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Lucknow News: ई रिक्शा की बढ़ती संख्या, यातायात समस्या पर हाईकोर्ट सख्त
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लखनऊ। राजधानी में ई रिक्शा की बढ़ती संख्या और यातायात समस्या पर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सख्त रुख अपनाया है। 21 सितंबर को कोर्ट के समक्ष पेश होकर यातायात प्रबंधन के सुझाव देने वाले यातायात पुलिस, नगर निगम और पीडब्ल्यूडी के प्रतिनिधि अधिकारियों को पांच अक्तूबर को एक बार फिर तलब किया है।
न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने सूरज सिंह विसेन की जनहित याचिका पर यह आदेश दिया। इससे पहले लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता और नगर निगम के नगर आयुक्त की ओर से नामित अतिरिक्त नगर आयुक्त को कोर्ट के समक्ष उपस्थित होने का आदेश दिया गया था।
न्यायालय को बताया गया है कि ई रिक्शा के लिए पहले जारी किए गए निर्देशों के संबंध में राज्य सरकार केंद्र की प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा कर रही है। इस संबंध में अन्य उपाय किए जाएंगे और कुछ विशेष मार्गों पर इनके संचालन पर रोक लगाने से संबंधित मुद्दा विचाराधीन है। इस संबंध में आवश्यक जानकारी अगली सुनवाई में दी जाएगी।
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कोर्ट को यह भी बताया गया कि सभी व्यावसायिक भवनों के नक्शे बेसमेंट में पार्किंग की व्यवस्था करने के बाद ही स्वीकृत किए गए हैं। हालांकि, न्यायालय के संज्ञान में लाया गया कि अधिकतर प्रतिष्ठान बेसमेंट का इस्तेमाल पार्किंग के लिए नहीं कर रहे हैं। इन प्रतिष्ठानों में आने वालों के वाहन मुख्य सड़क पर खड़े किए जा रहे हैं। इससे जाम लगने के साथ यातायात बाधित हो रहा है। इस पर कोर्ट ने एलडीए और अन्य एजेंसियों के वकीलों को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई पर यह बताएं कि वाणिज्यिक भवनों के बेसमेंट में पार्किंग कैसे चलाई जा सकती है।
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न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने सूरज सिंह विसेन की जनहित याचिका पर यह आदेश दिया। इससे पहले लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता और नगर निगम के नगर आयुक्त की ओर से नामित अतिरिक्त नगर आयुक्त को कोर्ट के समक्ष उपस्थित होने का आदेश दिया गया था।
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न्यायालय को बताया गया है कि ई रिक्शा के लिए पहले जारी किए गए निर्देशों के संबंध में राज्य सरकार केंद्र की प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा कर रही है। इस संबंध में अन्य उपाय किए जाएंगे और कुछ विशेष मार्गों पर इनके संचालन पर रोक लगाने से संबंधित मुद्दा विचाराधीन है। इस संबंध में आवश्यक जानकारी अगली सुनवाई में दी जाएगी।
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कोर्ट को यह भी बताया गया कि सभी व्यावसायिक भवनों के नक्शे बेसमेंट में पार्किंग की व्यवस्था करने के बाद ही स्वीकृत किए गए हैं। हालांकि, न्यायालय के संज्ञान में लाया गया कि अधिकतर प्रतिष्ठान बेसमेंट का इस्तेमाल पार्किंग के लिए नहीं कर रहे हैं। इन प्रतिष्ठानों में आने वालों के वाहन मुख्य सड़क पर खड़े किए जा रहे हैं। इससे जाम लगने के साथ यातायात बाधित हो रहा है। इस पर कोर्ट ने एलडीए और अन्य एजेंसियों के वकीलों को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई पर यह बताएं कि वाणिज्यिक भवनों के बेसमेंट में पार्किंग कैसे चलाई जा सकती है।