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लॉकडाउन में रिमांड आदेश न पारित करने वाले जजों का ब्योरा तलब, हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान

Mon, 07 Dec 2020 01:21 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Mon, 07 Dec 2020 01:21 AM IST
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High court sought details of magistrates and session judges
लखनऊ हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने लॉकडाउन में निचली अदालतों द्वारा आरोपियों के रिमांड आदेश न पारित किए जाने के मामले का संज्ञान लिया है। बीते 25 मार्च से 16 जून तक रिमांड आदेश न पारित करने वाले लखनऊ और हरदोई के मजिस्ट्रेटों और सत्र न्यायाधीशों का ब्योरा तलब किया गया है। साथ ही कोर्ट ने 10 दिसंबर को लखनऊ बेंच के वरिष्ठ निबंधक और यूपी राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य-सचिव को भी संबंधित जिलों के पूरे विवरण के साथ पेश होने का आदेश दिया है। 
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वहीं, राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण को नोटिस भी जारी किया है। कोर्ट ने लॉकडाउन से पहले के मामलों में रिमांड आदेश न जारी करने और 90 दिनों में चार्जशीट न दाखिल होने के बावजूद जमानत अर्जियां खारिज करने पर तल्ख टिप्पणी की है। न्यायमूर्ति एआर मसूदी ने यह आदेश अभिषेक श्रीवास्तव और संजीव यादव की जमानत अर्जियों पर सुनवाई के बाद जमानत मंजूर करते हुए दिया। 
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कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की कि यह आश्चर्यजनक है कि जिला व सत्र न्यायाधीशों या मजिस्ट्रेटों द्वारा जमानत व रिमांड के मामलों में पूरी प्रक्रिया को गलत तरीके से समझा गया। जबकि गत 25 मार्च का हाईकोर्ट का आदेश बेहद स्पष्ट था। फिर भी सत्र न्यायाधीशों या मजिस्ट्रेटों ने संबंधित नियम या पहले के सर्कुलर के तहत कार्यवाही नहीं किया, जिसमें छुट्टियों के दौरान की प्रक्रिया वर्णित थी। 
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कोर्ट ने रिमांड की अवधि बढ़ाए बगैर आरोपियों को जेल में रखने पर सख्त रुख अख्तियार किया। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि आरोपी अभिषेक को लखनऊ पुलिस ने धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार कर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया, जहां से मजिस्ट्रेट ने अभियुक्त को 16 जनवरी को न्यायिक रिमांड पर लेते हुए 14 दिनों के लिए जेल भेज दिया था। जबकि आरोपी संजीव की शुरुआती रिमांड गत 31 जनवरी को मंजूर हुई थी।
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