फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   High court summoned the state government for violence over CAA and NRC

नागरिकता कानून : हिंसा को लेकर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से किया जवाब तलब, दिया दो सप्ताह का समय

Fri, 20 Dec 2019 08:10 PM IST
Avdhesh Kumar अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Avdhesh Kumar Updated Fri, 20 Dec 2019 08:10 PM IST
विज्ञापन
High court summoned the state government for violence over CAA and NRC
यूपी पुलिस - फोटो : अमर उजाला
हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में विरोध प्रदर्शन के दौरान बृहस्पतिवार को राजधानी समेत अन्य जगहों पर हुई हिंसा के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर राज्य सरकार से दो सप्ताह में जवाब तलब किया है। कोर्ट ने लखनऊ के डीएम को निर्देश दिया है कि हिंसा से प्रभावित हुए लोगों की हर संभव मदद स्वंय सेवी संस्थाओं और स्थानीय प्राधिकारियों के सहयोग से करें।
विज्ञापन


अदालत ने इस मामले में सरकार को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय देकर उसके बाद अगला सुनवाई नियत की है। न्यायमूर्ति पंकज कुमार जायसवाल और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की बेंच ने शुक्रवार को यह आदेश स्थानीय वकील शिशिर चतुर्वेदी की जनहित याचिका पर दिया। 
विज्ञापन


याची ने ऐसी हिंसा फैलाने वाले लोगों को समाज व राष्ट्र विरोधी तत्व करार देते हुए उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के सरकार को निर्देश दिए जाने का आग्रह किया है। साथ ही हिंसा से प्रभावित (जिनका जान-माल का नुकसान हुआ) लोगों को मुआवजा भी राज्य सरकार से दिलाए जाने की गुजारिश की गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन


याची ने मीडिया में आई खबरों का हवाला देते हुए दलील दी कि सरकारी अमले को पहले से पता था कि उग्र प्रदर्शन के दौरान कुछ अनहोनी हो सकती है। इसके बाद भी सरकारी मशीनरी ने इसे सामान्य मानते हुए हल्के में लेती रही जिसका परिणाम आम शहरियों को भुगतना पड़ा। याचिका के साथ अखबारों में छपी खबरों को संलग्न करते हुए भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोके जाने का आग्रह किया गया है।

उधर राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता विनोद कुमार शाही का कहना था कि याची का सरकार पर लापरवाही संबंधी आरोप बेबुनियाद है और सरकार ने इस मामले में पहले ही कार्यवाही करना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इसे गंभीरता से ले रही है। 


शाही ने कहा कि याची ने जो मांगें उठाई हैं उनको लेकर राज्य सरकार ने पहले ही निर्णय ले लिया है जैसा कि शुक्रवार को खबरों में आया है। याचिका में राज्य सरकार के जरिए मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव गृह, लखनऊ के डीएम, डीजीपी समेत लखनऊ के एसएसपी को पक्षकार बनाया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed