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शवगृह के एक फीसदी शवों में मिल रहा एचआईवी संक्रमण

Wed, 15 Dec 2021 02:06 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 15 Dec 2021 02:06 AM IST
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HIV infection being found in one percent dead bodies of the mortury
एचआईवी और एड्स के छिपे मामलों से विशेषज्ञों में हलचल। (फोटो ः प्रतीकात्मक) - फोटो : ??? ?????
सचिन त्रिपाठी
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लखनऊ की लगभग 50 लाख की आबादी में एचआईवी-एड्स के करीब पांच हजार मामले ही जानकारी में हैं। वैसे तो यह प्रतिशत सिर्फ 0.1 फीसदी है।
जबकि पीड़ित मरीजों की संख्या इससे कहीं अधिक है। केजीएमयू के शवगृह में पिछले करीब चार साल के दौरान लाए गए शवों में से एक फीसदी में एचआईवी-एड्स संक्रमण पाया गया है।
इनमें किसी के घरवालों को इसकी जानकारी नहीं थी और न ही वे एचआईवी-एड्स के इलाज के लिए बने केंद्र पर पंजीकृत थे। इस आंकड़े ने विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है।
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केजीएमयू के फॉरेंसिक मेडिसिन एंड टॉक्सोलॉजी विभाग में एमडी के पूर्व छात्र और वर्तमान में एराज मेडिकल कॉलेज में कार्यरत डॉ. राघवेंद्र सिंह ने वर्ष 2015 में विभाग के शिक्षकों के सहयोग से यह शोध शुरू किया था।
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इसमें वर्ष 2019 तक के आंकड़े शामिल किए गए हैं। इस दौरान केजीएमयू के शवगृह में लाए गए 972 शवों की जांच की गई। इसमें से एक फीसदी में एचआईवी-एड्स की पुष्टि हुई।
परिवार वालों से बातचीत में सामने आया कि इनमें शराब पीने वाले और घर से दूर रहने वालों की संख्या ज्यादा थी। विशेषज्ञों के अनुसार एचआईवी-एड्स के ये आंकडे़ चिंताजनक हैं, इसलिए जांच का दायरा और बढ़ाना चाहिए।
फिलहाल गर्भवती महिला और रक्तदान के लिए आने वाले व्यक्तियों के मामले में ही एचआईवी की जांच हो पा रही है।
हेपेटाइटिस-बी और सी से भी थे पीड़ित
शोध में यह भी पाया गया कि एचआईवी-एड्स से पीड़ित सभी मृतक हेपेटाइटिस-बी और सी से भी पीड़ित थे। डॉ. राघवेंद्र के अनुसार शवगृह में तैनात कुछ कर्मियों की मौत के बाद इस शोध की रूपरेखा तैयार की गई। इसमें केजीएमयू के फॉरेंसिक मेडिसिन एंड टॉक्सोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. एके वर्मा के साथ ही डॉ. एच सिंह, डॉ. आर कुमारी, डॉ. आर रुपानी और डॉ. एम सिंह शामिल हुए। इस शोध को श्रीलंका के जर्नल ऑफ फॉरेंसिक मेडिसिन, साइंस एंड लॉ में प्रकाशित किया गया है।

रक्तदान करने वालों में छह साल में तीन गुना बढ़ गए मामले
केजीएमयू के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार राजधानी में पिछले छह साल में एचआईवी के मामले तीन गुना तक बढ़े हैं। ज्यादातर व्यक्तियों में इसके कोई लक्षण नहीं मिले। रक्तदान के बाद जांच में संक्रमण की पुष्टि हुई। केजीएमयू में हर साल औसतन 70 हजार यूनिट के आसपास रक्त आता है। जांच में पता चला कि वर्ष 2021 में अगस्त महीने तक कुल यूनिट में से 0.21 प्रतिशत लोग एचआईवी संक्रमित हैं। कोरोना संक्रमण काल के दौरान वर्ष 2020 में भी यह प्रतिशत 0.16 फीसदी था। जब पिछले रिकॉर्ड जांचे गए तो पता चला कि वर्ष 2016 से वर्तमान वर्ष तक एचआईवी के मामलों में तीन गुना बढ़ोतरी हो चुकी है। वर्ष 2016 में एचआईवी संक्रमितों का प्रतिशत .07 फीसदी था।
एड्स होने के कारण
- एचआईवी पॉजिटिव व्यक्ति के साथ असुरक्षित यौन संबंध बनाना।
- खून चढ़ाने के दौरान एचआईवी संक्रमित खून का इस्तेमाल।
- एचआईवी से ग्रसित मां से बच्चे में जा सकता है वायरस।
- किसी डॉक्टर द्वारा डिस्पोजेबल सिरिंज का इस्तेमाल न करना।
- नाई या टैटू की शॉप पर संक्रमित चीजों के इस्तेमाल से।
एड्स के लक्षण :
- लंबे समय तक बुखार रहना
- अधिक समय तक डायरिया
- सूखी खांसी होना
- मुंह में सफेद छाले पड़ना
- थोड़े काम में ज्यादा थकान होना
- लगातार वजन कम होना
- याददाश्त में कमी आना
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