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हाईकोर्ट ने दिया बड़ा आदेश, रेप पीड़िता करा सकेगी गर्भपात

Wed, 09 Sep 2015 11:55 AM IST
Updated Wed, 09 Sep 2015 11:55 AM IST
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highcourt permission to rape victim for abortion

दुष्कर्म के बाद गर्भवती हुई 15 वर्षीय किशोरी को अब उम्र भर इस घिनौने कृत्य का दाग लेकर नहीं जीना होगा। अदालत ने उसका गर्भपात कराने की इजाजत दे दी है।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने मंगलवार को इसके लिए लखनऊ की किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के तीन चिकित्सकों की टीम बनाने का निर्देश दिया है। यह टीम किशोरी का मेडिकल परीक्षण और काउंसलिंग करेगी।
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सुरक्षित पाए जाने पर गर्भपात करवाएगी। इससे पहले पीड़ित किशोरी के पिता की अनुमति ली जाएगी। किशोरी के पिता ने गर्भपात की अनुमति के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।
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हाईकोर्ट के जस्टिस शबीहुल हसनैन और जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय की खंडपीठ ने कहा कि किशोरी के चिकित्सकीय परीक्षण, फॉलो-अप, सर्जरी व ऑपरेशन का खर्च केजीएमयू खुद वहन करे।

याचिका में पीड़िता के पिता ने कहा था कि अगर उसकी बेटी गर्भपात नहीं करवा पाती है तो उसे जीवन भर इस कलंक के साथ जीना होगा। यह उसे हर समय उसके साथ हुए घृणित व्यवहार की याद दिलाता रहेगा। ऐसे में गर्भपात की अनुमति दे देनी चाहिए।

गर्भपात से लड़की के जीवन को ना हो खतरा

highcourt permission to rape victim for abortion

हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि केजीएमयू की टीम परीक्षण में पता लगाएगी कि गर्भपात से उसके जीवन पर क्या खतरे पैदा हो सकते हैं। अगर सुरक्षित गर्भपात संभव है तो किशोरी के पिता की सहमति से सर्जिकल ऑपरेशन किया जाएगा।

अगर टीम में गर्भपात पर एक राय नहीं बनती है तो निर्णय बहुमत से होगा। यह खर्च बाद में प्रदेश सरकार चुकाएगी। खंडपीठ ने केजीएमयू के स्त्री रोग और प्रसूति विभाग को किशोरी के मेडिकल जांच का निर्देश दिया है।

आदेश केजीएमयू के संबंधित विभागों और रजिस्ट्रार को 9 सितंबर तक भेजने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई के लिए 15 सितंबर को होगी।

कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि गर्भपात कराने पर केजीएमयू प्रशासन भ्रूण की कोशिकाएं सुरक्षित रखेगा ताकि भविष्य में डीएनए पहचान के लिए काम में लिया जा सके।

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