केजीएमयू के डॉक्टरों का कारनामा, पेशाब की थैली में कैंसर सर्जरी कर रचा इतिहास
- बताया जाता है कि उत्तर भारत में अपने आप में यह एक अलग तरह की सर्जरी है
- इस सर्जरी से घुट-घुट कर जी रहे मरीज को जहां नई जिंदगी मिली वहीं, उसके पुरुषत्व पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा
- इनके निकालने से मरीज के पुरुषत्व के साथ-साथ बच्चा पैदा करने की क्षमता भी खत्म हो जाती है
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पेशाब की थैली में कैंसर की सर्जरी कर मरीज को नई जिंदगी देने वालों केजीएमयू के डॉक्टरों ने फिर एक नया इतिहास रचा है। बताया जाता है कि उत्तर भारत में अपने आप में यह एक अलग तरह की सर्जरी है।
इस सर्जरी से घुट-घुट कर जी रहे मरीज को जहां नई जिंदगी मिली वहीं, उसके पुरुषत्व पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा। चिकित्सकीय भाषा में इसे रेडिकल सिस्टक्टमी कहा जाता है।
रायबरेली निवासी 32 वर्षीय सचिन (बदला हुआ नाम) पेशाब में खून आने और मूत्र त्याग (यूरिन डिस्चार्ज) करते समय तेज दर्द से परेशान रहता था। स्थानीय डॉक्टरों ने उसे केजीएमयू के यूरोलॉजी विभाग में जाने की सलाह दी।
लगभग 20 दिन पहले वह विभाग की ओपीडी में डॉ. विश्वजीत सिंह से मिला। जांच करायी तो पता चला कि पेशाब की थैली में गांठ है। सभी दिक्कतें उसकी ही वजह से हैं।
डॉ. विश्वजीत सिंह ने बताया कि सचिन की पेशाब की थैली निकालने का फैसला किया गया लेकिन बड़ी दिक्कत ये थी कि पेशाब की थैली निकालने के साथ ही मरीज का प्रोस्टेट, सेमिनल वेजिकल, वास डिफरेंस और नर्वाई इरीजेंटिस भी निकालना पड़ता है।
पुरुषत्व के साथ जनन क्षमता पर भी पड़ता है असर
इनके निकालने से मरीज के पुरुषत्व के साथ-साथ बच्चा पैदा करने की क्षमता भी खत्म हो जाती है। फिर सचिन की उम्र मात्र 32 वर्ष थी। इसलिए आम मरीजों की तरह उसकी सर्जरी नहीं की जा सकती थी।
इस केस पर काफी विचार विमर्श के बाद तय किया गया कि सर्जरी के समय उसके जनन तंत्र संबंधी सभी अंगों को बचाया जाएगा, जिससे उसके पुरुषत्व पर कोई असर नहीं पड़े।
कैंसर से नहीं मरना चाहता
सचिन ने कई चिकित्सकों से संपर्क किया। सभी ने पेशाब की थैली को निकलवाना ही बताया। साथ ही यह भी बताया कि इस सर्जरी के बाद उसका पुरुषत्व खत्म हो जाएगा।
घुट-घुट कर जी रहा सचिन किसी तरह हिम्मत कर केजीएमयू पहुंचा। सचिन ने डॉक्टरों से बताया कि वह इस सर्जरी का परिणाम जानता है, लेकिन कैंसर से मरने से अच्छा है कि वह जिंदा तो रहेगा। इस पर डॉक्टरों ने उसकी मनोदशा देखकर सर्जरी थैली को कैंसर समेत निकाल दिया।
चार घंटे चली सर्जरी, कैंसर ग्रस्त थैली निकाल दी
प्रो. विश्वजीत सिंह ने बताया कि दो सप्ताह पहले सचिन की सर्जरी की गई। लगभग चार घंटे तक चली सर्जरी के दौरान उसकी कैंसर ग्रस्त पेशाब की थैली को निकाल दिया गया। साथ ही प्रोस्टेट, सेमिनल वेजिकल, वास डिफरेंस, नर्वाई इरीजेंटिस को भी बचा लिया गया।
इसके बाद छोटी आंत को काटकर एक कृत्रिम पेशाब की थैली बनाकर प्रत्यारोपित की गई। दो सप्ताह से भर्ती सचिन की स्थिति अब ठीक है। उसके सभी टांके काट दिए गए हैं। यही नहीं उसके जननांग को भी कोई क्षति नहीं पहुंची।
प्रो. विश्वजीत सिंह ने बताया कि सचिन की पेशाब की थैली में सेकेंड स्टेज का कैंसर था। पेशाब की थैली पूरी तरह से निकाल देने के बाद अब उसे कैंसर से निजात मिल गई।
सभी जनन तंत्र पूर्ण सुरक्षित
डॉ. राहुल जनक सिन्हा ने बताया कि सामान्य सर्जरी में पेशाब की थैली निकालने के साथ ही प्रोस्टेट, सेमिनल वेजिकल, वास डिफरेंस, नर्वाई इरीजेंटिसनिकाल दिया जाता है। इससे मरीज में नपुंसकता, संतानहीनता, पुरुषत्व की कमी हो जाती है। व्यक्ति यौन संबंध बनाने लायक भी नहीं रह जाता है। जबकि सचिन को इस तरह की कोई दिक्कत नहीं होगी।
जानें इन अंगों व उनके कार्य के बारे में
सेमिनल वेजिकल- इसमें वीर्य इकट्ठा होता है।
नर्वाई इरीजेंटिस- यह पुरुष जननांग में स्तंभन पैदा करता है।
वास डिफरेंस - इसका कार्य प्रजनन में सहयोग करना है।
ये थी सर्जरी करने वाली टीम
प्रो. विश्वजीत सिंह, डॉ. राहुल जनक सिन्हा, डॉ. मधुसूदन, डॉ. सिद्धार्थ, एनेस्थेटिस्ट डॉ. सरिता सिंह, नर्सिंग स्टाफ पीयूष।