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कानून व्यवस्था पर दाखिल हुई याचिका, खारिज
विष्णु मोहन/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Wed, 25 Jun 2014 07:59 AM IST
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सूबे की कानून व लोक व्यवस्था को दुरुस्त किए जाने के आग्रह वाली एक जनहित याचिका को हाईकोर्ट लखनऊ पीठ ने खारिज कर दिया।
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कोर्ट ने आदेश में कहा कि यह पीआईएल सुप्रीम कोर्ट के निर्धारित मानदंडों की कसौटी पर खरी नहीं उतरी, ऐसे में यह ग्राह्य नहीं है और इसमें मांगी गई राहत पर गौर नहीं किया जा सकता।
हालांकि अदालत ने आदेश में स्पष्ट कहा कि याचिका का खारिज किया जाना, इसमें उठाए गए मुद्दों के खिलाफ या पक्ष में किसी मत की पुष्टि या अन्यथा के रूप में नहीं माना जाएगा।
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इससे पहले 18 जून को कोर्ट ने पीआईएल पर शुरुआती सुनवाई के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था।
जस्टिस इम्तियाज मुर्तजा व जस्टिस राजन राय की ग्रीष्मावकाश कालीन खंडपीठ ने यह आदेश हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस समेत 5 अन्य स्थानीय महिला अधिवक्ताओं की याचिका पर दिया।
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याचिका में प्रदेश में बिना देरी के घटनाओं की प्राथमिकी दर्ज किए जाने और त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए जाने का भी आग्रह किया गया था।
साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार को यह भी निर्देश दिए जाने की गुजारिश की गई थी कि प्रदेश के थानों में मेरिट के आधार पर पुलिस अफसरों की तैनाती की नीति बनाई जाए और इसे मंजूरी के लिए कोर्ट में पेश किया जाए।
याचियों के अधिवक्ता हरिशंकर जैन की दलील थी कि प्रदेश में दुराचार की बढ़ रही घटनाओं व अपराध से सूबे के लोगों का जीवन व स्वतंत्रता खतरे में पड़ गई है।
उधर, राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता बुलबुल गोदियाल ने यह कहते हुए पीआईएल का कड़ा विरोध किया था कि यह सिर्फ अखबारों में छपी खबरों पर आधारित है लिहाजा सुनवाई किए जाने लायक नहीं है।
यह याचिका राजनीति से प्रेरित है। मामले की सुनवाई के समय यूपी के महाधिवक्ता विनयचंद्र मिश्र और मुख्य स्थायी अधिवक्ता आईपी सिंह भी पेश हुए थे।