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हिंदी हैं हम...: मिलिए इन नई सुबह के उगते सूरज से, नई पीढ़ी में जगा रहे हिंदी प्रेम
Thu, 20 Aug 2020 03:41 PM IST
ishwar ashish
अभिषेक सहज, अमर उजाला, लखनऊ
अभिषेक सहज, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Thu, 20 Aug 2020 03:41 PM IST
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अनन्या राय, मृत्युंजय, प्रियांशु
- फोटो : amar ujala
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हम नई सुबह के उगते सूरज हैं
आओ! प्रभात के गीत साथ गाएं
अंधियारों की मुंडेर पर उग जाएं...
कवि कुमार दिनेश प्रियमन की ये पंक्तियां हिंदी के नव हस्ताक्षरों पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं। जहां एक ओर कॉन्वेंट स्कूलों की बाढ़ में आज की युवा पीढ़ी हिंदी और साहित्य से दूर होती जा रही है, वहीं इस विषम काल में कुछ नव हस्ताक्षर हिंदी की नई सुबह की कहानी लिख रहे हैं। हिंदी मंचों पर ये युवा अपनी सशक्त उपस्थिति से नई पीढ़ी में हिंदी प्रेम जगा रहे हैं। आज हम कुछ ऐसे ही हिंदी रचनाकारों केबारे में बात कर रहे हैं जो हिंदी के उज्ज्वल भविष्य का संकेत बनकर उभर रहे हैं।
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आओ! प्रभात के गीत साथ गाएं
अंधियारों की मुंडेर पर उग जाएं...
कवि कुमार दिनेश प्रियमन की ये पंक्तियां हिंदी के नव हस्ताक्षरों पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं। जहां एक ओर कॉन्वेंट स्कूलों की बाढ़ में आज की युवा पीढ़ी हिंदी और साहित्य से दूर होती जा रही है, वहीं इस विषम काल में कुछ नव हस्ताक्षर हिंदी की नई सुबह की कहानी लिख रहे हैं। हिंदी मंचों पर ये युवा अपनी सशक्त उपस्थिति से नई पीढ़ी में हिंदी प्रेम जगा रहे हैं। आज हम कुछ ऐसे ही हिंदी रचनाकारों केबारे में बात कर रहे हैं जो हिंदी के उज्ज्वल भविष्य का संकेत बनकर उभर रहे हैं।
कम उम्र में ही गीतों से बनाई पहचान
रामायण धर द्विवेदी
- फोटो : amar ujala
केवल 21 वर्ष की उम्र में ही रामायण धर द्विवेदी ने अपने हिंदी गीतों के जरिए अपनी अलग पहचान बना ली है। रामायण के गीतों को कई बड़े साहित्यकारों की सराहना मिल चुकी है। पॉलीटेक्निक से सिविल में डिप्लोमा कर चुके बस्ती के मूल निवासी रामायण इस समय लखनऊ में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। रामायण ने बताया कि उन्हें गीत लिखने की प्रेरणा अपने स्वर्गीय बाबा जी से मिली जो अक्सर भजन गाया करते थे। इसके बाद एक कवि सम्मेलन सुनने के बाद रामायण ने हिंदी गीत लिखना शुरू किए और मात्र 2-3 वर्षों में ही उनके कई गीत चर्चित हो गए। यशोधरा पर लिखा गीत उनका इन दिनों काफी चर्चा में है।
रामायण के चर्चित गीतों के अंश
गुलमोहर गेंदा गुलाब के,
मन में लाखों फूल खिले,
उतने गीत लिखे हैं हमने,
उनसे जितनी बार मिले।
-----------------
तुम्हें ज्ञात था पुत्र तुम्हारा,
एक दिवस वनवासी होगा।
राजमहल में उसका होना,
सत्य नहीं, आभासी होगा
राजन! फिर भी तुमने उसका ब्याह रचाया
यशोधरा की खुशियों पर क्यों दांव लगाया?
रामायण के चर्चित गीतों के अंश
गुलमोहर गेंदा गुलाब के,
मन में लाखों फूल खिले,
उतने गीत लिखे हैं हमने,
उनसे जितनी बार मिले।
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तुम्हें ज्ञात था पुत्र तुम्हारा,
एक दिवस वनवासी होगा।
राजमहल में उसका होना,
सत्य नहीं, आभासी होगा
राजन! फिर भी तुमने उसका ब्याह रचाया
यशोधरा की खुशियों पर क्यों दांव लगाया?
