हो गईं। कार्यकारिणी बैठक के बाद कार्यकारिणी उपाध्यक्ष रजनीश गुप्ता और महापौर ने न तो यूजर चार्ज और न किसी अन्य मद में गड़बड़ी का मामला उठाया। नगर आयुक्त इंद्रमणि त्रिपाठी ने बताया कि गृहकर दरें बढ़ाने का आया प्रस्ताव कार्यकारिणी ने पास नहीं किया। अब जो कार्यकारिणी का निर्णय है उसी पर अमल होगा।
हर पार्षद बनवा सकेगा एक करोड़ से सड़क
नगर आयुक्त ने बताया कि पार्षद पहले की तरह पांच-पांच लाख रुपये मार्ग प्रकाश, उद्यान और पेयजल कार्यों पर खर्च कर सकेंगे। शेष एक करोड़ से सड़क बनवा सकेंगे।
चालकों, सफाईकर्मियों का वेतन-मानदेय बढ़ा
कार्यदायी संस्था के जरिये तैनात सफाई कर्मचारियों व अन्य श्रमिकों को मानदेय 250 से 308 रुपये प्रतिदिन किया गया है। नगर निगम कार्यदायी संस्थाओं के जरिये कार्यरत चालकों का भी मानदेय 10,201 रुपये कर दिया गया है।
कोटा बढ़ाने को बढ़ा दिया गृहकर वसूली का लक्ष्य
बीते साल नगर निगम ने 350 करोड़ गृहकर वसूली का लक्ष्य रखा था, पर दिसंबर तक 172 करोड़ ही वसूल सका। इसके बाद भी पार्षद कोटा बढ़ाने को नए साल में वसूली का लक्ष्य 410 करोड़ कर दिया गया। हैरानी की बात यह है दो मार्च को बैठक स्थगित होने के बाद कार्यकारिणी उपाध्यक्ष रजनीश गुप्ता और महापौर संयुक्ता भाटिया ने यह कहा था कि निगम प्रशासन ने बजट में गृहकर का लक्ष्य मनमाना रख लिया है।
वसूली का लक्ष्य 400 करोड़ रखा गया है, जबकि अफसर खुद कह रहे हैं कि वे उतना नहीं वसूल सकते। इसके बाद सवाल उठाने वालों ने ही अपना कोटा बढ़वाने को गृहकर वसूली का लक्ष्य पहले से भी अधिक कर दिया। इसे लेकर अब सफाई दे रहे हैं कि जो छूटे मकान हैं उन्हें कर के दायरे में लाकर आय बढ़ाई जाएगी।
जलकल के 49 कर्मचारी होंगे नियमित
दो दशक से दैनिक वेतन पर काम कर रहे जलकल विभाग के 49 कर्मचारियों को स्थायी किया जाएगा। इसका प्रस्ताव कार्यकारिणी ने पास कर दिया है। महाप्रबंधक जलकल एसके वर्मा ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर सभी 49 कर्मचारियों को पूरा वेतनमान दिया जा रहा है।
उन्हें नियमित करने से भार नहीं पड़ेगा। नियमित होने से कर्मचारियों को लाभ यह होगा कि उन्हें रिटायर होने के बाद पेंशन का लाभ मिल जाएगा।