इलाहाबाद हाईकोर्टः प्रदर्शन जरुर करें लेकिन अभद्र भाषा का प्रयोग न करें नेता
‘हमारी परंपराएं और मूल्य गौरवशाली हैं, हमारी सभ्यता महान है, हमारे संतों-सुधारकों-वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों ने न केवल उन्हें समृद्ध किया बल्कि संजोए रखा। लेकिन जब उनकी धज्जियां उड़ाई जाती हैं तो उसका असर पूरे समाज, खासकर बच्चों पर बहुत गहरा पड़ता है।
बच्चे इनका मतलब तलाशते हैं। जब वे इनका मतलब पूछते हैं तो बड़ों के लिए जवाब देना मुश्किल हो जाता है।’ हजरतगंज में बसपा के प्रदर्शन के दौरान नेताओं की बदजुबानी पर सख्त रुख अपनाते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कहा जो हुआ वह शर्मनाक, हम मूकदर्शक नहीं बने रह सकते।
जस्टिस अमरेश्वर प्रताप साही और जस्टिस विजय लक्ष्मी की खंडपीठ ने ममता जिंदल की याचिका पर सुनवाई के दौरान प्रदर्शन में प्रयोग किए शब्दों पर कड़ी नाराजगी जताई।
हाईकोर्ट ने इस मुद्दे पर अवध बार एसोसिएशन के जरिये सभी वरिष्ठ अधिवक्ताओं को आमंत्रित किया है कि वे आगे आएं और कोर्ट को इस मसले पर अपने ईमानदार अभिमत से मदद करें ताकि कोर्ट याचिका में उठाए गए मुद्दे पर वाजिब निर्णय ले सके
घटिया भाषा का उपयोग करने वालों पर हो कार्रवाई
57 साल की ममता जिंदल ने याचिका में कहा है कि उनका बेटा जो अभी बालिग भी नहीं हुआ है, हजरतगंज में हुए प्रदर्शन में इस्तेमाल की गई भाषा और नारों के अर्थ पूछता है।
वे उसके सवालों के माकूल जवाब नहीं दे पातीं। उनका आरोप है कि इस तरह से घटिया भाषा से उनके बच्चे के मन पर बेहद गंभीर असर हुआ है और यह लंबे समय तक बना रहेगा।
वह अभिव्यक्ति और बोलने की स्वतंत्रता के मुद्दे को लेकर सही सोच नहीं बना पाएगा। ममता ने कोर्ट से गुहार लगाई है कि वह ऐसी घटिया भाषा का उपयोग करने वालों पर कार्रवाई करे।
अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता एक महिला हैं जो इस दुर्व्यवस्था भरे माहौल में कानूनी जवाब तलाश रही हैं कि केवल अधिकार या मूल अधिकार ही नहीं, उसके बच्चे का भविष्य बचाने की जरूरत है। ताकि इसके लिए प्रशासन को कानूनी तौर पर उचित कदम उठाए।