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काव्य प्रतियोगिताओं से हिंदी को बढ़ावा
मृत्युंजय बाजपेई
- फोटो : amar ujala
केवल 18 वर्ष के मृत्युंजय बाजपेई को कविताएं लिखने का शौक महाकवि दिनकर से प्रभावित होकर कम उम्र में ही लग गया। काव्य प्रतियोगिताओं में कई पुरस्कार भी जीते। कुछ समय पहले ही उन्होंने कलमधारी फाउंडेशन के जरिए लखनऊ की नई प्रतिभाओं को मंच देना शुरू किया जहां सैकड़ों युवा अब तक अपनी प्रतिभा दिखा चुके हैं। मृत्युंजय 12 कक्षा के छात्र हैं और हिंदी कविताओं के जरिए नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
नए रचनाकारों को दिया मंच
प्रियांशु और सुधांशु वात्सल्य
- फोटो : amar ujala
प्रियांशु वात्सल्य और सुधांशु वात्सल्य अपनी पढ़ाई के साथ-साथ हिंदी काव्य मंचों पर सक्रिय हैं। वात्सल्य फाउंडेशन के माध्यम से इन दोनों भाइयों ने हजारों नए रचनाकारों को मंच दिया और खुद भी अपने लेखन से नई पीढ़ी को प्रभावित किया है। 20 वर्षीय प्रियांशु बीकॉम द्वितीय वर्ष तो 21 वर्षीय सुधांशु बीएससी द्वितीय वर्ष के छात्र हैं।
भानु सक्सेना ने ओज के कवि के रूप में जगह बनाई
भानु सक्सेना
- फोटो : amar ujala
मूल रूप से शाहजहांपुर जिले से ताल्लुक रखने वाले 21 वर्षीय भानु सक्सेना राजधानी के काव्य मंचों पर बहुत कम समय में अपनी पहचान बनाने में सफल हुए हैं। भानु की शैली ओज की है और उनकी देशप्रेम में लिपटी ओज की कविताएं सुनने वालों के रोंगटे खड़े कर देती हैं।
हिंदी को बढ़ावा देने के लिए लेख व कविताओं का सहारा
अनन्या राय
- फोटो : amar ujala
21 साल की अनन्या राय लखनऊ की रहने वाली हैं और यूपीएससी की तैयारी के साथ सामाजिक सरोकारों से भी जुड़ी हुई हैं। वे हिंदी को बढ़ावा देने के लिए काव्य व लेखन के क्षेत्र में काफी सक्रिय हैं। उनकी कविताएं जहां स्त्री मन की व्यथा का चित्र खींचती हैं तो उनके लेख सामाजिक मुद्दों पर झकझोर देने वाले प्रयास का हिस्सा हैं।
डॉ अमिता दुबे
- फोटो : amar ujala
‘हिंदी हैं हम’ अभियान एक बेहतरीन शुरुआत
हिंदी से हमारी पहचान है और इसका संबंध हमारी अस्मिता से है। हम अलग-अलग किसी भी भारतीय भाषा को मातृभाषा के रूप में प्रयोग करने वाले हो सकते हैं लेकिन जब हमें विश्व में एक भारतीय के रूप में पहचान की आवश्यकता होती है, तब हमारी भाषाई पहचान हिंदी भाषी के रूप में ही होती है। हिंदी में सभी भारतीय भाषाओं का समावेश देखा जा सकता है। मेरी अपील है कि हिंदी के उत्थान के लिए अमर उजाला के ‘हिंदी हैं हम’ अभियान से ज्यादा से ज्यादा लोग जुड़ें। - डॉ. अमिता दुबे, संपादक- उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान
हिंदी से हमारी पहचान है और इसका संबंध हमारी अस्मिता से है। हम अलग-अलग किसी भी भारतीय भाषा को मातृभाषा के रूप में प्रयोग करने वाले हो सकते हैं लेकिन जब हमें विश्व में एक भारतीय के रूप में पहचान की आवश्यकता होती है, तब हमारी भाषाई पहचान हिंदी भाषी के रूप में ही होती है। हिंदी में सभी भारतीय भाषाओं का समावेश देखा जा सकता है। मेरी अपील है कि हिंदी के उत्थान के लिए अमर उजाला के ‘हिंदी हैं हम’ अभियान से ज्यादा से ज्यादा लोग जुड़ें। - डॉ. अमिता दुबे, संपादक- उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान
नई पीढ़ी अभियान से जुड़कर हिंदी को करे सशक्त
वत्सला पांडेय
- फोटो : amar ujala
हिंदी देश की आत्मा है। यह सम्प्रेषण का सबसे सशक्त माध्यम है। न सिर्फ शिक्षा और कविता के क्षेत्र में बल्कि रेडियो, टीवी और सोशल साइट पर हिंदी ने मुझे पहचान दिलाई। आज जो भी हूं हिंदी की वजह से ही हूं। अमर उजाला के ‘हिंदी हैं हम’ अभियान की जितनी सराहना की जाए, कम है क्योंकि इस अभियान के जरिए खासकर युवा पीढ़ी बहुत ज्यादा प्रभावित हो रही है। यह अभियान निश्चित तौर पर हिंदी को अपनी सशक्त पहचान दिलाने में बहुत कारगर सिद्ध होगा। - वत्सला पांडेय, शिक्षिका व कवयित्री