स्वाइन फ्लू पर सरकार के रूख से हाईकोर्ट सख्त!
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हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राज्य सरकार को स्वाइन फ्लू पर प्रभावी नियंत्रण के लिए अधिक से अधिक टेस्ट लैब खोलने के निर्देश दिए हैं। साथ ही इसकी रोकथाम के उपाय करने पर खास तौर से ध्यान देने को कहा है।
हाईकोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति राजन रॉय की खंडपीठ ने गुरुवार को स्वाइन फ्लू से लोगों की हिफाजत के आग्रह वाली एक लंबित पीआईएल पर यह आदेश दिया।
उधर, राज्य सरकार की अपर महाधिवक्ता बुलबुल गोदियाल ने अदालत के पहले के आदेशों की पालन रिपोर्ट हलफनामे के साथ पेश की। सूबे की डीजी हेल्थ विजय लक्ष्मी और लखनऊ के सीएमओ डॉ. एसएनएस यादव भी अदालत में पेश हुए।
कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई पर 16 अप्रैल को डीजी हेल्थ को फिर उपस्थित होने को कहा है। साथ ही सूबे के सरकारी अस्पतालों के आइसोलेशन वार्डों का ब्यौरा भी तलब किया है।
इसके पहले ये दिए थे आदेश
इससे पहले अदालत ने हर सरकारी अस्पताल में स्वाइन फ्लू की जांच के इंतजाम करने और इसकी रोकथाम के लिए लोगों को जरूरी दवाइयां व खास मास्क मुहैया करवाने के निर्देश दिए थे।
कोर्ट ने डीजी हेल्थ समेत लखनऊ के सीएमओ को तलब कर पहले के आदेशों की पालन रिपोर्ट पेश करने के निर्देश राज्य सरकार को दिए थे।
सैफई, इटावा व कानपुर में टेस्ट लैब की मंजूरी
डीजी हेल्थ ने अदालत को बताया कि स्वाइन फ्लू की जांच के लिए सैफई, इटावा व कानपुर में टेस्ट लैब बनाने की मंजूरी मिल गई है।
गोरखपुर, मेरठ, आगरा व झांसी में टेस्ट लैब बनाने पर विचार किया जा रहा है। पीड़ितों को जरूरी दवाएं मुहैया कराई जा रही हैं।
याची ने कहा, अब भी बरती जा रही लापरवाही
याची त्रिपुरेश की वकील नूतन ठाकुर ने अस्पतालों के आइसोलेशन वार्डों की खस्ता हालत और स्वाइन फ्लू के प्रति बरती जा रही कथित लापरवाही की तरफ अदालत का ध्यान आकृष्ट कराया।
उन्होंने आरोप लगाया कि सूबे में स्वाइन फ्लू से अब तक सिर्फ 16 मौतें होने की बात कहा जाना गलत है, क्योंकि इससे कहीं अधिक लोगों की मृत्यु इससे हुई है।