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डेंगू के इलाज में फिर लापरवाही, डॉक्टर मंगा रहे बाहर से दवाई
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गोंडा के जिला अस्पताल में बाहर की दवा दिखाता डेंगू का मरीज। -संवाद
- फोटो : GONDA
गोंडा। साहब, चार दिनों से डेंगू वार्ड में भर्ती हूं। इलाज के नाम पर सिर्फ ग्लूकोज ही चढ़ाया जाता है। बाकी दवाओं को बाहर से लाने की लिस्ट थमा दी जाती है। डॉक्टर साहब अब तक इलाज के लिए दो हजार रुपया की दवाएं बाजार से मंगवा चुके हैं। इतना ही नहीं डेंगू की जांच भी बाहर से ही कराना पड़ी। अपना यह दुखड़ा सुनाते हुए वार्ड में भर्ती मरीज फफक पड़ा। यह नजारा मंगलवार को जिला अस्पताल में डेंगू मरीजों के इलाज की जमीनी हकीकत जानने पहुंचे अपर निदेशक चिकित्सा डॉ. अनिल मिश्र के समक्ष दिखी।
उजागर हुआ कि डेंगू मरीजों के इलाज में जमकर लापरवाही बरती जा रही है। न केवल उनसे बाहर की दवाएं मंगाई जा रही हैं वरन डेंगू जांच के लिए भी अस्पताल से बाहर भेजा जा रहा है। वार्ड में भर्ती नर्सों ने भी खुलकर बताया कि यहां आने डॉक्टर मरीजों को बाहर की दवाएं लिख रहे हैं। इस पर सख्त नाराजगी जताते हुए बुखार व डेगूं पीड़ितों को बेहतर इलाज सुविधाएं मुहैया कराने का निर्देश दिया। वार्ड में भर्ती डेंगू मरीज राम प्रताप ने बताया कि 30 अक्तूबर को अस्पताल आया था।
यहां परीक्षण के बाद डॉक्टर ने उसे अस्पताल के बाहर से डेंगू की जांच कराने के लिए भेज दिया। जांच रिपोर्ट में डेंगू की पुष्टि के बाद उसे इलाज के लिए वार्ड में भर्ती कर लिया गया। आरोप लगाया कि अस्पताल में इलाज के नाम पर सिर्फ ग्लूकोज ही मुफ्त चढ़ रहा है। इसके अलावा डॉक्टर की लिखी पर्ची की कोई भी दवाएं अस्पताल के स्टोर से नहीं मिलती। इन्हें बाजार से खरीदने पर अब तक दो हजार रुपया खर्च हो चुका है। इसमें एक बार 834 रुपया व दूसरी बार 1175 रुपया की दवाई मंगानी पड़ी। आर्थिक स्थिति काफी कमजोर होने की बात कहते हुए वह अपर निदेशक के सामने ही फफक पड़ा। डेंगू वार्ड में ही भर्ती बेलसर विकासखंड के मंगुरा बाजार निवासी अमन मिश्र ने भी आरोप लगाया कि उन्हें भी इलाज कर रहे डॉक्टर ने बाहर की दवाएं लिखी हैं। मरीजों की पीड़ा सुनकर अपर निदेशक ने मौजूद डॉक्टरों व स्टॉफ नर्स को कड़ी फटकार लगाई।
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नर्सें बोलीं, बाहर की दवा लिख रहे डॉक्टर
अपर निदेशक के निरीक्षण के दौरान डेंगू वार्ड में तैनात स्टॉफ नर्स भी खुलकर डॉक्टरों के खिलाफ सामने आ खड़ी हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि डेंगू वार्ड में भर्ती मरीजों का डॉक्टर जानबूझ कर बाहर से खरीदी जाने वाली दवाएं लिख कर दे रहे हैं। कहा कि जिन दो डॉक्टरों ने बाहर की दवाएं लिखी है, उनकी डेंगू वार्ड में ड्यूटी भी नहीं लगी है। स्टाफ नर्सों का आरोप है कि उनके सामने ही डॉक्टर आकर मरीजों को बाहर से दवाएं लिख देते हैं। इस पर डेंगू वार्ड प्रभारी डॉ. कुलदीप पांडेय को वार्ड में इलाज की बेहतर सुविधा मुहैया कराने के साथ ही मरीजों को बाहर की दवाएं इत्यादि न लिखने की सख्त ताकीद भी की।
89 पहुंची डेंगू मरीजों की संख्या
जिले में डेंगू मरीजों की संख्या बढ़कर 89 पहुंच गई है। जिसमें दस मरीज जिला अस्पताल के डेंगू वार्ड में भर्ती है। डेंगू मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते डेंगू के मरीजों के लिए दस बेड का अतिरिक्त व्यवस्था किया गया है। मेडिकल वार्ड के बगल दस बेड को डेंगू मरीजों के लिए रिजर्व कर दिया गया हैं। जिला अस्पताल में स्थापित चार ऑक्सीजन प्लांट का निरीक्षण भी किया।
डेंगू के बढ़ने प्रकोप को देखते हुए स्वास्थ्य सुविधाओं को सक्रिय रखने का सख्त निर्देश दिया गया है। निरीक्षण के दौरान कुछ मरीजों की शिकायतें मिली। इसे गंभीरता से लेते हुए पूरे मामले में जांच करवाकर कार्रवाई का निर्देश दिया गया है।
-डॉ. अनिल मिश्र, एडी स्वास्थ्य
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उजागर हुआ कि डेंगू मरीजों के इलाज में जमकर लापरवाही बरती जा रही है। न केवल उनसे बाहर की दवाएं मंगाई जा रही हैं वरन डेंगू जांच के लिए भी अस्पताल से बाहर भेजा जा रहा है। वार्ड में भर्ती नर्सों ने भी खुलकर बताया कि यहां आने डॉक्टर मरीजों को बाहर की दवाएं लिख रहे हैं। इस पर सख्त नाराजगी जताते हुए बुखार व डेगूं पीड़ितों को बेहतर इलाज सुविधाएं मुहैया कराने का निर्देश दिया। वार्ड में भर्ती डेंगू मरीज राम प्रताप ने बताया कि 30 अक्तूबर को अस्पताल आया था।
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यहां परीक्षण के बाद डॉक्टर ने उसे अस्पताल के बाहर से डेंगू की जांच कराने के लिए भेज दिया। जांच रिपोर्ट में डेंगू की पुष्टि के बाद उसे इलाज के लिए वार्ड में भर्ती कर लिया गया। आरोप लगाया कि अस्पताल में इलाज के नाम पर सिर्फ ग्लूकोज ही मुफ्त चढ़ रहा है। इसके अलावा डॉक्टर की लिखी पर्ची की कोई भी दवाएं अस्पताल के स्टोर से नहीं मिलती। इन्हें बाजार से खरीदने पर अब तक दो हजार रुपया खर्च हो चुका है। इसमें एक बार 834 रुपया व दूसरी बार 1175 रुपया की दवाई मंगानी पड़ी। आर्थिक स्थिति काफी कमजोर होने की बात कहते हुए वह अपर निदेशक के सामने ही फफक पड़ा। डेंगू वार्ड में ही भर्ती बेलसर विकासखंड के मंगुरा बाजार निवासी अमन मिश्र ने भी आरोप लगाया कि उन्हें भी इलाज कर रहे डॉक्टर ने बाहर की दवाएं लिखी हैं। मरीजों की पीड़ा सुनकर अपर निदेशक ने मौजूद डॉक्टरों व स्टॉफ नर्स को कड़ी फटकार लगाई।
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नर्सें बोलीं, बाहर की दवा लिख रहे डॉक्टर
अपर निदेशक के निरीक्षण के दौरान डेंगू वार्ड में तैनात स्टॉफ नर्स भी खुलकर डॉक्टरों के खिलाफ सामने आ खड़ी हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि डेंगू वार्ड में भर्ती मरीजों का डॉक्टर जानबूझ कर बाहर से खरीदी जाने वाली दवाएं लिख कर दे रहे हैं। कहा कि जिन दो डॉक्टरों ने बाहर की दवाएं लिखी है, उनकी डेंगू वार्ड में ड्यूटी भी नहीं लगी है। स्टाफ नर्सों का आरोप है कि उनके सामने ही डॉक्टर आकर मरीजों को बाहर से दवाएं लिख देते हैं। इस पर डेंगू वार्ड प्रभारी डॉ. कुलदीप पांडेय को वार्ड में इलाज की बेहतर सुविधा मुहैया कराने के साथ ही मरीजों को बाहर की दवाएं इत्यादि न लिखने की सख्त ताकीद भी की।
89 पहुंची डेंगू मरीजों की संख्या
जिले में डेंगू मरीजों की संख्या बढ़कर 89 पहुंच गई है। जिसमें दस मरीज जिला अस्पताल के डेंगू वार्ड में भर्ती है। डेंगू मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते डेंगू के मरीजों के लिए दस बेड का अतिरिक्त व्यवस्था किया गया है। मेडिकल वार्ड के बगल दस बेड को डेंगू मरीजों के लिए रिजर्व कर दिया गया हैं। जिला अस्पताल में स्थापित चार ऑक्सीजन प्लांट का निरीक्षण भी किया।
डेंगू के बढ़ने प्रकोप को देखते हुए स्वास्थ्य सुविधाओं को सक्रिय रखने का सख्त निर्देश दिया गया है। निरीक्षण के दौरान कुछ मरीजों की शिकायतें मिली। इसे गंभीरता से लेते हुए पूरे मामले में जांच करवाकर कार्रवाई का निर्देश दिया गया है।
-डॉ. अनिल मिश्र, एडी स्वास्थ्य

गोंडा के जिला अस्पताल में डेंगू मरीज को लिखी गई बाहर की दवाओं को देखते डॉ. कुलदीप पांडेय। -संवाद- फोटो : GONDA