झूठे हलफनामे पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा- क्यों न हो मुख्य सचिव पर कार्रवाई
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सरकारी जमीन का मुआवजा हड़पने के सपा एमएलसी मजहर अली खान उर्फ बुक्कल नवाब के मामले में अफसरों की हीलाहवाली पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने कहा कि क्यों न मुख्य सचिव राहुल भटनागर की ओर से दाखिल हलफनामे को झूठा माना जाए और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए?
अदालत ने प्रमुख सचिव राजस्व से भी पूछा है कि क्यों न हाईकोर्ट के आदेशों की नाफरमानी पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए? दोनों अफसर सात फरवरी को अपना पक्ष रखेंगे।
बृहस्पतिवार को सुनवाई करते हुए जस्टिस सुधीर अग्रवाल और जस्टिस राकेश श्रीवास्तव ने कहा कि यह मामला जनहित का है, जिसमें गोमती की जलमग्न भूमि और वेटलैंड को निजी स्वामित्व की भूमि करार दे दिया गया।
लखनऊ जिले के अधिकारियों और राजस्व विभाग के अधिकारियों ने भारी मात्रा में जनता का पैसा मुआवजे के तौर पर कुछ लोगों को दे दिया। यह सब बिना गहन जांच किया गया। यह भी नहीं देखा गया कि जमीन सच में निजी स्वामित्व की है या सरकारी।
डेढ़ महीने पड़ी रही फाइलें, ढाई महीने में समिति बनी
हाईकोर्ट में मुख्य सचिव राहुल भटनागर की ओर से बृहस्पतिवार को तीन विशेष सचिवों शिवजनम चौधरी (आवास व शहरी नियोजन), शैलेंद्र सिंह (नगर विकास) व शिव श्याम मिश्रा (राजस्व) ने हलफनामे दिए।
इनमें मुख्य सचिव ने स्वीकारा कि चारों को क्रमश: 26 अक्टूबर, 27 अक्टूबर, 28 अक्टूबर और चार नवंबर 2016 को आदेश की प्रति मिल गई थी। इन पर आए पत्रों पर ‘शीर्ष वरीयता’ और ‘हाईकोर्ट से संबंधित’ जैसे शब्द भी लिखे थे।
जस्टिस सुधीर अग्रवाल और जस्टिस राकेश श्रीवास्तव ने कहा कि इन सबके बावजूद फाइलें करीब डेढ़ महीने तक प्रोसेस में पड़ी रहीं। 29 दिसंबर को इन्हें मुख्य सचिव को सहमति के लिए भेजा गया, उन्होंने उसी दिन सहमति दे दी। इसमें यह नहीं बताया गया कि जांच कमेटी बनाने का आदेश कब दिया गया। लेकिन समिति बनाने का ड्राफ्ट ऑर्डर पांच जनवरी 2017 को तैयार किया गया।
इस पर 11 जनवरी को प्रमुख सचिव राजस्व अरविंद सिंह ने सहमति दी और सरकार ने 12 जनवरी को मंजूरी दी। लेकिन समिति के चेयरमैन जय प्रकाश सागर 14 जनवरी को पंजाब चुनाव के पर्यवेक्षक के तौर पर शहर से बाहर चले गए।
अधिक समय मांगने पर किया था जवाब-तलब
सपा एमएलसी बुक्कल नवाब ने गोमती के डूब क्षेत्र की जमीन पर अपना दावा करते हुए सरकार से मुआवजा मांगा था। मामले में हरिश्चंद्र ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। 26 अक्तूबर 2016 को हाईकोर्ट ने एक हाईपावर कमेटी बनाने और 30 जनवरी तक जांच रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया था। अफसरों ने 30 जनवरी को और समय मांग लिया।
इस पर हाईकोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई थी और दो फरवरी को जवाब तलब किया।
कोर्ट ने पूछा- देरी के लिए कौन जिम्मेदार
जस्टिस सुधीर कुमार अग्रवाल और जस्टिस राकेश श्रीवास्तव ने प्रदेश के मुख्य सचिव राहुल भटनागर को व्यक्तिगत हलफनामा देकर बताने को कहा कि देरी के लिए कौन अधिकारी जिम्मेदार हैं, उनके नाम बताएं। ये अधिकारी बताएं कि समय पर कमेटी क्यों नहीं बनी?
हाईकोर्ट केआदेश का जानबूझकर पालन नहीं करने के लिए उन पर अवमानना का केस क्यों न चले जिन अधिकारियों को जिम्मेदार माना जाए, व हाईकोर्ट में उपस्थित हों।