कानूनी पचड़े में फंसी 'आर्टिकल 15', हाईकोर्ट ने फिल्म से संबंधित पक्षों से तीन हफ्ते में मांगा जवाब
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हिंदी फिल्म ‘आर्टिकल 15’ में जातिसूचक शब्दों और अभद्र भाषा के इस्तेमाल वाले दृश्यों से समाज को नुकसान हो रहा है। इन्हें हटाया जाना चाहिए। मंगल पांडे सेना ने यह निवेदन करते हुए फिल्म के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में याचिका दायर की है। अदालत ने संबंधित पक्षों को याचिका पर तीन हफ्ते में अपना जवाब रखने के लिए कहा है।
याचिकाकर्ता व पांडे सेना के अध्यक्ष अमरेश मिश्रा ने हाईकोर्ट में बताया कि फिल्म में जातिसूचक व अभद्र शब्दों का उपयोग किया गया है। इनका समाज पर नकारात्मक असर होता है। ऐसे में फिल्म को अगर प्रदर्शित भी किया जाता है तो इसके अभद्र भाषा वाले दृश्यों को सेंसर किया जाना चाहिए।
याची के वकील निशांत शेखर मिश्रा ने बताया कि सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल और प्रदेश सरकार की ओर से मुख्य स्थायी अधिवक्ता उपस्थित रहे।
सेंसर बोर्ड व फिल्म निर्माताओं को भी बनाया पक्षकार
भारतीय सेंसर बोर्ड व फिल्म निर्माताओं को भी याची ने पक्षकार बनाया है। सुनवाई के बाद जस्टिस अनिल कुमार और जस्टिस डॉ. योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने संबंधित पक्षों को तीन हफ्ते में अपना जवाब हलफनामे पर पेश करने के लिए कहा है।